खैबर पख्तूनख्वा में कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज पर फंड की कमी का असर

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खैबर पख्तूनख्वा में कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज पर फंड की कमी का असर

सारांश

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज पर फंड की कमी गंभीर संकट उत्पन्न कर रही है। कई मरीज दवाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे उनकी जान पर खतरा मंडरा रहा है।

Key Takeaways

  • फंड की कमी कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज को प्रभावित कर रही है।
  • अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक समाप्त होने के कगार पर है।
  • आर्थिक अस्थिरता से दवाओं की कीमतें 50%25 से 500%25 तक बढ़ गई हैं।
  • सरकार को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
  • कई मरीज जीवन के संकट में हैं।

इस्लामाबाद, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के तीन प्रमुख चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में कैंसर के मरीजों के मुफ्त इलाज पर फंड की कमी के कारण नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी।

पाकिस्तान के स्वास्थ्य सचिव शाहिदुल्लाह खान ने बताया कि वे कैंसर के मरीजों का इलाज पुनः प्रारंभ करने के लिए योजना एवं विकास विभाग के साथ समन्वय कर रहे हैं, ताकि फंड का पुनः आवंटन किया जा सके। ‘डॉन’ अखबार के अनुसार, हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स (एचएमसी) और खैबर टीचिंग हॉस्पिटल (केटीएच), पेशावर तथा अयूब टीचिंग हॉस्पिटल (एटीएच), एबटाबाद में पंजीकृत 1,000 से अधिक गरीब मरीज दवाओं के इंतजार में हैं।

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए इस मुफ्त उपचार कार्यक्रम हेतु 1,500 मिलियन पाकिस्तानी रुपये की आवश्यकता थी, लेकिन अब तक केवल 820 मिलियन रुपये ही जारी किए गए हैं, जबकि शेष 680 मिलियन रुपये जारी होना बाकी है।

अब तक अगस्त 2025 से एटीएच में 347 मरीजों को मुफ्त दवाएं दी गई हैं। अस्पताल को आखिरी बार दिसंबर 2025 में दवाएं मिली थीं और अब स्टॉक समाप्त होने की कगार पर है। इसी तरह, केटीएच में दवाओं का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है और वहां 623 पंजीकृत मरीज दवाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मुफ्त दवा योजना से जुड़े ऑन्कोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इस कार्यक्रम से अब तक 10,000 से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना सभी मरीजों के लिए शुरू की गई थी और अस्पताल अंतिम चरण के कैंसर मरीजों को इलाज से मना नहीं कर सकते। डॉक्टरों के अनुसार, मुफ्त दवा बंद होने से कई मरीजों की मौत हो सकती है, क्योंकि कैंसर की दवाएं अत्यधिक महंगी होती हैं।

इस बीच, पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित बोहोर बाजार समेत खुले बाजार में दवाओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, दवाओं के दाम 50 प्रतिशत से लेकर 500 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की दवाओं, एंटीबायोटिक्स, पेट से जुड़ी बीमारियों और खांसी की दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत 2,200 रुपये से बढ़कर 4,720 रुपये हो गई है।

विटामिन-बी सप्लीमेंट की कीमत 500 रुपये से बढ़कर 600 रुपये हो गई है। अपच और एसिडिटी की दवा का पैकेट 530 रुपये से बढ़कर 620 रुपये का हो गया है। न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट और विटामिन टैबलेट्स के पैक की कीमत 480 रुपये से बढ़कर 510 रुपये हो गई है।

थायरॉयड की दवा की कीमत 85 रुपये से बढ़कर 290 रुपये हो गई है, जबकि टाइफाइड के सामान्य इलाज की दवा 805 रुपये से बढ़कर 930 रुपये हो गई है। कई अन्य जीवनरक्षक दवाओं के दाम भी बढ़े हैं।

आलोचकों ने इस बढ़ोतरी को “असहनीय” बताया है और कहा है कि 2,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच चुकी इंसुलिन डिवाइस जैसी आवश्यक चीजें गरीब मरीजों की पहुंच से बाहर हो रही हैं। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

Point of View

बल्कि मरीजों के जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज में फंड की कमी का क्या कारण है?
इसकी मुख्य वजह आवश्यक फंड का अपर्याप्त आवंटन है, जिससे अस्पतालों को दवाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है।
इस समस्या का समाधान क्या है?
समस्या का समाधान योजना एवं विकास विभाग के साथ समन्वय कर फंड का पुनः आवंटन करना है।
क्या फंड की कमी से मरीजों की जान को खतरा है?
हां, मुफ्त दवा बंद होने से कई मरीजों की जान को खतरा हो सकता है, क्योंकि कैंसर की दवाएं बहुत महंगी होती हैं।
दवाओं की कीमतों में वृद्धि का क्या कारण है?
दवाओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का कारण बाजार में कमी और आर्थिक स्थिति की अस्थिरता है।
क्या सरकार इस समस्या को हल करने के लिए कुछ कर रही है?
सरकार को इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
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