क्या थायराइड से बचने के लिए केवल आयोडीन आवश्यक है? सेलेनियम और जिंक की भूमिका जानें
सारांश
Key Takeaways
- थायराइड के लिए आयोडीन आवश्यक है, लेकिन सेलेनियम और जिंक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
- आयुर्वेद में थायराइड के लिए कई घरेलू उपाय सुझाए गए हैं।
- थायराइड ग्रंथि का सही कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी तीन तत्वों का संतुलन जरूरी है।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की युवा पीढ़ी में थायराइड और शुगर जैसी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चों से लेकर युवाओं तक में इन बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं। आज हम थायराइड से संबंधित कुछ मिथकों को उजागर करेंगे।
हमेशा से यह सिखाया गया है कि थायराइड से बचने का एकमात्र तरीका 'आयोडीन युक्त नमक' है, लेकिन यह केवल आधा सच है। आधुनिक चिकित्सा और प्राचीन आयुर्वेद ने आयोडीन के महत्व को स्वीकार किया है, लेकिन यह भी समझा गया है कि केवल आयोडीन पर्याप्त नहीं है।
चिकित्सा और आयुर्वेद के अनुसार, थायराइड ग्रंथि के उचित कार्य हेतु सेलेनियम और जिंक भी आवश्यक हैं। इनकी कमी से थायराइड ग्रंथि को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आयुर्वेद में इसे कफ और मेद धातु के दूषित होने से जोड़ा गया है, जिससे गले में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं, जो बाद में संक्रमण और बीमारियों का कारण बनते हैं।
आयुर्वेद थायराइड को केवल एक हार्मोनल समस्या नहीं मानता, बल्कि इसे हमारे शरीर की 'अग्नि' (मेटाबॉलिज्म) के मंद होने से जोड़ता है। थायराइड ग्रंथि के सही कार्य के लिए आयोडीन के साथ सेलेनियम और जिंक भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये टी-3 और टी-4 को सक्रिय करने में मदद करते हैं।
थायराइड ग्रंथि मुख्यतः दो हार्मोन, टी-3 और टी-4 का निर्माण करती है। सेलेनियम निष्क्रिय T4 को सक्रिय T3 में परिवर्तित करने में सहायता करता है। यदि शरीर में आयोडीन और सेलेनियम दोनों उपलब्ध हैं, तो शरीर हार्मोन का उत्पादन और उपयोग सही तरीके से कर सकता है। साथ ही, जिंक भी आवश्यक है, क्योंकि यह रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है, जिससे कोशिकाएं थायराइड हार्मोन को पहचान सकें।
आयुर्वेद में थायराइड के लिए कुछ सरल घरेलू उपाय भी बताए गए हैं, जैसे कि मेथी का पानी पीना, हरा धनिया खाना और कद्दू के बीज को आहार में शामिल करना। कद्दू के बीज में जिंक और सेलेनियम दोनों पाए जाते हैं।