क्या आप रोगमुक्त होने के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन कर रहे हैं?
सारांश
Key Takeaways
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और ताजे पानी का सेवन करें।
- अभ्यंग से रक्त संचार में सुधार होता है।
- आहार को सही समय पर लें।
- गहरी नींद के लिए बाईं करवट में सोएं।
- हल्का व्यायाम करें।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मानव शरीर एक जटिल मशीन की तरह कार्य करता है, जिसे सही गुणवत्ता के ईंधन की आवश्कता होती है ताकि यह सुचारू रूप से चल सके।
शरीर एक लय में चलता है; यदि यह लय सही है, तो बीमारियों का प्रवेश कठिन होता है और बुढ़ापा भी जल्दी नहीं आता। वैज्ञानिक शब्दों में इसे 'सर्कैडियन रिदम' कहा जाता है, जबकि आयुर्वेद में इसे आयुर्वेदिक दिनचर्या कहा जाता है, जो शरीर को मजबूत और रोगमुक्त बनाए रखने में सहायक है। आज हम आपको इस आयुर्वेदिक दिनचर्या के बारे में जानकारी देंगे।
सर्वप्रथम, ब्रह्म मुहूर्त में जागें और विषाक्त पदार्थों को निकालने के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी पिएं। बालों और त्वचा के निखार के लिए कुछ तेल की बूंदें नाभि में डालें और आँखों पर अंजन करें। दिन की शुरुआत हल्के व्यायाम और सैर से करें और फिर अभ्यंग करना न भूलें। यह रक्त संचार को बेहतर बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों की थकान को भी कम करता है।
अब बात करते हैं आहार की। आयुर्वेद में आहार का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि यह केवल पेट भरने का कार्य नहीं करता, बल्कि ऊर्जा प्रदान करता है। दोपहर का भोजन 12 से 1 बजे के बीच करें, क्योंकि इस समय जठराग्नि सबसे प्रबल होती है और खाना आसानी से पचता है। रात का भोजन हमेशा हल्का रखें और सूर्यास्त के बाद खाना खाने से बचें। खाना खाने के बाद सीधे बिस्तर पर लेटना न करें, बल्कि कुछ कदम चलें या वज्रासन में बैठें, जिससे खाना पचाने में मदद मिलेगी।
सोने का समय भी बहुत महत्वपूर्ण है। गहरी नींद पूरे शरीर के लिए आवश्यक है क्योंकि यह मरम्मत का कार्य करती है। रात में दूध के साथ त्रिफला या हल्दी लेना नींद लाने में मदद करता है और तनाव को भी कम करता है। कोशिश करें कि सोते समय बाईं करवट में रहें। इससे रक्त संचार सही रहता है और नींद अच्छी आती है।