मध्य आयु में छोटी-छोटी बातें भूलना गंभीर संकेत, अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं
सारांश
Key Takeaways
- अल्जाइमर के शुरुआती लक्षणों को पहचानें।
- सही आहार अपनाएं।
- नियमित व्यायाम करें।
- सामाजिक संपर्क बनाए रखें।
- पर्याप्त नींद लें।
नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान की तेज़-तर्रार ज़िंदगी में भूलना एक सामान्य स्थिति बन गई है, लेकिन जब ये छोटी-छोटी बातें आपके दैनिक कार्यों में बाधा डालने लगे या आप अपने प्रियजनों के चेहरे और घर का रास्ता भूलने लगें, तो इसे हल्के में लेना उचित नहीं है। अल्जाइमर केवल उम्र बढ़ने का परिणाम नहीं है; यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
अक्सर लोग इसे सामान्य समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके प्रारंभिक संकेत वर्षों पहले ही प्रकट होने लगते हैं। यदि इसे समय पर पहचाना जाए और जीवनशैली में बदलाव किया जाए, तो इस बीमारी की प्रगति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
अल्जाइमर का सीधा संबंध मस्तिष्क से है, जो हमारे शरीर के सभी अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करता है। आजकल कम उम्र के लोग भी भूलने की समस्या का सामना कर रहे हैं। इस बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, तनाव, अस्वस्थ आहार और नींद की कमी। हाल में वाशिंगटन विश्वविद्यालय द्वारा की गई एक रिसर्च में यह सामने आया है कि एक साधारण रक्त परीक्षण के माध्यम से अल्जाइमर के प्रारंभिक लक्षण तीन से चार साल पहले ही पहचाने जा सकते हैं। इसे उचित आहार, व्यायाम और जीवनशैली अपनाकर रोका जा सकता है।
अल्जाइमर के शुरुआती चेतावनी संकेतों में दैनिक कार्यों को भूल जाना, जान-पहचान वाले लोगों के नाम याद न रहना, अचानक किसी कार्य को याद न आना, और दिनचर्या में उलझन होना शामिल हैं। उम्र बढ़ने पर हल्की भूलने की समस्या सामान्य होती है, लेकिन यदि यह मिडिल एज में शुरू होती है, तो यह धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है। प्रारंभिक पहचान से सावधानी बरतना आवश्यक है। नियमित रक्त परीक्षण और चेकअप इसे समय पर रोकने में सहायक हो सकते हैं।
इस बीमारी में डाइट का विशेष महत्व है। हरी सब्जियां, बेरी, सूखे मेवे, अनाज और जैतून का तेल अपनी डाइट में शामिल करें। नियमित व्यायाम करें, जैसे वॉकिंग या एरोबिक गतिविधियां, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं और न्यूरॉन्स को मजबूत करते हैं।
मस्तिष्क को सक्रिय रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पहेलियाँ, पढ़ाई, नई चीजें सीखना और संगीत सुनना मस्तिष्क के कनेक्शन को मजबूत करते हैं। संगीत सुनने से डिमेंशिया का खतरा 39 प्रतिशत तक कम हो सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करना और सामाजिक संपर्क बनाए रखना भी आवश्यक है, क्योंकि अकेलापन इस बीमारी को बढ़ावा दे सकता है।
इसके अतिरिक्त, दिल की सेहत और मस्तिष्क का गहरा संबंध है। रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को नियंत्रित करके अल्जाइमर का खतरा कम किया जा सकता है। पर्याप्त नींद भी आवश्यक है।