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नावासन से पाएं पेट की चर्बी और मोटापे से राहत, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सावधानियाँ

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नावासन से पाएं पेट की चर्बी और मोटापे से राहत, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सावधानियाँ

सारांश

आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती पेट संबंधी समस्याओं का सरल समाधान — नावासन। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह एक आसन पेट, पीठ और जाँघों की माँसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है, चर्बी घटाता है और मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है।

मुख्य बातें

नावासन (नौकासन) पेट, पीठ और जाँघों की माँसपेशियों पर एक साथ काम करता है और शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करने और एब्स बनाने के लिए विशेष रूप से प्रभावी है।
अभ्यास के दौरान पैर और सीना एक साथ ऊपर उठाए जाते हैं तथा हाथ और पैर एक सीध में रखे जाते हैं।
हृदय रोग, अस्थमा, माइग्रेन, लो ब्लड प्रेशर और गर्भावस्था में नौकासन वर्जित है।
नियमित अभ्यास से शारीरिक ताकत के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता और संतुलन में भी सुधार होता है।

नावासन (जिसे नौकासन भी कहते हैं) आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती पेट संबंधी समस्याओं और मोटापे से निपटने के लिए एक प्रभावी योगासन माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से पेट, पीठ और जाँघों की माँसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटती है। व्यस्त दिनचर्या के बीच मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में भी यह आसन सहायक है।

नावासन क्या है और यह नाम कैसे पड़ा

संस्कृत में 'नावा' का अर्थ है 'नाव' और 'आसन' का अर्थ है 'मुद्रा'। इस योगाभ्यास के दौरान शरीर का आकार नाव जैसा बन जाता है, इसीलिए इसे नावासन या नौकासन कहा जाता है। यह आसन शरीर के संतुलन और कोर स्ट्रेंथ दोनों के लिए एक साथ काम करता है।

नावासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, नौकासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

पेट, पीठ और जाँघों की माँसपेशियों पर सीधा दबाव पड़ने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है। रीढ़ की हड्डी को मज़बूती मिलती है और मुद्रा में सुधार आता है। यह आसन एब्स बनाने के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है — नियमित अभ्यास से पेट की माँसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं। इसके अतिरिक्त, यह मानसिक एकाग्रता और शारीरिक संतुलन को भी बेहतर बनाता है।

नावासन करने की सही विधि

नौकासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं और दोनों पैर आपस में जोड़ लें। हाथों को शरीर के बगल में सीधा रखें। इसके बाद एक गहरी साँस लें और साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पैरों और सीने को एक साथ ऊपर उठाएं। हाथों को पैरों की दिशा में आगे खींचें ताकि हाथ और पैर एक सीध में दिखाई दें। इस अवस्था में दृष्टि पैरों पर केंद्रित रखें और पेट की माँसपेशियों में खिंचाव महसूस करें। कुछ क्षण इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं।

किन्हें नावासन नहीं करना चाहिए

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हृदय की गंभीर बीमारी या अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों को नौकासन से परहेज़ करना चाहिए। इसी प्रकार, माइग्रेन, तेज़ सिरदर्द या लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में यह आसन तकलीफ बढ़ा सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी नौकासन वर्जित है, क्योंकि यह पेट पर सीधा दबाव डालता है।

विशेषज्ञ परामर्श ज़रूरी

किसी भी योगासन को दिनचर्या में शामिल करने से पहले प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है, विशेष रूप से यदि आप किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हों। नावासन के क्रमबद्ध और नियमित अभ्यास से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि योग के लाभ तभी मिलते हैं जब अभ्यास सही तकनीक और निरंतरता के साथ किया जाए। भारत में योग की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है, परंतु प्रशिक्षित मार्गदर्शन के बिना गलत अभ्यास चोट का कारण बन सकता है। मंत्रालय ने सावधानियाँ तो सूचीबद्ध की हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों में प्रमाणित योग प्रशिक्षकों की पहुँच और ग्रामीण भारत में जागरूकता का अभाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नावासन और नौकासन में क्या अंतर है?
नावासन और नौकासन एक ही योगासन के दो नाम हैं। संस्कृत में 'नावा' का अर्थ नाव है और 'आसन' का अर्थ मुद्रा — इस आसन में शरीर नाव का आकार लेता है, इसीलिए इसे दोनों नामों से जाना जाता है।
नावासन से पेट की चर्बी कैसे कम होती है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नावासन के दौरान पेट, पीठ और जाँघों की माँसपेशियों पर सीधा दबाव पड़ता है, जिससे शरीर की अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होती है। नियमित अभ्यास से एब्स भी मज़बूत होते हैं।
नावासन करने की सही विधि क्या है?
पीठ के बल सीधे लेटकर पैर जोड़ें और हाथ बगल में रखें। गहरी साँस लेकर साँस छोड़ते हुए पैर और सीना एक साथ ऊपर उठाएं, हाथ पैरों की दिशा में खींचें। दृष्टि पैरों पर रखें, कुछ देर इस स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे वापस आएं।
किन लोगों को नावासन नहीं करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, हृदय की गंभीर बीमारी, अस्थमा, माइग्रेन, तेज़ सिरदर्द या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को नावासन से परहेज़ करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान भी यह आसन वर्जित है क्योंकि इससे पेट पर दबाव पड़ता है।
नावासन से मानसिक स्वास्थ्य को क्या फायदा होता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नावासन केवल शारीरिक ताकत ही नहीं बढ़ाता, बल्कि मानसिक एकाग्रता और शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और ध्यान-केंद्रण की क्षमता बेहतर होती है।
राष्ट्र प्रेस
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