क्या बिस्तर पर लेटने के बाद भी नींद नहीं आती? जानें स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया के कारण
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आजकल रात में अच्छी नींद लेना कई लोगों के लिए एक चुनौती बन चुका है। बिस्तर पर लेटने के बावजूद नींद न आना एक आम समस्या बन गई है। इसे चिकित्सा की भाषा में स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया कहा जाता है। यह न केवल एक सामान्य समस्या है, बल्कि यह आपके दिन की ऊर्जा, मूड और स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालती है।
नींद की कमी मस्तिष्क और शरीर दोनों को थका देती है, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। सोने से पहले इन उपकरणों का उपयोग नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को बाधित करता है। आयुर्वेद में इसे मानसिक अशांति और प्रकाश से उत्पन्न विकार कहा जाता है। जब स्क्रीन की नीली रोशनी आंखों में पड़ती है, तो मस्तिष्क सोचने लगता है कि दिन खत्म नहीं हुआ है। इस कारण, शरीर बिस्तर पर होने के बावजूद विश्राम नहीं कर पाता और नींद नहीं आती।
इसके अलावा, बिस्तर पर जाने पर कई लोग दिनभर की घटनाओं या भविष्य की चिंताओं में डूब जाते हैं। आयुर्वेद इसे चित्त विकार कहते हैं। जब मस्तिष्क लगातार सक्रिय रहता है, तो नींद की आवश्यकता होने के बावजूद भी आराम नहीं मिल पाता। यह सोचने की आदत कई बार अनजाने में बन जाती है, जिससे नींद न आने की समस्या होती है।
एक और बड़ा कारण कैफीन का सेवन है, खासकर दोपहर के बाद चाय या कॉफी पीना। विज्ञान के अनुसार, कैफीन का प्रभाव शरीर में 6 से 8 घंटे तक रहता है। इसका मतलब यह है कि शाम को चाय पीने पर रात को बिस्तर पर जाने पर मस्तिष्क सक्रिय रहता है और नींद नहीं आती। आयुर्वेद में इसे पित्त और वात के असंतुलन से जोड़ा जाता है, जिससे शरीर गर्म और उत्तेजित रहता है।
स्लीप ऑनसेट इंसोमनिया का एक अन्य कारण अनियमित सोने और जागने का समय है। जब रोज अलग-अलग समय पर सोते और जागते हैं, तो हमारा शरीर यह संकेत नहीं देता कि कब सोना है और कब जागना है। आयुर्वेद में इसे शरीर की प्राकृतिक लय के विघटन के रूप में देखा जाता है। इस वजह से नींद आने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता भी कम हो जाती है।
नींद की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ सरल उपाय हैं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का उपयोग कम करें और कमरे को अंधेरा रखें। हल्का संगीत सुनना, गहरी सांस लेना या आयुर्वेदिक हर्ब्स जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी का सेवन मानसिक शांति में मदद कर सकता है। दोपहर के बाद कैफीन से बचें और रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। आयुर्वेद के अनुसार, यह वात और पित्त को संतुलित करके नींद को प्राकृतिक रूप से सुधारता है।