यश चोपड़ा जयंती: 'रोमांस के बादशाह' जिन्होंने SRK को 'किंग ऑफ रोमांस' और अमिताभ को 'एंग्री यंग मैन' बनाया
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा के महानतम फिल्मकारों में शुमार यश चोपड़ा की आज 27 सितंबर 2026 को 94वीं जयंती है — वही यश चोपड़ा, जिन्होंने पाँच दशकों तक बॉलीवुड की रोमांटिक विधा को अपनी कल्पनाशील दृष्टि से नया आकार दिया और कई साधारण कलाकारों को असाधारण सुपरस्टार में बदल दिया। उन्हें 'रोमांस का बादशाह' कहा जाता है — एक उपाधि जो उनकी फिल्मों की भावनात्मक गहराई और दर्शकों से उनके अटूट रिश्ते को बखूबी बयाँ करती है।
प्रारंभिक जीवन और फिल्मी दुनिया में कदम
यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता लाला विलायती राज चोपड़ा ब्रिटिश पंजाब प्रशासन के लोक निर्माण विभाग (PWD) में अकाउंटेंट थे। अपने आठ भाई-बहनों में सबसे छोटे यश ने प्रारंभिक शिक्षा लाहौर में ही पूरी की। विभाजन के बाद परिवार पंजाब के लुधियाना में बस गया।
फिल्मी दुनिया में उनकी पहली सीढ़ी थे उनके बड़े भाई और प्रतिष्ठित फिल्मकार बीआर चोपड़ा, जिनके सहायक के रूप में यश ने इस उद्योग की बारीकियाँ सीखीं। वर्ष 1959 में उन्होंने सामाजिक विषय पर बनी फिल्म 'धूल का फूल' से बतौर स्वतंत्र निर्देशक अपनी पारी शुरू की — और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
यश राज फिल्म्स की स्थापना और विरासत
वर्ष 1971 में यश चोपड़ा ने अपनी स्वतंत्र प्रोडक्शन कंपनी यश राज फिल्म्स (YRF) की नींव रखी, जो आज भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित फिल्म स्टूडियो में से एक है। पाँच दशक लंबे करियर में उन्होंने 'वक्त', 'दीवार', 'त्रिशूल', 'कभी-कभी', 'सिलसिला', 'चांदनी', 'लम्हे', 'डर', 'दिल तो पागल है' और 'वीर-जारा' जैसी कालजयी फिल्मों का निर्माण किया। इन फिल्मों की खास बात यह है कि ये आज की पीढ़ी को भी उतनी ही भावनात्मक रूप से छूती हैं जितनी उस समय की।
कलाकारों की किस्मत बदलने वाले फिल्मकार
यश चोपड़ा को शाहरुख खान का असली 'गॉडफादर' माना जाता है। उनकी फिल्मों — विशेषकर 'डर' और 'दिल तो पागल है' — ने शाहरुख को 'किंग ऑफ रोमांस' के रूप में स्थापित किया। इसी तरह, अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का 'एंग्री यंग मैन' बनाने का श्रेय भी काफी हद तक यश चोपड़ा की फिल्म 'दीवार' को जाता है। यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड में नायक की परिभाषा बदल रही थी, और यश चोपड़ा ने उस बदलाव को सबसे पहले भाँपा।
व्यक्तिगत जीवन
यश चोपड़ा ने वर्ष 1970 में पामेला सिंह से विवाह किया। पामेला न सिर्फ एक कुशल प्लेबैक सिंगर थीं, बल्कि लेखिका और फिल्म प्रोड्यूसर भी थीं। उन्होंने 'कभी-कभी', 'सिलसिला' और 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए अपनी आवाज़ और कलम दोनों का योगदान दिया। दंपती के दो बेटे हैं — आदित्य चोपड़ा (फिल्म निर्देशक और यश राज फिल्म्स के प्रमुख) और उदय चोपड़ा (अभिनेता व निर्माता)।
पुरस्कार और विदाई
यश चोपड़ा को भारतीय सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म भूषण सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ा गया। उन्होंने अपने करियर में 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 8 फिल्मफेयर पुरस्कार अर्जित किए। 21 अक्टूबर 2012 को मुंबई में उनका निधन हो गया — परंतु उनकी फिल्में और उनका रोमांटिक दर्शन हिंदी सिनेमा की आत्मा में आज भी जीवंत हैं।