9 अक्टूबर 2026
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तनुश्री दत्ता का मीटू पीड़ा पर बयान: 'नाना पाटेकर के खिलाफ केस में धमकी, फूड पॉइज़निंग तक की कोशिश'

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तनुश्री दत्ता का मीटू पीड़ा पर बयान: 'नाना पाटेकर के खिलाफ केस में धमकी, फूड पॉइज़निंग तक की कोशिश'

सारांश

तनुश्री दत्ता ने मीटू केस की पीड़ा एक बार फिर सामने रखी — धमकियाँ, फूड पॉइज़निंग की कोशिश, पाँच साल में तैयार गवाह, और फिर भी जीत के दिन कोर्ट का केस बंद करना। उनका बयान उस कच्चे दर्द की आवाज़ है जो न्याय की राह में अकेले लड़ने वाली हर महिला की है।

मुख्य बातें

तनुश्री दत्ता ने 9 अक्टूबर 2026 को नाना पाटेकर के खिलाफ मीटू केस की पीड़ा और संघर्ष को विस्तार से बयान किया।
उनके अनुसार, केस वापस लेने के लिए उन्हें लालच और धमकियाँ दी गईं; कथित तौर पर गाड़ी से हादसे और फूड पॉइज़निंग की कोशिशें भी हुईं।
प्राइम विटनेस ( हेयर ड्रेसर ) को तैयार करने में पाँच साल लगे; उसे भी पीसीओ से धमकियाँ मिलती थीं।
जिस दिन मुख्य गवाह का बयान कोर्ट में पेश होने वाला था, उसी दिन जज ने केस बंद कर दिया।
तनुश्री ने बताया कि वे इस दौरान गहरे डिप्रेशन में चली गई थीं और बाहर निकलने से डरती थीं।

अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने 9 अक्टूबर 2026 को अभिनेता नाना पाटेकर को लेकर दिए गए एक बयान पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मीटू आंदोलन के दौरान अपने ऊपर हुए कथित दबाव, धमकियों और मानसिक यातना का जिक्र करते हुए कहा कि उस दर्द को कोई नहीं समझ सकता। तनुश्री के इस बयान ने वर्षों पुराने विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

तनुश्री का सीधा बयान

अभिनेत्री ने कहा, 'मेरे लिए तो वे इविल डेड ही हैं। पिछले पाँच साल में मैं जिस दौर से गुज़री हूँ और जिन परेशानियों का सामना किया है, उसे कोई नहीं समझ सकता।' उनका यह बयान उस लंबी कानूनी और व्यक्तिगत लड़ाई की पीड़ा को उजागर करता है, जो उन्होंने नाना पाटेकर के खिलाफ कथित उत्पीड़न मामले में लड़ी।

तनुश्री ने दावा किया कि केस वापस लेने के लिए उन पर जबरदस्त दबाव डाला गया। उन्होंने कहा, 'मुझे लालच दिया गया और धमकियाँ मिलीं, लेकिन फिर भी मैंने केस वापस नहीं लिया।' उनके अनुसार, इसके बाद कथित तौर पर उनकी गाड़ी के साथ हादसे करवाने और फूड पॉइज़निंग कराने तक की कोशिशें की गईं।

गवाह और अदालती प्रक्रिया

तनुश्री दत्ता ने बताया कि इस मामले में एक प्राइम विटनेस — उनकी हेयर ड्रेसर — को तैयार करने में पाँच साल लग गए। उन्होंने कहा, 'उसे पीसीओ से धमकियाँ आती थीं, लोग उसके घर पर जाते थे। हमने कई स्रोत लगाकर उसे कोर्ट ले गए थे।'

अभिनेत्री के अनुसार, जिस दिन उस गवाह का बयान अदालत में पेश होने वाला था, उसी दिन जज ने केस बंद कर दिया। उन्होंने कहा, 'पाँच साल लगे उस हेयर ड्रेसर को मनाने में। वह कोर्ट आकर बयान दे चुकी थी कि 'मैंने अपनी आँखों से देखा है।' बावजूद इसके, हमारी जीत होने वाले दिन ही केस बंद हो गया।'

केस बंद होने पर तनुश्री की राय

तनुश्री ने स्पष्ट किया कि उनकी नज़र में केस का बंद होना उनकी गलती का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह तो सबको पता है कि ज़रूरी नहीं कि जो जीता है, वह सही है। बहुत ही चालाकी से दोनों का पक्ष रखकर केस को बंद कर दिया गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि मैं गलत थी।'

गौरतलब है कि मीटू आंदोलन के शुरुआती और सबसे चर्चित मामलों में से एक तनुश्री-नाना पाटेकर का विवाद था, जिसने 2018 में भारतीय फिल्म उद्योग में व्यापक बहस छेड़ दी थी। यह ऐसे समय में आया था जब दुनियाभर में महिलाएँ कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठा रही थीं।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अभिनेत्री ने बताया कि इस पूरे मामले के दौरान वे गहरे डिप्रेशन से गुज़री थीं। उन्होंने कहा, 'मैं ऐसी इंसान थी जो बिना डरे बिंदास घूमकर आती थी, और मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि बाहर जाने के लिए मुझे दस बार सोचना पड़ता था।'

तनुश्री ने यह भी कहा कि नाना पाटेकर 'बहुत अहंकारी आदमी थे।' उनके इस बयान को मनोरंजन जगत में व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है। यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि मीटू आंदोलन के अनेक मामलों में पीड़ितों को न्याय की लड़ाई में कितनी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

तनुश्री दत्ता का यह साहसिक बयान उन महिलाओं के संघर्ष का प्रतिबिंब है जो कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने के बाद वर्षों तक कानूनी और मानसिक दबाव झेलती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनमें से अधिकांश बिना किसी निर्णायक परिणाम के खत्म हो गए। यह सवाल उठता है कि क्या कार्यस्थल उत्पीड़न के मामलों में गवाहों की सुरक्षा और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के लिए कोई ठोस कानूनी ढाँचा मौजूद है? जब तक यह खाई नहीं पाटी जाती, तब तक हर नया बयान सिर्फ एक घाव को कुरेदने का काम करता है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर का मीटू विवाद क्या था?
2018 में भारत में मीटू आंदोलन के दौरान तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न का आरोप लगाया था। यह मामला बॉलीवुड में मीटू आंदोलन का सबसे चर्चित और शुरुआती मामलों में से एक बना।
तनुश्री दत्ता का केस कैसे बंद हुआ?
तनुश्री दत्ता के अनुसार, जिस दिन उनकी मुख्य गवाह — हेयर ड्रेसर — का बयान कोर्ट में पेश होने वाला था, उसी दिन जज ने केस बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि पाँच साल की कोशिश के बाद भी न्याय नहीं मिला।
तनुश्री दत्ता को मीटू केस के दौरान किन धमकियों का सामना करना पड़ा?
तनुश्री दत्ता के अनुसार, केस वापस लेने के लिए उन्हें लालच और धमकियाँ दी गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर उनकी गाड़ी से हादसे करवाने और फूड पॉइज़निंग कराने की कोशिशें की गईं।
तनुश्री दत्ता की गवाह को किस तरह की परेशानियाँ हुईं?
तनुश्री के अनुसार, उनकी प्राइम विटनेस — हेयर ड्रेसर — को पीसीओ से धमकियाँ मिलती थीं और लोग उसके घर पर भी जाते थे। उसे मनाने और कोर्ट तक लाने में पाँच साल लगे।
तनुश्री दत्ता की मानसिक स्थिति पर इस केस का क्या असर हुआ?
तनुश्री ने बताया कि वे इस पूरे मामले के दौरान गहरे डिप्रेशन में चली गई थीं। वे कहती हैं कि जो महिला कभी बेखौफ घूमती थी, वह बाहर निकलने से पहले दस बार सोचने लगी।
राष्ट्र प्रेस
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