दिल्ली: सीबीआई ने भगवान महावीर अस्पताल के डॉक्टर व संविदा पर्यवेक्षक को ₹1 लाख रिश्वत में दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के पीतमपुरा स्थित भगवान महावीर अस्पताल में तैनात दो कर्मचारियों को ₹1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपियों में अस्पताल के मेडिसिन विभाग में कार्यरत डॉ. हरेंद्र कुमार और संविदा नर्सिंग ऑर्डरली सुपरवाइजर प्रदीप कुमार शामिल हैं।
मामले का घटनाक्रम
सीबीआई के अनुसार, अस्पताल के आउटसोर्सिंग नोडल अधिकारी की भूमिका निभा रहे हरेंद्र कुमार के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर बुधवार को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक ठेकेदार से ₹1 लाख की रिश्वत माँगी। जाँच एजेंसी ने तत्काल जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को उस वक्त पकड़ा जब हरेंद्र कुमार ने प्रदीप कुमार के माध्यम से यह राशि स्वीकार की।
रिश्वत के पीछे क्या था मकसद
सीबीआई के अनुसार, यह रिश्वत शिकायतकर्ता को तीन विशेष सुविधाएँ दिलाने के एवज में माँगी गई थी — पहला, उसे मिले टेंडर को रद्द होने से बचाना; दूसरा, उसके बिलों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना; और तीसरा, उसकी फाइल में किसी भी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी या 'रेड फ्लैग' न लगाना। यह प्रकरण सरकारी अस्पतालों की आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की उस व्यापक समस्या की ओर भी इशारा करता है जिसे लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) पहले भी सवाल उठा चुके हैं।
सीबीआई की जाँच का दायरा
फिलहाल दोनों आरोपी हिरासत में हैं और मामले की जाँच जारी है। सीबीआई यह पता लगाने में भी जुटी है कि इस रिश्वतखोरी के नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति या अधिकारी भी शामिल है या नहीं। एजेंसी ने पुष्टि की है कि भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध इस तरह की कार्रवाई उसकी भ्रष्टाचार-रोधी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
सीबीआई की नागरिकों से अपील
सीबीआई ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत माँगे या उन्हें भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने आए, तो वे तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करें। गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकारी और सार्वजनिक दबाव बढ़ रहा है। आगे की जाँच में यह स्पष्ट होगा कि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है या यह एकाकी घटना थी।