क्या द्रोणपुष्पी आपके घर में उग सकता है और बीमारियों को दूर रख सकता है?
सारांश
Key Takeaways
- द्रोणपुष्पी एक सुपर हर्ब है जो सेहत के लिए फायदेमंद है।
- इसका उपयोग सर्दी-जुकाम और त्वचा की समस्याओं में किया जा सकता है।
- इसे घर में उगाना बहुत आसान है।
- गर्भवती महिलाएं इसे बिना सलाह के न लें।
- यह मच्छरों को दूर रखने में मदद करता है।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। द्रोणपुष्पी एक छोटा सा पौधा है जो आपके घर की छत या बगीचे में आसानी से उग सकता है। इसका बाहरी रूप भले ही साधारण लगे, लेकिन यह सेहत के लिए एक अद्भुत खजाना है। इसे अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे दुद्धी, गोफन, दूरवा, शिवसहस्त्रपुष्पी या सफेद फूल वाली नेटलवीड।
इसे पहचानना बहुत सरल है। इसकी पत्तियाँ लंबी और हल्की दांतेदार होती हैं, तना पतला लेकिन मजबूत होता है और फूल छोटे सफेद गुच्छों में खिलते हैं। जब आप इसकी पत्तियों को मसलते हैं, तो एक हल्की औषधीय खुशबू आती है।
आयुर्वेद में द्रोणपुष्पी का महत्व अत्यधिक है। इसे वात-कफ के लिए लाभकारी माना गया है। यह पाचन, श्वसन और प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करता है। खासतौर पर सर्दी-जुकाम और खांसी में यह बहुत प्रभावी है। आप इसके पत्तों का काढ़ा बना सकते हैं या पत्तों और फूलों का रस निकालकर शहद के साथ ले सकते हैं। वायरल बुखार, विशेषकर मच्छर जनित बुखार में भी यह राहत प्रदान करता है।
यह पौधा केवल आंतरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि बाहरी चोटों और त्वचा की समस्याओं में भी मदद करता है। घाव और फोड़े-फुंसी पर पत्तों का लेप लगाने से सूजन में कमी आती है और घाव जल्दी भरता है। मच्छर या कीड़े के काटने पर मसलकर लगाने से जलन और खुजली से राहत मिलती है। पेट की गैस या हल्की अपच में सूखी पत्तियों का पाउडर उपयोगी होता है। कान दर्द में भी इसकी पत्तियों का रस डालना एक पारंपरिक उपाय है।
इसे घर में उगाना बहुत आसान है। हल्की मिट्टी और थोड़ी धूप में यह तेजी से बढ़ता है। बीज अपने आप गिरकर नए पौधे उगाते हैं। पानी की आवश्यकता भी कम होती है, सप्ताह में 2-3 बार पानी देना पर्याप्त है। इसका रोज़मर्रा में उपयोग सुरक्षित है, लेकिन गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं इसे बिना वैद्य की सलाह के न लें।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह पौधा प्रभावशाली है। इसमें एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं। यह एलर्जी और सूजन में राहत देता है और प्राकृतिक रूप से मच्छरों को दूर रखता है। इसलिए इसे आयुर्वेद में एक सुपर हर्ब के रूप में जाना जाता है।