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हाथ-पैर का ठंडा रहना: रेनॉड्स रोग, खराब रक्त संचार और पोषण की कमी के हो सकते हैं संकेत

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हाथ-पैर का ठंडा रहना: रेनॉड्स रोग, खराब रक्त संचार और पोषण की कमी के हो सकते हैं संकेत

सारांश

गर्मियों में भी हाथ-पैर ठंडे रहें तो यह सिर्फ मौसम का असर नहीं — यह रक्त संचार की गड़बड़ी, रेनॉड्स रोग या पोषण की कमी का संकेत हो सकता है। इस लक्षण को नज़रअंदाज़ करना नसों की गंभीर बीमारी को दावत दे सकता है।

मुख्य बातें

हाथ-पैर का ठंडा रहना शरीर में रक्त संचार की कमज़ोरी का प्रमुख संकेत हो सकता है।
खराब पाचन और तनाव भी नसों में रक्त प्रवाह को बाधित कर हाथ-पैर ठंडे कर सकते हैं।
लंबे समय तक यह लक्षण बना रहे तो रेनॉड्स रोग और वैरिकोज़ नसों का खतरा हो सकता है।
आयरन और विटामिन की कमी भी इस समस्या की एक प्रमुख वजह मानी जाती है।
नियमित सैर , तेल मालिश और पौष्टिक आहार से रक्त संचार बेहतर किया जा सकता है।
लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य है।

हाथ-पैर का लगातार ठंडा या सुन्न रहना शरीर में रक्त संचार की कमज़ोरी, खराब पाचन या पोषण की कमी का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह लक्षण गर्मियों में विशेष रूप से चिंताजनक होता है — जब बाहर का तापमान ऊँचा हो, फिर भी हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे बने रहें। इस स्थिति को नज़रअंदाज़ करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

रक्त संचार और शरीर का तापमान

जब शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से नहीं हो पाता, तो हाथ और पैर तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुँच पाता। रक्त संचार ही शरीर में गर्मी उत्पन्न करता है और तापमान को संतुलित बनाए रखता है। इस प्रवाह में बाधा आने पर हाथ-पैर ठंडे और सुन्न महसूस होने लगते हैं।

खराब पाचन भी इसकी एक प्रमुख वजह मानी जाती है। जब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर को पूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिसका सीधा प्रभाव हाथ और पैरों पर देखा जा सकता है। इसके अलावा, तनाव और शारीरिक कमज़ोरी भी पाचन और शरीर के समग्र संतुलन को बिगाड़ देते हैं, जिससे नसों में रक्त का प्रवाह बाधित होता है।

रेनॉड्स रोग: एक गंभीर संभावना

यदि हाथ-पैर लंबे समय तक ठंडे बने रहें, तो यह रेनॉड्स रोग (Raynaud's Disease) का संकेत हो सकता है। इस बीमारी में रक्त संचार में सहायक नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह गंभीर रूप से बाधित होता है। इसके परिणामस्वरूप हाथ-पैरों में दर्द और वैरिकोज़ नसों की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

गौरतलब है कि रेनॉड्स रोग में नसें विशेष रूप से ठंड या तनाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे उँगलियाँ और पंजे नीले या सफेद पड़ सकते हैं। यह स्थिति किसी अन्य गंभीर बीमारी का सहवर्ती लक्षण भी हो सकती है।

पोषण की कमी का योगदान

शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी हाथ-पैर ठंडे रहने की एक प्रमुख वजह हो सकती है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसमें रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता कम हो जाती है और शरीर के अंत्यंत हिस्सों — जैसे हाथ-पैर — तक गर्माहट नहीं पहुँच पाती। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पौष्टिक आहार, हरी सब्ज़ियाँ, दालें और आयरन-विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन इस समस्या को कम कर सकता है।

बचाव और सावधानियाँ

इस समस्या से राहत पाने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं। नियमित सैर करने से पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है और गर्माहट बनी रहती है। यदि हाथ-पैर ठंडे महसूस हों, तो तेल से मालिश करें और सूती कपड़े में पैरों को लपेटकर गर्म करने का प्रयास करें — इससे रक्त प्रवाह में सुधार आता है।

इसके अतिरिक्त, तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद और संतुलित जीवनशैली भी इस समस्या को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह लक्षण कई बार गंभीर आंतरिक बीमारियों का शुरुआती संकेत होता है। रेनॉड्स रोग जैसी स्थितियाँ भारत में अक्सर देर से पहचानी जाती हैं, क्योंकि स्वास्थ्य जागरूकता का अभाव है और लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब दर्द असहनीय हो जाए। पोषण की कमी — विशेषकर आयरन और विटामिन — एक ऐसी समस्या है जो भारत की बड़ी आबादी को प्रभावित करती है, फिर भी इसे रोज़मर्रा की थकान का हिस्सा मान लिया जाता है। ज़रूरत है कि इन लक्षणों को गंभीरता से लिया जाए और समय पर चिकित्सीय परामर्श लिया जाए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाथ-पैर ठंडे रहने के मुख्य कारण क्या हैं?
हाथ-पैर ठंडे रहने के पीछे खराब रक्त संचार, पाचन की कमज़ोरी, तनाव और आयरन-विटामिन की कमी प्रमुख कारण हो सकते हैं। जब रक्त हाथ-पैर तक ठीक से नहीं पहुँचता, तो वे ठंडे और सुन्न महसूस होते हैं।
रेनॉड्स रोग क्या होता है और यह कैसे पहचानें?
रेनॉड्स रोग एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त संचार में सहायक नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे हाथ-पैरों में दर्द और ठंडापन बना रहता है। इसमें उँगलियाँ और पंजे नीले या सफेद पड़ सकते हैं, विशेषकर ठंड या तनाव के दौरान।
क्या गर्मियों में भी हाथ-पैर ठंडे रह सकते हैं?
हाँ, गर्मियों में भी हाथ-पैर ठंडे रह सकते हैं और यह अधिक चिंताजनक स्थिति मानी जाती है। जब बाहर का तापमान ऊँचा हो फिर भी हाथ-पैर ठंडे रहें, तो यह रक्त संचार या पोषण की गंभीर कमी का संकेत हो सकता है।
हाथ-पैर ठंडे रहने पर क्या उपाय करें?
नियमित सैर करें, तेल से मालिश करें और सूती कपड़े में पैरों को लपेटकर गर्म करने की कोशिश करें। आयरन और विटामिन से भरपूर पौष्टिक आहार लें और तनाव को नियंत्रित रखें।
कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है?
यदि हाथ-पैर लंबे समय तक ठंडे, सुन्न या दर्दनाक बने रहें और घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। यह रेनॉड्स रोग, एनीमिया या अन्य गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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