14 अक्टूबर 2026
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हिमंत बिस्वा सरमा ने नवरात्रि में मां कूष्मांडा पूजा को असम के एनीमिया-कुपोषण अभियान से जोड़ा

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हिमंत बिस्वा सरमा ने नवरात्रि में मां कूष्मांडा पूजा को असम के एनीमिया-कुपोषण अभियान से जोड़ा

सारांश

नवरात्रि के चौथे दिन असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मां कूष्मांडा की पूजा को एनीमिया और कुपोषण उन्मूलन के अभियान से जोड़ा। धर्म और स्वास्थ्य नीति को एक साथ रखते हुए उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 14 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा पूजा को एनीमिया व कुपोषण उन्मूलन अभियान से जोड़ा।
केंद्र सरकार के पोषण अभियान के तहत राज्य के आंगनवाड़ी केंद्र गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सेवाएँ दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने 'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी' संदेश को रेखांकित कर सामूहिक सहभागिता का आग्रह किया।
सरमा ने कहा कि सही पोषण की शुरुआत गर्भावस्था से होनी चाहिए और स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चों का आधार है।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के योगदान की सराहना की और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि कोई भी लाभार्थी योजना से वंचित न रहे।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की उपासना को राज्य में महिलाओं और बच्चों के बीच एनीमिया तथा कुपोषण उन्मूलन के सरकारी प्रयासों से जोड़ा। उन्होंने केंद्र सरकार के पोषण अभियान के अंतर्गत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका को रेखांकित करते हुए इसे एक साझा सामाजिक दायित्व बताया।

धार्मिक प्रतीक से स्वास्थ्य संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा संदेश में कहा कि नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाने वाली मां कूष्मांडा जीवन, स्वास्थ्य, पोषण और ऊर्जा की प्रतीक हैं। उन्होंने इस धार्मिक महत्व को मातृ एवं बाल स्वास्थ्य से जोड़ते हुए जोर दिया कि सही पोषण की नींव गर्भावस्था के दौरान ही रखी जानी चाहिए और शिशु के प्रारंभिक वर्षों में इसकी निरंतर निगरानी की जाए।

आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका

सरमा ने बताया कि पोषण अभियान के तहत असम भर के आंगनवाड़ी केंद्र गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को पूरक पोषण, गर्म भोजन, स्वास्थ्य जाँच एवं परामर्श सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ये कर्मी लाभार्थियों पर निरंतर नज़र रखते हैं ताकि कोई भी पात्र परिवार इस कल्याण योजना से वंचित न रहे।

सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान

इस वर्ष के पोषण माह अभियान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने 'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी' के संदेश को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेहतर पोषण को केवल एक सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के परिवारों और समुदायों की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

मातृ स्वास्थ्य और भावी पीढ़ी का संबंध

सरमा ने कहा कि स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चों का पालन-पोषण करती है और सुपोषित बच्चे एक मजबूत असम की नींव हैं। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब राज्य में एनीमिया और कुपोषण अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में।

नवरात्रि पर संकल्प की अपील

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से नवरात्रि के इस पावन अवसर पर महिलाओं और बच्चों में एनीमिया तथा कुपोषण को जड़ से समाप्त करने के संकल्प को और दृढ़ करने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश का समापन मां कूष्मांडा का आशीर्वाद माँगते हुए यह आशा व्यक्त करते हुए किया कि असम के प्रत्येक परिवार को सुस्वास्थ्य प्राप्त हो। गौरतलब है कि धार्मिक आयोजनों को जन स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने की यह शैली मुख्यमंत्री सरमा की संचार रणनीति का एक उल्लेखनीय पहलू बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पोषण अभियान के ज़मीनी नतीजे क्या हैं। असम में एनीमिया और कुपोषण की दर राष्ट्रीय औसत से अभी भी ऊँची है — एक एक्स पोस्ट और नवरात्रि की प्रतीकात्मकता से जागरूकता तो बढ़ती है, पर आंगनवाड़ी केंद्रों में स्टाफिंग की कमी, पोषण सामग्री की नियमित आपूर्ति और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच जैसी संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी रहती हैं। मुख्यमंत्री का 'सामूहिक जिम्मेदारी' का आह्वान सकारात्मक है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही का ठोस ढाँचा और सार्वजनिक डेटा भी होना चाहिए।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री सरमा ने नवरात्रि को एनीमिया अभियान से क्यों जोड़ा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मां कूष्मांडा को जीवन, स्वास्थ्य और पोषण का प्रतीक बताते हुए नवरात्रि के चौथे दिन को महिलाओं और बच्चों में एनीमिया व कुपोषण उन्मूलन के संकल्प के लिए उपयुक्त अवसर माना। यह धार्मिक प्रतीकवाद को जन-स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने की उनकी संचार शैली का हिस्सा है।
असम में पोषण अभियान के तहत आंगनवाड़ी केंद्र क्या सेवाएँ देते हैं?
केंद्र सरकार के पोषण अभियान के तहत असम के आंगनवाड़ी केंद्र गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पूरक पोषण, गर्म भोजन, स्वास्थ्य जाँच और परामर्श सेवाएँ प्रदान करते हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थियों की निरंतर निगरानी करती हैं ताकि कोई भी इन सेवाओं से वंचित न रहे।
'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी' अभियान क्या है?
यह इस वर्ष के पोषण माह के दौरान जारी किया गया संदेश है जो नागरिकों, परिवारों और समुदायों को आंगनवाड़ी केंद्रों की बेहतरी और बच्चों-महिलाओं के पोषण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री सरमा ने इसे केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व बताया।
सरमा ने मातृ स्वास्थ्य पर क्या संदेश दिया?
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चों का पालन-पोषण करती है और सही पोषण की शुरुआत गर्भावस्था के दौरान से ही होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सुपोषित बच्चे एक मजबूत असम के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं।
यह संदेश मुख्यमंत्री ने कहाँ साझा किया?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह संदेश 14 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, जिसमें नवरात्रि के धार्मिक महत्व को जन स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ा गया।
राष्ट्र प्रेस
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