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क्या नागपुर में सरकारी कैंटीन में सामोसा-जलेबी के साथ स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड लगेंगे?

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क्या नागपुर में सरकारी कैंटीन में सामोसा-जलेबी के साथ स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड लगेंगे?

सारांश

भारत सरकार ने सरकारी कैंटीनों में नाश्तों के लिए स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम मोटापे और बीमारियों पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। आइए जानते हैं इस पहल के पीछे की सोच और स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभाव।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड का उद्देश्य खानपान में जागरूकता बढ़ाना है।
मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों पर नियंत्रण पाने में मदद करेगा।
केंद्र सरकार की 'फिट इंडिया' पहल का हिस्सा है।
सरकारी कैंटीनों में सामोसा और जलेबी जैसे नाश्तों पर लागू होगा।
आगामी समय में ऑयल एंड शुगर बोर्ड लगाए जाएंगे।

नागपुर, १४ जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशभर के सरकारी कैंटीनों और रेस्टोरेंट में सामोसा, जलेबी जैसे नाश्तों के लिए स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड लगाने का आदेश जारी किया है।

इस आदेश के अंतर्गत, जहां भी सामोसा, जलेबी या अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थ बिकते हैं, वहां रंग-बिरंगे पोस्टर लगाना अनिवार्य होगा। ये पोस्टर लोगों को बताएंगे कि इन नाश्तों में कितनी मात्रा में चीनी, तेल और फैट है।

इस पहल को मोटापे और गैर-संक्रामक बीमारियों जैसे डायबिटीज और हृदय रोगों पर नियंत्रण पाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नागपुर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर आमले ने राष्ट्र प्रेस के साथ खास बातचीत में इस कदम की सराहना करते हुए कहा, "यह फैसला लोगों को उनके खानपान के प्रति जागरूक करने के लिए है। जैसे सिगरेट और तंबाकू पर चेतावनी लेबल लगाए जाते हैं, वैसे ही अब सामोसा, जलेबी और वडापाव जैसे खाद्य पदार्थों के लिए भी चेतावनी बोर्ड लगेंगे। उदाहरण के लिए, एक गुलाब जामुन में पांच चम्मच चीनी हो सकती है, और यह जानकारी लोगों को सोचने पर मजबूर करेगी।"

उन्होंने बताया कि यह कदम केंद्र सरकार की 'फिट इंडिया' पहल का हिस्सा है, जो तेल की खपत में १० प्रतिशत कटौती और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।

डॉ. आमले ने कहा, "यह कोई प्रतिबंध नहीं है, बल्कि जागरूकता का प्रयास है। लोग अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थ खा सकते हैं, लेकिन उन्हें यह जानना जरूरी है कि वे क्या खा रहे हैं।"

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में ७.७ करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और २०५० तक मोटापे से प्रभावित लोगों की संख्या ४४.९ करोड़ तक पहुंच सकती है।

ऐसे में यह कदम लोगों को स्वस्थ खानपान के लिए प्रेरित करने में मददगार साबित होगा। नागपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने इस आदेश को लागू करना शुरू कर दिया है। कैंटीन और सार्वजनिक क्षेत्रों में जल्द ही 'ऑयल एंड शुगर बोर्ड' लगाए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस पहल को स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। यह न केवल लोगों को उनके खानपान के बारे में सचेत करेगा, बल्कि स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम में भी मदद करेगा। यह कदम हमारे समाज के लिए निस्संदेह महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड केवल नाश्ते के लिए हैं?
नहीं, स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड तले-भुने खाद्य पदार्थों के लिए लागू होंगे, जिसमें सामोसा, जलेबी और अन्य स्नैक्स शामिल हैं।
क्या यह पहल अनिवार्य है?
जी हां, यह पहल सरकारी कैंटीनों और रेस्टोरेंट्स के लिए अनिवार्य है।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य लोगों को उनके खानपान के प्रति जागरूक करना और मोटापे तथा अन्य बीमारियों पर नियंत्रण पाना है।
राष्ट्र प्रेस
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