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जाकिर खान का अनसुना किस्सा: घर बनाते वक्त खुद बने चौथे मजदूर, संगीत से भरे बचपन का खुलासा

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जाकिर खान का अनसुना किस्सा: घर बनाते वक्त खुद बने चौथे मजदूर, संगीत से भरे बचपन का खुलासा

सारांश

जाकिर खान ने 'पहला पहला' पॉडकास्ट में वो किस्सा सुनाया जो उनके फैन्स ने कभी नहीं सुना था — घर बनाते वक्त वे खुद चौथे मजदूर बने। सारंगी उस्ताद के पोते की यह कहानी संघर्ष, संगीत और मेहनत का अनूठा संगम है।

मुख्य बातें

जाकिर खान ने अभिनेता गोपाल दत्त के पॉडकास्ट 'पहला पहला' में अपने जीवन के अनसुने किस्से साझा किए।
घर निर्माण के दौरान जाकिर ने खुद चौथे मजदूर की भूमिका निभाई और निर्माण सामग्री तैयार की।
जाकिर खान मशहूर सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं।
उनके मुंबई बाजार स्थित घर में हर सुबह पाँच-छह बजे संगीत अभ्यास होता था और बड़े कलाकारों का आना-जाना रहता था।
पॉडकास्ट IVM Podcast के यूट्यूब चैनल और प्रमुख ऑडियो मंचों पर उपलब्ध है।

कॉमेडियन जाकिर खान ने 5 अगस्त 2026 को अभिनेता गोपाल दत्त के पॉडकास्ट 'पहला पहला' में अपने जीवन के उन अनछुए पहलुओं को साझा किया, जो उनके संघर्ष और पारिवारिक जुड़ाव की गहरी तस्वीर पेश करते हैं। मुंबई में पले-बढ़े जाकिर ने बताया कि घर निर्माण के दौरान वे खुद एक मजदूर की तरह काम करते थे और निर्माण सामग्री तैयार करते थे।

मुख्य खुलासा: चौथे मजदूर बने जाकिर

पॉडकास्ट में जाकिर ने बताया कि जब उनका घर बन रहा था, तब वे उसी जगह रह रहे थे और निर्माण कार्य में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे। उन्होंने कहा, 'मैं आपको अपने घर के बारे में एक दिलचस्प बात बताता हूं। घर जब बन रहा था, तब मैं वहीं रह रहा था। उसमें हमारी मेहनत लगी हुई थी। हमें चार मजदूरों की जरूरत थी, लेकिन हमने केवल तीन मजदूर रखे। चौथा इंसान मैं खुद था। मैंने निर्माण सामग्री बनाई है।' यह किस्सा उनके उस दौर की आर्थिक तंगी और परिवार के प्रति समर्पण को उजागर करता है।

संगीत से सराबोर बचपन

जाकिर खान मशहूर सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं। उनके मुंबई बाजार स्थित घर में हर सुबह करीब पाँच या छह बजे दादाजी संगीत का अभ्यास करते थे। जाकिर ने बताया, 'हमारा घर संगीत से भरा हुआ था। घर में पाँच युवा लड़कों को संगीत की शिक्षा दी जाती थी। इसके अलावा कई विद्यार्थी भी सीखने के लिए आते थे और सभी अपनी बारी का इंतजार करते थे। कभी-कभी घंटों तक तबले की साधना होती थी, तो कभी सितार और सारंगी की धुनें घर में गूंजती थीं।'

गौरतलब है कि उस्ताद मोइनुद्दीन खान जीवन के अंतिम पड़ाव में भी संगीत के प्रति गहरे समर्पित थे — यह प्रेरणा जाकिर के व्यक्तित्व में स्पष्ट झलकती है।

आकाशवाणी और बड़े कलाकारों का साया

जाकिर ने बताया कि उनके दादाजी हफ्ते में एक या दो बार आकाशवाणी जाते थे, जहाँ बड़े कलाकार और गजल गायक प्रस्तुतियाँ देते थे। कई प्रसिद्ध कलाकार उनके घर भी आते थे। उन्होंने कहा, 'मैं संगीत के माहौल के बीच बड़ा हुआ, और मेरे आसपास हमेशा कला और कलाकारों की मौजूदगी रही।' यह ऐसे समय में आया है जब जाकिर कॉमेडी के क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत कर चुके हैं और उनकी पृष्ठभूमि उनके अनूठे अंदाज को और गहराई देती है।

पॉडकास्ट और उपलब्धता

'पहला पहला' पॉडकास्ट IVM Podcast के यूट्यूब चैनल और अन्य प्रमुख ऑडियो मंचों पर उपलब्ध है। गोपाल दत्त के इस शो में जाकिर ने बचपन, परिवार, संगीत और संघर्ष — सभी पहलुओं पर खुलकर बात की, जो उनके प्रशंसकों के लिए एक दुर्लभ झलक है।

जाकिर खान की यह बातचीत यह याद दिलाती है कि हँसाने वाला इंसान अक्सर सबसे गहरे संघर्षों से गुजरा होता है — और यही उनकी कॉमेडी को असली बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जाकिर जैसे कलाकार जब खुद अपनी कच्ची ज़मीन उजागर करते हैं, तो वे लाखों दर्शकों से एक ऐसा रिश्ता बनाते हैं जो स्क्रिप्टेड कॉन्टेंट नहीं बना सकता। उस्ताद मोइनुद्दीन खान की विरासत और निर्माण स्थल की मेहनत — यह दोनों मिलकर जाकिर की कॉमेडी की उस गहराई को समझाते हैं जो सिर्फ 'सचमुच' में जीए हुए लोगों में होती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जाकिर खान ने 'पहला पहला' पॉडकास्ट में क्या बताया?
जाकिर खान ने बताया कि घर निर्माण के दौरान वे खुद चौथे मजदूर की तरह काम करते थे और निर्माण सामग्री तैयार करते थे। उन्होंने अपने संगीतमय बचपन और उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते होने की अनसुनी दास्तान भी साझा की।
जाकिर खान के दादा कौन हैं?
जाकिर खान मशहूर सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं। उनके घर में हर सुबह संगीत अभ्यास होता था और कई प्रसिद्ध कलाकार उनके यहाँ आते-जाते थे।
'पहला पहला' पॉडकास्ट कहाँ देख या सुन सकते हैं?
'पहला पहला' पॉडकास्ट IVM Podcast के यूट्यूब चैनल और अन्य प्रमुख ऑडियो मंचों पर उपलब्ध है। इसे अभिनेता गोपाल दत्त होस्ट करते हैं।
जाकिर खान के बचपन का माहौल कैसा था?
जाकिर खान का बचपन मुंबई बाजार के उस घर में बीता जहाँ हर सुबह पाँच-छह बजे संगीत अभ्यास होता था। घर में पाँच युवा लड़कों को संगीत सिखाया जाता था और कई विद्यार्थी भी सीखने आते थे।
जाकिर खान ने घर बनाने में कैसे मदद की?
जाकिर खान ने बताया कि घर निर्माण के समय उन्हें चार मजदूरों की जरूरत थी, लेकिन केवल तीन रखे गए और चौथे की भूमिका उन्होंने खुद निभाई। वे निर्माण सामग्री तैयार करते थे और उसी स्थान पर रहते भी थे।
राष्ट्र प्रेस
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