शरीर में डेंगू के संकेत पहचानें, अस्पताल जाने की आवश्यकता है!
सारांश
Key Takeaways
- डेंगू
- तेज बुखार के साथ अन्य लक्षणों पर ध्यान दें
- स्वयं दवा लेने से बचें
- जलयोजन बनाए रखें
- समय पर अस्पताल जाएं
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। डेंगू एक ऐसी बीमारी है जो आरंभ में साधारण बुखार के रूप में दिखाई देती है, लेकिन यदि सही समय पर इसका ध्यान नहीं रखा गया, तो यह बहुत गंभीर हो सकती है। यह बीमारी मुख्यतः मच्छरों के काटने से फैलती है।
डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के कुछ दिनों बाद दिखाई देने लगते हैं। सबसे पहले, अचानक तेज बुखार आता है, जो 102-104 डिग्री तक पहुँच सकता है। इसके साथ-साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तीव्र दर्द, थकान और कमजोरी का अनुभव होता है। कुछ व्यक्तियों के शरीर पर लाल चकत्ते या रैश भी हो सकते हैं। कभी-कभी मरीज को भूख नहीं लगती, जी मिचलाने लगता है और उल्टी भी हो सकती है। इन लक्षणों को लोग सामान्य वायरल समझकर अनदेखा कर देते हैं, जो बाद में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है।
डेंगू का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि कभी-कभी बुखार कम होने के बाद मरीज की स्थिति अचानक बिगड़ सकती है। इसी समय, शरीर में आंतरिक समस्याएँ शुरू हो सकती हैं। यदि आपको दिन में तीन या अधिक बार उल्टी हो रही है, पेट में तीव्र दर्द महसूस हो रहा है, अत्यधिक बेचैनी या घबराहट हो रही है, या अचानक सुस्ती और कमजोरी बढ़ गई है, तो ये चेतावनी के संकेत हैं। इसके अलावा, यदि नाक या मसूड़ों से खून आने लगे, उल्टी में खून हो, मल काला दिखे या पेशाब में खून दिखाई दे, तो तत्काल अस्पताल जाना अत्यंत आवश्यक है।
कुछ अन्य गंभीर लक्षणों में हाथ-पैर ठंडे और चिपचिपे हो जाना, त्वचा का पीला या फीका होना, पेशाब की मात्रा में कमी या कई घंटों तक पेशाब न आना, सांस लेने में समस्या होना और अचानक व्यवहार में परिवर्तन शामिल हैं। ये सभी संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुँच रही है। इस स्थिति में देर करना खतरनाक हो सकता है और मरीज को तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
डेंगू के दौरान अक्सर प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स के आंकड़ों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कई बार मरीज की स्थिति प्लेटलेट्स सामान्य होने के बावजूद गंभीर हो सकती है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी, खून का गाढ़ा होना और प्लाज्मा लीक जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए यदि बुखार दो दिन से अधिक समय तक बना रहता है या ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी दिखाई देता है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। स्वयं से दवाइयां लेना या घरेलू उपचार पर निर्भर रहना उचित नहीं है। समय पर इलाज, आराम और शरीर में पानी की उचित मात्रा बनाए रखने से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है।