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क्या बदलते मौसम में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए सूर्यभेदन प्राणायाम वरदान है?

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क्या बदलते मौसम में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए सूर्यभेदन प्राणायाम वरदान है?

सारांश

क्या बदलते मौसम में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए सूर्यभेदन प्राणायाम एक अद्भुत उपाय है? यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है, बल्कि आंतरिक ऊर्जा और गर्मी को भी बढ़ावा देता है। जानिए इसके लाभ और सही तरीके।

मुख्य बातें

सूर्यभेदन प्राणायाम से इम्युनिटी मजबूत होती है।
यह सर्दियों में विशेष रूप से फायदेमंद है।
उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को सावधानी बरतनी चाहिए।
प्राणायाम करने का सही तरीका जानना आवश्यक है।
यह मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। योगविज्ञान में प्राणायाम को जीवन ऊर्जा के प्रबंधन और विस्तार का एक महत्वपूर्ण साधन माना गया है। यह न केवल श्वास को नियंत्रित करता है, बल्कि नाड़ी तंत्र को संतुलित करने में भी सहायक होता है। इस संदर्भ में सूर्यभेदन प्राणायाम महत्वपूर्ण है, जो शरीर के आंतरिक ताप को तेज़ी से बढ़ाने में सहायता करता है।

'सूर्य' का अर्थ है सूर्य (गर्मी और ऊर्जा का प्रतीक) और 'भेदन' का मतलब है भेदना या जागृत करना। यह प्राणायाम दाहिनी नासिका (पिंगला नाड़ी या सूर्य नाड़ी) के माध्यम से श्वास लेकर शरीर में सूर्य तत्व की तरह गर्मी, ऊर्जा और जीवन शक्ति को बढ़ाता है। इसे हठयोग प्रदीपिका और अन्य प्राचीन ग्रंथों में आठ प्रमुख कुम्भकों में से एक माना गया है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर को गर्म रखने, प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) को मजबूत करने और ठंड से उत्पन्न जकड़न को दूर करने में मददगार है। इसमें दाहिनी नासिका से सांस लेकर बाईं नासिका से छोड़ी जाती है। खासकर सर्दियों में इसे करने की सलाह दी जाती है, लेकिन उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के रोगियों को इससे बचना चाहिए।

इस प्राणायाम को साधारण तरीके से किया जा सकता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन, पद्मासन, या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठें। अब बाईं नासिका को अंगूठे से बंद करते हुए दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। सांस भरने के बाद दोनों नासिकाएं बंद कर कुछ सेकंड तक रोके रखें। फिर बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह एक चक्र है। रोजाना 10-15 चक्र सुबह के समय खाली पेट करना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने से सर्दी-जुकाम, नाक बंद जैसी शारीरिक समस्याओं से काफी राहत मिलती है।

आयुर्वेद के अनुसार, यह आसन शरीर में सूर्य नाड़ी (पिंगला नाड़ी) को सक्रिय करता है, आंतरिक ऊष्मा (अग्नि) उत्पन्न करता है। साथ ही, यह पाचन में सुधार, प्रतिरक्षा को बढ़ाने और मानसिक एकाग्रता व जीवन शक्ति (प्राण) को जागृत करता है, विशेष रूप से कफ दोष (सर्दी-खांसी) में लाभकारी है। यह प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है और शरीर को ऊर्जावान एवं चुस्त बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर करता है, बल्कि मानसिक संतुलन को भी बनाए रखता है। यह प्राणायाम सर्दियों में विशेष रूप से प्रभावी साबित होता है। समाज में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच, यह प्राचीन विधि एक सरल और प्रभावी समाधान के रूप में उभर कर सामने आ रही है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्यभेदन प्राणायाम कैसे किया जाता है?
सूर्यभेदन प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आरामदायक मुद्रा में बैठें, बाईं नासिका को बंद कर दाहिनी नासिका से गहरी सांस लें, फिर दोनों नासिकाएं बंद करें और अंत में बाईं नासिका से सांस छोड़ें।
क्या सूर्यभेदन प्राणायाम करने से कोई नुकसान हो सकता है?
उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों को इस प्राणायाम से बचना चाहिए।
क्या यह प्राणायाम सर्दी से राहत देता है?
जी हां, यह प्राणायाम सर्दी-जुकाम और नाक बंद होने जैसी समस्याओं में राहत प्रदान करता है।
कितनी बार सूर्यभेदन प्राणायाम करना चाहिए?
इस प्राणायाम के 10-15 चक्र रोजाना सुबह खाली पेट करना चाहिए।
क्या यह प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है?
हाँ, यह मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक होता है।
राष्ट्र प्रेस
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