विक्रम भट्ट का खुलासा: F1 रेसिंग के दीवाने हैं 'हॉन्टेड 3डी' के डायरेक्टर, IPL में नहीं है कोई दिलचस्पी
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म 'हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट' इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है, जिसमें अभिनेता महाक्षय चक्रवर्ती मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की सफलता के बीच विक्रम भट्ट ने एक विशेष बातचीत में अपनी रचनात्मकता के स्रोतों, व्यक्तिगत शौक और दुनिया को देखने के अपने नज़रिए के बारे में खुलकर बात की।
साइंस और टेक्नोलॉजी से गहरा लगाव
विक्रम भट्ट ने बताया कि उनकी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा विज्ञान और तकनीक को समझने में बीतता है। उन्होंने कहा, 'मेरी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा साइंस और टेक्नोलॉजी को समझने और उससे जुड़ी नई जानकारियों को पढ़ने में जाता है। मुझे नई खोजें, तकनीकी बदलाव और वैज्ञानिक सोच हमेशा से आकर्षित करती रही हैं।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह महज एक शौक नहीं, बल्कि उनकी सोच की बुनियाद है। उनके अनुसार, 'यह मेरा सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि मेरी सोच का अहम हिस्सा है, जो मुझे कहानियां गढ़ने में भी मदद करता है। आज की दुनिया तेजी से बदल रही है और टेक्नोलॉजी हर इंसान की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, इसलिए इसे समझना बेहद जरूरी है।'
F1 रेसिंग के पक्के फैन, IPL से दूरी
विक्रम भट्ट ने यह भी बताया कि खेलों में उनकी रुचि बेहद चुनिंदा है। उन्होंने कहा, 'मैं फॉर्मूला 1 रेसिंग का बड़ा फैन हूं और लगभग हर सीजन को फॉलो करता हूं।' इसके विपरीत, उन्होंने स्वीकार किया कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) उनकी रुचि के दायरे में नहीं आती और कई क्रिकेटरों के नाम भी उन्हें याद नहीं हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े लेख पढ़ना उनकी पसंद का एक और पहलू है। उनके शब्दों में, 'मैं दुनिया भर के आर्थिक विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों की राय को ध्यान से पढ़ता हूं, इससे सोच का दायरा बढ़ता है।'
डर को बताया सभी भावनाओं की जड़
हॉरर शैली से अपने गहरे जुड़ाव को समझाते हुए विक्रम भट्ट ने एक दिलचस्प दार्शनिक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि डर ही दुनिया की बाकी सभी भावनाओं का आधार है। अगर किसी इंसान को अपने किसी करीबी व्यक्ति को खोने का डर होता है, तो वही डर उसके अंदर अधिकार जताने की भावना पैदा करता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर किसी को लगता है कि उसके पास पर्याप्त चीजें नहीं हैं, तो वही डर लालच का रूप ले लेता है। इसी तरह अकेले रह जाने का डर लोगों को रिश्ते बनाने के लिए प्रेरित करता है और पीछे छूट जाने का डर उन्हें दूसरों से आगे निकलने की होड़ में शामिल कर देता है।'
जीव-जगत भी चलता है डर के सहारे
विक्रम भट्ट ने अपनी बात को और विस्तार देते हुए कहा, 'अक्सर लोग भावनाओं को अलग-अलग नाम देते हैं, लेकिन अगर गहराई से देखा जाए तो इनके पीछे डर ही छिपा होता है। दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी डर के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं होता कि उनकी कई भावनाओं की असली वजह डर ही है।'
उन्होंने यह भी कहा कि डर केवल इंसानी दुनिया तक सीमित नहीं है — 'सिर्फ इंसानों की दुनिया ही नहीं, बल्कि पूरा जीव-जगत डर के आधार पर चलता है। डर जिंदा रहने के लिए जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति किसी खतरनाक जानवर को देखकर नहीं डरेगा, तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती है।' यह दर्शन उनकी फिल्मों की गहरी मनोवैज्ञानिक परतों को भी समझाता है।