21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली: सीबीआई ने भगवान महावीर अस्पताल के डॉक्टर व संविदा पर्यवेक्षक को ₹1 लाख रिश्वत में दबोचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली: सीबीआई ने भगवान महावीर अस्पताल के डॉक्टर व संविदा पर्यवेक्षक को ₹1 लाख रिश्वत में दबोचा

सारांश

दिल्ली के पीतमपुरा स्थित भगवान महावीर अस्पताल में सीबीआई ने जाल बिछाकर एक मेडिसिन विशेषज्ञ और संविदा सुपरवाइजर को ₹1 लाख की रिश्वत लेते दबोचा। टेंडर बचाने और बिल पास कराने की एवज में माँगी गई यह रिश्वत सरकारी अस्पतालों की आउटसोर्सिंग प्रणाली में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 21 अक्टूबर 2026 को भगवान महावीर अस्पताल, पीतमपुरा, दिल्ली में छापा मारकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं — मेडिसिन विशेषज्ञ हरेंद्र कुमार (आउटसोर्सिंग नोडल अधिकारी) और संविदा नर्सिंग ऑर्डरली सुपरवाइजर प्रदीप कुमार ।
रिश्वत की राशि ₹1 लाख ; टेंडर बचाने, बिल भुगतान और फाइल में 'रेड फ्लैग' न लगाने के बदले माँगी गई थी।
सीबीआई जाँच कर रही है कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं।
एजेंसी ने नागरिकों से रिश्वत की माँग होने पर तुरंत सूचना देने की अपील की है।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के पीतमपुरा स्थित भगवान महावीर अस्पताल में तैनात दो कर्मचारियों को ₹1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपियों में अस्पताल के मेडिसिन विभाग में कार्यरत डॉ. हरेंद्र कुमार और संविदा नर्सिंग ऑर्डरली सुपरवाइजर प्रदीप कुमार शामिल हैं।

मामले का घटनाक्रम

सीबीआई के अनुसार, अस्पताल के आउटसोर्सिंग नोडल अधिकारी की भूमिका निभा रहे हरेंद्र कुमार के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर बुधवार को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक ठेकेदार से ₹1 लाख की रिश्वत माँगी। जाँच एजेंसी ने तत्काल जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को उस वक्त पकड़ा जब हरेंद्र कुमार ने प्रदीप कुमार के माध्यम से यह राशि स्वीकार की।

रिश्वत के पीछे क्या था मकसद

सीबीआई के अनुसार, यह रिश्वत शिकायतकर्ता को तीन विशेष सुविधाएँ दिलाने के एवज में माँगी गई थी — पहला, उसे मिले टेंडर को रद्द होने से बचाना; दूसरा, उसके बिलों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना; और तीसरा, उसकी फाइल में किसी भी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी या 'रेड फ्लैग' न लगाना। यह प्रकरण सरकारी अस्पतालों की आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की उस व्यापक समस्या की ओर भी इशारा करता है जिसे लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) पहले भी सवाल उठा चुके हैं।

सीबीआई की जाँच का दायरा

फिलहाल दोनों आरोपी हिरासत में हैं और मामले की जाँच जारी है। सीबीआई यह पता लगाने में भी जुटी है कि इस रिश्वतखोरी के नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति या अधिकारी भी शामिल है या नहीं। एजेंसी ने पुष्टि की है कि भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध इस तरह की कार्रवाई उसकी भ्रष्टाचार-रोधी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

सीबीआई की नागरिकों से अपील

सीबीआई ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत माँगे या उन्हें भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने आए, तो वे तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करें। गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकारी और सार्वजनिक दबाव बढ़ रहा है। आगे की जाँच में यह स्पष्ट होगा कि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है या यह एकाकी घटना थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नोडल अधिकारियों को टेंडर, भुगतान और फाइल-अनुमोदन — तीनों पर एकाधिकार-जैसा नियंत्रण मिल जाता है। ₹1 लाख की राशि भले ही छोटी लगे, लेकिन यह उस व्यापक 'पे-टू-प्ले' संस्कृति का लक्षण है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा खरीद को महँगा और अक्षम बनाती है। असली सवाल यह है कि क्या जाँच केवल इन दो व्यक्तियों तक सीमित रहेगी या पूरी आउटसोर्सिंग श्रृंखला की पड़ताल होगी — क्योंकि अकेले मध्यस्थ की गिरफ्तारी बिना प्रणालीगत सुधार के भ्रष्टाचार की जड़ नहीं काटती।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान महावीर अस्पताल रिश्वत मामले में सीबीआई ने किसे गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने मेडिसिन विशेषज्ञ और आउटसोर्सिंग नोडल अधिकारी हरेंद्र कुमार तथा संविदा नर्सिंग ऑर्डरली सुपरवाइजर प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया। दोनों को 21 अक्टूबर 2026 को ₹1 लाख की रिश्वत स्वीकार करते रंगे हाथों पकड़ा गया।
यह रिश्वत किस काम के बदले माँगी गई थी?
सीबीआई के अनुसार, रिश्वत तीन सुविधाओं के एवज में माँगी गई थी — शिकायतकर्ता के टेंडर को रद्द होने से बचाना, उसके बिलों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और फाइल में प्रतिकूल टिप्पणी या 'रेड फ्लैग' न लगाना।
सीबीआई ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया। एजेंसी के अनुसार हरेंद्र कुमार ने प्रदीप कुमार के माध्यम से ₹1 लाख की रिश्वत स्वीकार की, जिसके बाद दोनों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।
क्या इस मामले में और लोगों की भी जाँच होगी?
हाँ, सीबीआई यह पता लगा रही है कि इस रिश्वतखोरी नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। मामले की आगे की जाँच जारी है।
नागरिक रिश्वत की माँग होने पर क्या करें?
सीबीआई ने अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत माँगे या भ्रष्टाचार का मामला सामने आए, तो नागरिक तुरंत सीबीआई या संबंधित एजेंसियों को सूचित करें। एजेंसी ने कहा कि भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले