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क्या मौन व्रत से दुरुस्त सेहत और मानसिक समस्याएं दूर हो सकती हैं?

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क्या मौन व्रत से दुरुस्त सेहत और मानसिक समस्याएं दूर हो सकती हैं?

सारांश

आज की शोर-गुल भरी दुनिया में मौन का अभ्यास एक अनमोल साधन है। यह न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित होता है। मौन के फायदों और इसकी महत्वता पर एक नजर डालते हैं।

मुख्य बातें

मौन यह तनाव को कम करता है और स्वास्थ्य को सुधारता है।
मौन से ऊर्जा का संरक्षण होता है।
यह तनाव हार्मोन को नियंत्रित करता है।
मौन करने से क्रिएटिविटी बढ़ती है।

नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज़ रफ्तार और शोर-गुल से भरी दुनिया में शांति एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ तत्व बन गई है। अशांति और शोर-शराबे से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी बाधित करता है, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और उदासी उत्पन्न होती है। ऐसे में मौन का अभ्यास व्यक्ति की सेल्फ-अवेयरनेस, मानसिक स्पष्टता और गहरी आंतरिक शांति को बढ़ाता है।

सनातन धर्म में मौन व्रत को सबसे श्रेष्ठ तप माना गया है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या है, जब मौन व्रत रखना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होता है।

सदियों से आध्यात्मिक परंपराओं में मौन को आंतरिक स्वतंत्रता और सच्ची खुशी का मार्ग माना गया है। मौन केवल बाहरी शोर की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह एक सक्रिय और सजगता से अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। यह हमें बाहरी अशांति से दूर कर आंतरिक दुनिया की ओर ले जाता है।

आयुर्वेद की मूल भावना में मौन को मन की शांति, संयम, और ऊर्जा संरक्षण के रूप में महत्व दिया गया है, जो योग और सात्विक जीवनशैली का हिस्सा है। आयुर्वेद के अनुसार, अधिक बोलने से वात दोष बढ़ता है, जिससे मन अशांत होता है, तनाव बढ़ता है, नींद प्रभावित होती है और ऊर्जा का क्षय होता है। मौन रहने से मन शांत रहता है, जिससे सत्व गुण बढ़ता है। ऊर्जा बचती है, एकाग्रता और ध्यान की क्षमता में वृद्धि होती है। तनाव, क्रोध पर नियंत्रण और ब्लड प्रेशर के साथ हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।

भगवद्गीता में भी मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है, जिसके अनुसार, मौन व्रत मानसिक तप का रूप है, जो शरीर-मन के संतुलन के लिए लाभकारी है। यह वाणी, संयम से ओजस की रक्षा करता है और सेहत को मजबूत बनाता है।

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि शोर प्रदूषण न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि तनाव बढ़ाता है और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। वहीं, मौन का दिमाग पर गहरा और हीलिंग प्रभाव पड़ता है। एक महत्वपूर्ण अध्ययन में पाया गया कि रोजाना दो घंटे मौन रहने से ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ावा मिलता है, जिससे याददाश्त, भावनाओं और सीखने पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

मौन तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करता है, ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता है, नींद की गुणवत्ता को सुधारता है और एकाग्रता, क्रिएटिविटी और भावनात्मक संतुलन को बढ़ाता है। यह मेडिटेशन जैसा प्रभाव उत्पन्न करता है, जो ब्रेन के लिए वरदान की तरह है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मौन व्रत एक महत्वपूर्ण साधना है जो न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। मौन का अभ्यास करने से व्यक्ति अपनी आंतरिक दुनिया से जुड़ता है और मानसिक तनाव को कम करता है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौन व्रत का स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
मौन व्रत से मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है, और हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है।
मौन के दौरान क्या करना चाहिए?
मौन के दौरान ध्यान लगाना, योग करना और अपने विचारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
क्या मौन व्रत रखना अनिवार्य है?
यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह शांति और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है।
कितने समय तक मौन रहना चाहिए?
आप अपनी सुविधा के अनुसार, रोजाना दो घंटे मौन रखने की कोशिश कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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