कैसे जबीन जलील को मिली फिल्म में हीरोइन बनने का अवसर, यूसुफ और निगार सुल्ताना थे प्रभावित
सारांश
Key Takeaways
- जबीन जलील की फिल्मी करियर की शुरुआत 1954 में हुई।
- उन्होंने 34 फिल्मों में काम किया, जिनमें कई सफल फिल्में शामिल हैं।
- उनकी एक्टिंग ने यूसुफ और निगार सुल्ताना को प्रभावित किया।
- उन्हें 'अभिजन' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ।
- जबीन ने हमेशा नए कलाकारों को प्रोत्साहित किया।
मुंबई, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विगत दशकों की प्रसिद्ध अभिनेत्री जबीन जलील ने 1954 में फिल्म ‘गुजारा’ से अपने करियर की शुरुआत की, और 1974 में ‘वचन’ उनकी अंतिम प्रदर्शित फिल्म रही। अपने बीस साल के करियर में उन्होंने 34 फिल्मों में काम किया, जिनमें कई उल्लेखनीय भूमिकाएँ शामिल हैं।
1 अप्रैल को जन्मी जबीन जलील की फिल्मी यात्रा एक अद्भुत संयोग से आरंभ हुई। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने थिएटर में भी भाग लिया। एक कॉलेज प्रोग्राम के दौरान जब वह मंच पर एक छोटी बच्ची का रोल निभा रही थीं, तो उस समय के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एस.एम. यूसुफ और अभिनेत्री निगार सुल्ताना दर्शकों में उपस्थित थे। उनकी एक्टिंग देख वे दोनों बहुत प्रभावित हुए। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, उन्होंने जबीन से मुलाकात की और उन्हें सीधे तौर पर फिल्म में हीरोइन बनने का प्रस्ताव दिया।
जबीन ने एक इंटरव्यू में बताया, “मैं फिल्म इंडस्ट्री में 1954 में आई थी। 1954 से 1968 तक, यानी लगभग 14 साल मैंने फिल्मों में काम किया। मैं फिल्म इंडस्ट्री से बिल्कुल नहीं थी। मैं एक अच्छी छात्रा थी और मैंने बॉम्बे की क्वीन मेरी स्कूल से पढ़ाई की। मैंने सीनियर कैंब्रिज में डिस्टिंक्शन प्राप्त किया था। इसलिए मैं पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देती थी। कॉलेज के समय मैंने ‘नेक परवीन’ नामक एक नाटक किया था। उसी दौरान एक थिएटर प्रोग्राम हुआ जिसमें मैंने हिस्सा लिया। उस कार्यक्रम में एस.एम. यूसुफ और निगार सुल्ताना भी दर्शक बनकर आए थे। प्रोग्राम खत्म होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा, ‘बेबी, आप हमारी फिल्म में हीरोइन का अभिनय करेंगी।’
उन्होंने आगे कहा, मैं तो यह सुनकर बिल्कुल चकित रह गई। मैंने कहा, ‘मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं, मैं इस फिल्म में कैसे काम कर सकती हूं?’ उन्होंने कहा, ‘नहीं-नहीं, अपने माता-पिता से बात कीजिए।’ उस समय मेरे पिता गुजर चुके थे, इसलिए मैंने अपनी मां को समझाया और कहा कि मुझे एक अच्छा मौका मिल रहा है, क्यों न मैं इसे आजमाऊं? अगले ही दिन मुझे वर्ली स्थित ईस्टर्न स्टूडियो बुलाया गया, जहां मेरा स्क्रीन टेस्ट हुआ। टेस्ट इतना शानदार रहा कि मैं खुद हैरान रह गई। खासकर मेरी आंखें स्क्रीन पर इतनी खूबसूरत लग रही थीं कि मैं खुद चकित थी। इस तरह मुझे फिल्म में काम करने का अवसर मिला।
जबीन ने ‘पंचायत’ फिल्म में मनोज कुमार की पहली हीरोइन बनकर काम किया। यह फिल्म बहुत सफल रही। इसके अलावा उन्होंने किशोर कुमार, शमी कपूर, प्रदीप कुमार, जवाहर कौल, सुदेश कुमार, प्रेम चोपड़ा, चंद्रशेखर और सत्यजीत रे की फिल्म ‘अभिजन’ में भी काम किया। ‘अभिजन’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
जबीन जलील ने हमेशा नए कलाकारों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने सुरेश पुरी और धर्मेंद्र जैसी नई प्रतिभाओं के साथ काम किया। अपने करियर के बारे में उन्होंने ईमानदारी से कहा, “कुछ अच्छा, कुछ बुरा रहा। इंडस्ट्री आसान नहीं है। यहां बहुत सारी उम्मीदें टूटती हैं। मैंने कभी अपने आत्म-सम्मान से समझौता नहीं किया। बड़े बैनर और बड़े निर्देशकों की फिल्मों से मुझे हटा दिया गया, लेकिन मैंने कभी शिकायत नहीं की।”
जबीन जलील की शादी कश्मीरी पंडित अशोक काक से हुई थी। उन्होंने कहा कि दोनों के धर्म अलग थे, लेकिन उन्होंने कभी एक-दूसरे को बदलने की कोशिश नहीं की। उनकी शादी एक सिविल मैरिज थी। अब वह अपनी जिंदगी से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने अपने बेटे को भी फिल्म इंडस्ट्री में जाने से रोका क्योंकि उन्हें लगता है कि आजकल की फिल्म इंडस्ट्री में कलात्मकता कम और व्यापार ज्यादा है।