क्या बचपन में योग करना जरूरी है? तंदुरुस्ती से लेकर तेज दिमाग तक के लिए फायदेमंद आसन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 21 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आज के युग में बच्चों की दिनचर्या अधिकतर मोबाइल, टीवी और इंटरनेट पर निर्भर हो गई है। इस कारण उनका शारीरिक और मानसिक विकास एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में आयुष मंत्रालय योगासन और प्राणायाम को अपने जीवन में शामिल करने की सलाह देता है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि मानसिक मजबूती भी प्रदान करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई बच्चा नियमित रूप से योग करता है, तो उसका शरीर मजबूत बनता है, मन शांत रहता है, और सोचने-समझने की क्षमता में वृद्धि होती है।
बचपन में योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से यह एक आदत बन जाती है, जो जीवनभर लाभकारी होती है। कई ऐसे योगासन हैं, जो बच्चों के लिए सरल और सुरक्षित माने जाते हैं। इनसे बच्चों का कद, पाचन तंत्र, एकाग्रता और आत्मविश्वास मजबूत होता है।
ताड़ासन :- यह आसन लंबाई बढ़ाने में मददगार साबित होता है। इस आसन में बच्चे पंजों के बल खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर खींचते हैं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी सीधी होती है और पूरे शरीर में खिंचाव आता है। यह खिंचाव शरीर की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही, जब बच्चा सांस की गति पर ध्यान केंद्रित करता है, तो उसका मन भी शांत हो जाता है।
वृक्षासन :- इस आसन में बच्चे एक पैर पर खड़े होकर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे उनकी एकाग्रता में सुधार होता है। यह न केवल पढ़ाई में, बल्कि अन्य कार्यों में भी सहायक होता है।
इनके अलावा, पादहस्तासन, वक्रासन और पश्चिमोत्तानासन जैसे आसन भी बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये आसन बच्चों की भूख बढ़ाते हैं, जिससे उनका शारीरिक विकास भी सही तरीके से होता है।
इसके अलावा, इन आसनों से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है।