मधुमालती: एक अद्भुत पौधा जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है
सारांश
Key Takeaways
- मधुमालती का प्रयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं में किया जा सकता है।
- इसके पत्ते और फूल सर्दी, खांसी, और बुखार के लिए लाभदायक हैं।
- महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दर्द में राहत मिलती है।
- किडनी की सूजन में मधुमालती की छाल का काढ़ा फायदेमंद होता है।
- यह पौधा देखभाल में सरल है और आसानी से उगाया जा सकता है।
नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मधुमालती, जो अपनी गुलाबी रंग की चार खूबसूरत पंखुड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, न केवल सजावट के लिए उपयोगी है, बल्कि इसका आयुर्वेदिक गुणों के लिए भी महत्व है। इस पौधे का उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता है।
मधुमालती का तेल भी बाजार में उपलब्ध है। आज हम इस पौधे के पत्तों और फूलों के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानेंगे।
प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता में मधुमालती के कई गुण बताए गए हैं। इसे विज्ञान में रंगून क्रीपर कहा जाता है और इसकी देखभाल करना काफी आसान है। इसके सुंदर फूल और पत्ते सर्दी, खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द (गठिया) और त्वचा रोगों के लिए सहायक रहे हैं।
यदि किसी की किडनी में सूजन है या कार्यक्षमता कम हो गई है, तो मधुमालती की छाल का काढ़ा फायदेमंद माना जाता है। चिकित्सक की सलाह पर इसका सेवन करने से अंदरूनी अंगों की सूजन कम होती है और उनका कार्य सामान्य होता है।
महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान दर्द या पेल्विक फ्लो की सूजन होने पर भी इसकी छाल का काढ़ा लाभकारी हो सकता है। इसके साथ ही, यह मोटापा कम करने और हॉर्मोन संतुलित करने में भी सहायक है।
सफेद पानी की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के लिए मधुमालती के ताजे फूलों का उपयोग कमर दर्द और हड्डियों के रोगों में राहत प्रदान कर सकता है। इसके अलावा, स्किन से जुड़ी परेशानियों जैसे खुजली, मुंहासे और त्वचा रोगों में भी मधुमालती की पत्तियों का लेप उपयोगी है।
आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि यदि पुरानी खांसी ठीक नहीं हो रही है, तो तुलसी के साथ मधुमालती की पत्तियों का काढ़ा बनाना चाहिए। यह न केवल खांसी को कम करेगा, बल्कि जुकाम और सर्दी से भी राहत दिलाएगा। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें शहद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।