2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विक्रम भट्ट का खुलासा: 'हॉन्टेड 3डी' निर्देशक ने बताया क्यों डर ही है हर भावना की जड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विक्रम भट्ट का खुलासा: 'हॉन्टेड 3डी' निर्देशक ने बताया क्यों डर ही है हर भावना की जड़

सारांश

विक्रम भट्ट के लिए हॉरर महज एक शैली नहीं — यह मानव मनोविज्ञान की खिड़की है। 'हॉन्टेड 3डी' के प्रमोशन पर उन्होंने खुलासा किया कि लालच, प्रेम, होड़ — सब डर के ही रूप हैं। यही दर्शन उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे अलग हॉरर फिल्मकार बनाता है।

मुख्य बातें

निर्देशक विक्रम भट्ट की फिल्म 'हॉन्टेड 3डी' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।
भट्ट के अनुसार, डर ही लालच, अधिकार-भावना और प्रतिस्पर्धा जैसी सभी मानवीय भावनाओं की बुनियाद है।
उन्होंने कहा कि पूरा जीव-जगत डर के आधार पर चलता है — यह जीवन-रक्षा के लिए अनिवार्य है।
भट्ट अपनी फिल्मों में इंसान के उस छिपे हुए पक्ष को दिखाते हैं जिसे समाज खुलकर स्वीकार नहीं करता।
उनके अनुसार, किसी व्यक्ति की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री उसकी असली पहचान बताती है।

निर्देशक विक्रम भट्ट की नई फिल्म 'हॉन्टेड 3डी' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, और इस मौके पर उन्होंने पहली बार विस्तार से बताया कि हॉरर शैली उन्हें इतनी गहराई से क्यों आकर्षित करती है। मुंबई में फिल्म के प्रमोशन के दौरान भट्ट ने कहा कि उनके लिए डर महज एक सिनेमाई तत्व नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान की बुनियाद है।

डर को लेकर विक्रम भट्ट का नज़रिया

भट्ट ने कहा, 'मुझे लगता है कि डर ही दुनिया की बाकी सभी भावनाओं का आधार है। अगर किसी इंसान को अपने किसी करीबी व्यक्ति को खोने का डर होता है, तो वही डर उसके अंदर अधिकार जताने की भावना पैदा करता है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि जिसे लोग लालच कहते हैं, वह दरअसल 'पर्याप्त न होने का डर' है, और जो होड़ दिखती है, वह 'पीछे छूट जाने के डर' से जन्म लेती है।

निर्देशक के अनुसार, 'अक्सर लोग इन भावनाओं को अलग-अलग नाम देते हैं, लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो इनके पीछे डर ही छिपा होता है। दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी डर के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं होता कि उनकी कई भावनाओं की असली वजह डर ही है।'

जीव-जगत और जीवन-रक्षा में डर की भूमिका

भट्ट ने अपनी बात को और व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा, 'सिर्फ इंसानों की दुनिया ही नहीं, बल्कि पूरा जीव-जगत डर के आधार पर चलता है। डर जिंदा रहने के लिए जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति किसी खतरनाक जानवर को देखकर नहीं डरेगा, तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती है।' यह दृष्टिकोण उनकी फिल्मों में बार-बार झलकता है — जहाँ भय केवल चौंकाने का माध्यम नहीं, बल्कि पात्रों की भीतरी दुनिया को उजागर करने का औज़ार बनता है।

इंसान का छिपा हुआ पक्ष और फिल्मों की विषय-वस्तु

विक्रम भट्ट ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में उन्हीं विषयों को चुना है जिन पर समाज खुलकर बात करने से बचता है — रिश्तों की जटिलताएँ, मन का अंधेरा पक्ष और दबी हुई भावनाएँ। उनके शब्दों में, 'इंसान की असली पहचान कई बार उसके इंटरनेट पर किए गए सर्च से समझी जा सकती है। लोग दुनिया के सामने एक चेहरा दिखाते हैं, लेकिन उनके मन में कई ऐसे सवाल, इच्छाएं और डर होते हैं, जिन्हें वे किसी से साझा नहीं करते।'

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर एक ऐसा पक्ष होता है जिसे दुनिया नहीं जानती, और उसी अनजाने पक्ष को परदे पर उतारना उनका मुख्य रचनात्मक लक्ष्य है। यह नज़रिया उनकी हॉरर फिल्मों को महज 'जम्प-स्केयर' से अलग करता है।

हॉरर शैली में विक्रम भट्ट की पहचान

गौरतलब है कि विक्रम भट्ट हिंदी सिनेमा में हॉरर शैली के सबसे सक्रिय निर्देशकों में से एक माने जाते हैं। पिछले कई वर्षों में उन्होंने एक के बाद एक ऐसी फिल्में दी हैं जो दर्शकों को भयभीत करने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी झकझोरती हैं। 'हॉन्टेड 3डी' इसी सिलसिले की नई कड़ी है।

'हॉन्टेड 3डी' के साथ भट्ट एक बार फिर उस अंधेरे कोने में झाँकने की कोशिश कर रहे हैं जिसे दर्शक देखना तो चाहते हैं, लेकिन अकेले नहीं जाना चाहते।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह विचार केवल प्रमोशनल बातचीत तक सीमित रहता है। हिंदी हॉरर सिनेमा अब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान नहीं बना पाया जो उसके निर्माताओं की महत्वाकांक्षा के अनुरूप हो। भट्ट की मनोवैज्ञानिक समझ निस्संदेह प्रभावशाली है, पर असली कसौटी यह है कि दर्शक सिनेमाघर से निकलते वक्त केवल डरे हुए हों, या कुछ सोचते हुए भी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम भट्ट की नई फिल्म 'हॉन्टेड 3डी' क्या है?
'हॉन्टेड 3डी' निर्देशक विक्रम भट्ट की नई हॉरर फिल्म है जो हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। यह फिल्म भट्ट की हॉरर शैली की फिल्मों की लंबी श्रृंखला की नई कड़ी है।
विक्रम भट्ट हॉरर फिल्में बनाने में इतनी रुचि क्यों रखते हैं?
भट्ट के अनुसार, डर मानव मनोविज्ञान की बुनियाद है — लालच, प्रेम, प्रतिस्पर्धा, सभी भावनाएँ किसी न किसी डर से जन्म लेती हैं। वे उन विषयों पर काम करना पसंद करते हैं जिन पर समाज खुलकर बात नहीं करता, और हॉरर उन्हें इंसान के छिपे हुए पक्ष को दिखाने का सबसे सटीक माध्यम लगता है।
विक्रम भट्ट के अनुसार डर और जीव-जगत का क्या संबंध है?
भट्ट का मानना है कि केवल इंसान ही नहीं, पूरा जीव-जगत डर के आधार पर चलता है। उनके अनुसार, डर जीवित रहने के लिए अनिवार्य है क्योंकि यही खतरे से सावधान करता है और सुरक्षित रहने का रास्ता दिखाता है।
विक्रम भट्ट अपनी फिल्मों में किस तरह के विषय चुनते हैं?
भट्ट उन विषयों को प्राथमिकता देते हैं जिन पर लोग खुलकर बात नहीं करते — रिश्तों की जटिलताएँ, मन का अंधेरा पक्ष और दबी हुई भावनाएँ। उनका मानना है कि हर इंसान के भीतर एक ऐसा पक्ष होता है जिसे दुनिया नहीं जानती, और उसी को परदे पर उतारना उनका रचनात्मक लक्ष्य है।
विक्रम भट्ट ने इंटरनेट सर्च और इंसान की पहचान के बारे में क्या कहा?
भट्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की असली पहचान कई बार उसकी इंटरनेट सर्च हिस्ट्री से समझी जा सकती है। लोग सार्वजनिक रूप से एक चेहरा दिखाते हैं, लेकिन मन में ऐसे सवाल, इच्छाएँ और डर होते हैं जिन्हें वे किसी से साझा नहीं करते।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले