क्या काला चना है संतुलित आहार और मांसपेशियों के लिए संजीवनी?
सारांश
Key Takeaways
- काला चना प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है।
- यह शरीर में स्टेमिना और ताकत बढ़ाता है।
- यह लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है।
- आयरन और मैंगनीज से भरपूर।
- आयुर्वेद में इसे अग्नि-स्थिर माना गया है।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कई बार भोजन करने के पश्चात भी शरीर में कमजोरी का अनुभव होता है, थकान जल्दी होती है और शरीर में दर्द भी महसूस होता है। ये संकेत हैं कि शरीर अंदर से मजबूत नहीं है और हार्मोन असंतुलित हो गए हैं।
भारतीय थाली में मौजूद भोजन में फाइबर तो होता है, लेकिन प्रोटीन की कमी होती है। शरीर को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन की अत्यंत आवश्यकता होती है। ऐसे में, दालों के साथ-साथ रसोई में मिलने वाले काले चने में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है। इसका नियमित सेवन शरीर को कई लाभ पहुँचाता है।
काला चना तात्कालिक ऊर्जा नहीं देता, बल्कि स्थायी शक्ति प्रदान करता है। कमजोरी, जल्दी थकान, कसरत के बाद रिकवरी की कमी और पाचन संबंधी समस्याएं अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं। ये सभी धातु-निर्माण और अग्नि की कमजोरी के संकेत हैं। यदि काले चने का सेवन सही मात्रा और सही तरीके से किया जाए, तो अनेक समस्याओं से राहत मिल सकती है। इसे पचाना भी आसान होता है और इसका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर नहीं बढ़ता है। इसे मधुमेह के रोगी भी आसानी से खा सकते हैं।
काले चने में आयरन, प्रोटीन और मैंगनीज होते हैं जो मांसपेशियों को मजबूती देते हैं और स्टेमिना बढ़ाते हैं। आयरन, प्रोटीन और मैंगनीज रक्त में शुद्धता और मात्रा बढ़ाने में सहायक होते हैं। कुल मिलाकर, एनीमिया से पीड़ित लोग भी काले चने का सेवन कर सकते हैं।
आयुर्वेद में काला चना मांसधातु वर्धक, बल्य और अग्नि-स्थिर माना गया है। यह शरीर में केवल वजन नहीं, बल्कि घनत्व, ताकत और सहनशक्ति भी बढ़ाता है। काले चने को लेकर लोगों में धारणा है कि चना पाचन में भारी होता है, लेकिन यह केवल अधूरी और गलत जानकारी है। काले चने का सेवन यदि सही तरीके से किया जाए, तो यह अग्नि को तेज करने, आंतों को मजबूत करने और गट हेल्थ को सुधारने में मदद करता है। यह भारी नहीं, बल्कि संतुलित आहार है।
अब यह भी जान लीजिए कि काले चने का सेवन कैसे किया जा सकता है। इसके लिए १ कटोरी काले चने को रात के समय पानी में भिगो दें और सुबह चनों को उबाल लें और हल्के तेल में हींग और जीरे के साथ तड़का लगा दें। चने को कच्चा खाने से बचें क्योंकि इससे पेट संबंधी परेशानियाँ जैसे गैस और कब्ज हो सकती हैं।