दांतों के इनेमल को नुकसान पहुँचा रही हैं ये सामान्य आदतें, जानें बचाव के उपाय
सारांश
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मुंबई, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली में हम अक्सर ऐसी चीजें खाते हैं जिनमें अम्लीय तत्व यानी एसिड की मात्रा अधिक होती है। विज्ञान के अनुसार, उच्च अम्लीय चीजों का प्रभाव सबसे पहले दांतों पर दिखाई देता है। दांतों की बाहरी परत जिसे इनेमल कहा जाता है, यही दांतों को मजबूती और सुरक्षा प्रदान करती है। जब यह परत धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, तो दर्द, सेंसिटिविटी और संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है।
दांतों का इनेमल शरीर की सबसे मजबूत परतों में से एक है, लेकिन लगातार अम्लीय प्रभाव के कारण यह टूटने लगता है। ज़्यादा एसिडिक चीजें इनेमल को नुकसान पहुँचाने लगती हैं। शुरू में इसका अहसास नहीं होता, लेकिन समय के साथ दांतों की सतह खुरदुरी हो जाती है। फिर हल्का ठंडा-गर्म या मीठा खाने पर झनझनाहट शुरू हो जाती है। इस बदलाव से बैक्टीरिया को जमा होने का मौका मिलता है, जो कैविटी और मसूड़ों की समस्याओं को बढ़ा सकता है।
फल और सब्जियाँ सेहत के लिए बेहद आवश्यक होती हैं, विशेषकर विटामिन-सी से भरपूर फल, जो इम्युनिटी को मज़बूत बनाते हैं और रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। संतरा, अंगूर, अनार और स्ट्रॉबेरी जैसे फल शरीर के लिए लाभकारी होते हैं, लेकिन विज्ञान कहता है कि इनमें से कुछ फलों में एसिड की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इनका सेवन उचित मात्रा में करना महत्वपूर्ण है।
किसी खाद्य पदार्थ की अम्लीयता को उसके पीएच मान से मापा जाता है। वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, जिन वस्तुओं का पीएच 7 से कम होता है, उन्हें अम्लीय माना जाता है।
केवल फल ही नहीं, बल्कि सोडा, कोल्ड ड्रिंक, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक भी दांतों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इनमें मौजूद एसिड और चीनी मिलकर इनेमल को कमजोर बनाते हैं। धीरे-धीरे दांतों में दर्द की शिकायत बढ़ने लगती है।
ऐसे में कुछ सरल आदतें अपनाकर दांतों को सुरक्षित रखा जा सकता है। खट्टे फल या नींबू को सीधे खाने से बचें, क्योंकि इससे एसिड सीधे इनेमल पर हमला करता है। खट्टा खाने के बाद पानी से कुल्ला करना भी सहायक होता है, क्योंकि इससे मुँह का एसिड संतुलित हो जाता है। फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का नियमित उपयोग दांतों की ऊपरी परत को मज़बूत बनाए रखता है।