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क्या सुरैया के घर फैन बारात लेकर पहुँच गया था?

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क्या सुरैया के घर फैन बारात लेकर पहुँच गया था?

सारांश

1950 के दशक की चर्चित अदाकारा सुरैया की कहानी, जिन्होंने अपनी गायकी से फ़िल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाई। सुरैया की लोकप्रियता ने उन्हें एक प्रशंसक के बारात लेकर घर पहुँचने जैसी स्थिति में डाल दिया। आइए जानते हैं उनकी अनकही कहानियों के बारे में।

मुख्य बातें

सुरैया प्रसिद्धि के साथ चुनौतियाँ भी आती हैं, जैसे प्रशंसकों का अत्यधिक ध्यान।
सुरैया ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से फ़िल्मों में सफलता प्राप्त की।
उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि कड़ी मेहनत और प्रतिभा से कुछ भी संभव है।

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। 40 के दशक में फ़िल्मी दुनिया में कई आकर्षक और अनुभवी अदाकाराओं ने राज किया। मीना कुमारी, बेगम पारा, मधुबाला और नरगिस जैसी अदाकाराएं उस समय पर्दे पर छाई हुई थीं, लेकिन एक अदाकारा ऐसी थी जो केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से भी अपनी मधुर आवाज़ से प्रशंसकों का दिल जीत रही थी।

हम सुरैया की बात कर रहे हैं, जिनका असली नाम सुरैया जमाल शेख था और उनका जन्म 15 जून 1929 को पाकिस्तान के लाहौर में हुआ।

सुरैया का जन्म लाहौर में हुआ था, लेकिन उनका परिवार जल्दी ही मुंबई में बस गया, जहाँ उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। हालाँकि, फ़िल्मी क्षेत्र में कदम रखना उनके लिए आसान था, क्योंकि उनके मामा एम. जहूर पहले से ही हिंदी सिनेमा में सक्रिय थे और एक खलनायक के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। लेकिन सुरैया को फ़िल्म इंडस्ट्री में पहला मौक़ा एक गायिका के रूप में मिला। वह बचपन में ऑल इंडिया रेडियो पर गाना गाती थीं, और उनके गाने को प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद साहब ने सुना और छोटी उम्र में ही सुरैया को फ़िल्म "शारदा" में गाने का मौका दिया, जिसमें उन्होंने "नई दुनिया" नाम का गाना गाया।

सुरैया ने निर्देशक के. आसिफ के साथ बतौर अदाकारा फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें 40 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इसके बाद उन्होंने 'प्यार की जीत', 'अनमोल घड़ी', 'परवाना', 'उमर खय्याम', और 'दर्द' जैसी फ़िल्मों में काम किया और महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की। माना जाता है कि फ़िल्मी दुनिया में बतौर अदाकारा उन्हें के एल सहगल का बहुत सहयोग मिला। दोनों ने मिलकर कई फ़िल्मों में काम किया और उनकी सिफ़ारिशों के चलते सुरैया को फ़िल्मों और सफलता दोनों मिलने लगे।

1950 के दशक में सुरैया फ़िल्म उद्योग का एक प्रमुख नाम बन गईं और उनकी लोकप्रियता उनके लिए एक चुनौती बन गई। उनकी एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों की भीड़ उनके घर और सिनेमा के बाहर इकट्ठा होती थी। सुरैया को छिपकर घर से निकलना पड़ता था और पुलिस की सुरक्षा लेनी पड़ती थी। एक बार एक प्रशंसक उनके साथ शादी के लिए बारात लेकर उनके घर पहुँच गया था और मुंहदिखाई में 2 लाख

इस दीवाने प्रशंसक को हटाने के लिए पुलिस का सहारा लेना पड़ा। इसके अलावा, प्रशंसकों की बढ़ती भीड़ के कारण सुरैया ने फ़िल्मों के प्रीमियर में जाना तक छोड़ दिया था। सभी अभिनेता और निर्देशक चाहते थे कि वह फ़िल्म के प्रीमियर में आएं, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन जाती थीं कि कई बार प्रीमियर रद्द करना पड़ता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हमें यह भी याद दिलाती है कि प्रशंसा और प्रसिद्धि एक साथ चुनौतियाँ भी लाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरैया का असली नाम क्या था?
सुरैया का असली नाम सुरैया जमाल शेख था।
सुरैया ने किस फ़िल्म से अपने करियर की शुरुआत की?
सुरैया ने फ़िल्म 'शारदा' से अपने करियर की शुरुआत की थी।
सुरैया का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था।
किस प्रसिद्ध संगीतकार ने सुरैया को पहचान दिलाई?
प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद साहब ने सुरैया की आवाज़ को पहचान दिलाई।
सुरैया की लोकप्रियता का कारण क्या था?
सुरैया की मधुर आवाज़ और उनकी फ़िल्मों में अदाकारी ने उन्हें बहुत प्रसिद्ध बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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