डायबिटीज में आलू बनाम शकरकंद: कौन सा विकल्प है अधिक सुरक्षित?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में डायबिटीज एक सामान्य समस्या बन चुकी है। यहाँ करोड़ों लोग या तो इस बीमारी से पीड़ित हैं या उनका ब्लड शुगर नियंत्रण में नहीं रहता। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि रोजाना की थाली में क्या खाना सुरक्षित है। विशेषकर आलू और शकरकंद जैसी साधारण सब्जियों को लेकर लोगों में हमेशा संदेह बना रहता है। कुछ लोग आलू को हानिकारक मानते हैं, जबकि कुछ शकरकंद को चमत्कारी मानते हैं। लेकिन सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि डायबिटीज में आहार का मतलब किसी चीज को पूरी तरह से छोड़ना नहीं है।
ब्लड शुगर का स्तर इस पर निर्भर करता है कि भोजन कितनी तेजी से पचकर ग्लूकोज में परिवर्तित होता है और रक्त में प्रवेश करता है। इसे ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहा जाता है। जितना अधिक जीआई, उतनी तेजी से शुगर बढ़ेगी। इसी कारण आलू और शकरकंद की तुलना करना आवश्यक हो जाता है।
आलू को अक्सर डायबिटीज का दुश्मन माना जाता है, लेकिन हर आलू एक जैसा नहीं होता। भारत में आलू की कई किस्में उगाई जाती हैं और हर किस्म का शरीर पर अलग प्रभाव हो सकता है। कुछ किस्मों में ऐसा स्टार्च होता है जो धीरे-धीरे टूटता है, जिससे शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। शोध से पता चलता है कि उचित किस्म और सही तरीके से पकाया गया आलू सीमित मात्रा में हानिकारक नहीं होता। समस्या तब होती है जब आलू को तलकर या अधिक मसाले के साथ खाया जाता है।
उबला आलू भी यदि जरूरत से अधिक खाया जाए तो शुगर बढ़ा सकता है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ऊँचा होता है। हालाँकि, उबालकर ठंडा किया गया आलू बेहतर माना जाता है, क्योंकि उसमें मौजूद स्टार्च का स्तर बदल जाता है।
अब शकरकंद की बात करें, जिसे लोग अक्सर डायबिटीज के लिए सुरक्षित मानते हैं। शकरकंद मीठा होता है, लेकिन इसकी मिठास का शरीर पर प्रभाव अलग होता है। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो शुगर को धीरे-धीरे खून में जाने देता है। यही कारण है कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स आलू की तुलना में कम रहता है। इसके अलावा, शकरकंद में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बना सकते हैं। आयुर्वेद में भी शकरकंद को ऊर्जा देने वाला और पाचन के लिए संतुलित माना गया है, बशर्ते मात्रा सही हो।
वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की प्राथमिकता ब्लड शुगर को नियंत्रित करना है, तो शकरकंद एक बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन यदि इसे अधिक मात्रा में खाया जाए तो यह कार्बोहाइड्रेट्स शुगर बढ़ा सकते हैं। वहीं, आलू को पूरी तरह छोड़ना आवश्यक नहीं है। यदि आलू उबला हुआ हो, तो उसे सब्जियों और दाल के साथ संतुलित मात्रा में खाया जा सकता है।
डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च भी यही मानती है कि संतुलित आहार, सही मात्रा और नियमित दिनचर्या से ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखा जा सकता है।