साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड क्या है? गर्मी में मानसिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए WHO की यह तकनीक है रामबाण

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साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड क्या है? गर्मी में मानसिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए WHO की यह तकनीक है रामबाण

सारांश

साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA) WHO द्वारा अनुशंसित वह तकनीक है जो मानसिक संकट में तत्काल भावनात्मक राहत देती है। गर्मी में बढ़ते तनाव, चिड़चिड़ेपन और उदासी के बीच यह आम लोगों के लिए सबसे सुलभ मानसिक स्वास्थ्य उपकरण है — बिना डिग्री, बिना दवा।

Key Takeaways

  • साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA) को WHO, UNICEF और अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
  • भारत में 19.7 करोड़ से अधिक लोग मानसिक विकारों से पीड़ित हैं, लेकिन अधिकांश को समय पर मदद नहीं मिलती।
  • भारत में प्रति एक लाख जनसंख्या पर केवल 0.3 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जो WHO मानक से 10 गुना कम है।
  • PFA देने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं — परिवार, दोस्त, शिक्षक सभी यह सहायता दे सकते हैं।
  • गर्मी में मानसिक संकट के लिए iCall (022-25521111) और Vandrevala Foundation (1860-2662-345) से तुरंत मदद ली जा सकती है।
  • COVID-19 महामारी के दौरान भारत सहित दर्जनों देशों में PFA का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया था।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (Psychological First Aid - PFA) एक ऐसी सरल और प्रभावशाली तकनीक है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मानसिक संकट में घिरे लोगों को तत्काल भावनात्मक सहारा देने के लिए अनुशंसित किया है। गर्मी के मौसम में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो शरीर के साथ-साथ मन भी टूटने लगता है — और ऐसे में यह तकनीक किसी संजीवनी से कम नहीं है।

गर्मी और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध

भीषण गर्मी केवल लू और डिहाइड्रेशन तक सीमित नहीं है। नींद की कमी, शारीरिक थकान, आर्थिक दबाव और रोजमर्रा की परेशानियां मिलकर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को गहरी चोट पहुंचाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में चिड़चिड़ापन, घबराहट, उदासी और पारिवारिक कलह के मामले उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाते हैं।

गौरतलब है कि WHO की वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य रिपोर्ट 2022 के अनुसार, दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित हैं, और भारत में यह संख्या 19.7 करोड़ से अधिक आंकी गई है। इनमें से अधिकांश लोगों को समय पर पेशेवर मदद नहीं मिल पाती — और यहीं साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड की भूमिका सबसे अहम हो जाती है।

साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड आखिर है क्या

PFA न तो कोई दवा है और न ही कोई थेरेपी। यह एक मानवीय, व्यावहारिक और सहानुभूति-आधारित प्रतिक्रिया है जो संकट में फंसे व्यक्ति को तत्काल मानसिक स्थिरता प्रदान करती है। इसका मूल उद्देश्य चार बातें सुनिश्चित करना है — सुरक्षा, जुड़ाव, शांति और आशा

यह तकनीक WHO, UNICEF और अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है और इसे दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध क्षेत्रों और महामारी जैसी परिस्थितियों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। COVID-19 महामारी के दौरान भारत सहित कई देशों में स्वास्थ्यकर्मियों और स्वयंसेवकों को PFA का प्रशिक्षण दिया गया था।

PFA देने के व्यावहारिक तरीके

विशेषज्ञों के अनुसार, साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड देने के लिए किसी विशेष डिग्री की जरूरत नहीं — बस कुछ बुनियादी सिद्धांतों का पालन करना होता है:

पहला — व्यक्ति की तत्काल शारीरिक जरूरतों (पानी, छाया, आराम) का ध्यान रखें। दूसरा — बिना टोके, बिना सलाह दिए धैर्यपूर्वक सुनेंतीसरा — उनकी भावनाओं को सम्मान के साथ स्वीकार करें और यह जताएं कि उनका दर्द वास्तविक है। चौथा — उन्हें बताएं कि वे अकेले नहीं हैंपांचवां — जरूरत पड़ने पर उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या हेल्पलाइन से जोड़ें।

सबसे महत्वपूर्ण बात — सहायता देने वाला स्वयं शांत रहे। संकट में डूबे व्यक्ति के लिए एक स्थिर और शांत उपस्थिति ही सबसे बड़ी दवा होती है।

कौन दे सकता है यह सहायता

PFA की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे परिवार का कोई भी सदस्य, मित्र, शिक्षक, पड़ोसी या सहकर्मी दे सकता है। WHO ने इसके लिए एक निःशुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया है जो कुछ ही घंटों में पूरा किया जा सकता है।

भारत में iCall (022-25521111) और Vandrevala Foundation Helpline (1860-2662-345) जैसी हेल्पलाइनें मानसिक संकट में तत्काल सहायता प्रदान करती हैं। गर्मी के इस मौसम में अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति असामान्य रूप से उदास, घबराया हुआ या चिड़चिड़ा दिखे, तो PFA के सिद्धांतों को अपनाकर आप उसकी जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

व्यापक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह

यह उल्लेखनीय है कि भारत में प्रति एक लाख जनसंख्या पर केवल 0.3 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जबकि WHO का मानक प्रति एक लाख पर 3 मनोचिकित्सक का है। इस भारी कमी को देखते हुए PFA जैसे सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य उपकरण न केवल उपयोगी हैं, बल्कि अनिवार्य भी हो गए हैं।

केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति 2014 में सामुदायिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन अभी भी अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। आने वाले समय में स्कूलों, कार्यस्थलों और आपदा प्रबंधन दलों में PFA प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाए जाने की मांग तेज होती जा रही है।

Point of View

कार्यस्थलों और आपदा प्रबंधन तंत्र में PFA को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता, तब तक मानसिक स्वास्थ्य का बोझ समाज के सबसे कमजोर वर्गों पर ही पड़ता रहेगा। यह सवाल सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सरकारी जवाबदेही का भी है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA) क्या होता है?
साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA) WHO द्वारा अनुशंसित एक सरल, मानवीय तकनीक है जो मानसिक संकट में घिरे व्यक्ति को तत्काल भावनात्मक सहारा देती है। यह कोई दवा या थेरेपी नहीं, बल्कि सुनने, समझने और जोड़ने पर आधारित एक व्यावहारिक प्रतिक्रिया है।
क्या कोई आम व्यक्ति साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड दे सकता है?
हां, PFA देने के लिए किसी विशेष डिग्री की जरूरत नहीं है। परिवार के सदस्य, दोस्त, शिक्षक या पड़ोसी थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर यह सहायता प्रदान कर सकते हैं। WHO ने इसके लिए एक निःशुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराया है।
गर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य क्यों प्रभावित होता है?
गर्मी में नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, शारीरिक थकान और आर्थिक दबाव मिलकर मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे चिड़चिड़ापन, घबराहट, उदासी और पारिवारिक कलह जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
मानसिक संकट में तुरंत मदद के लिए भारत में कौन सी हेल्पलाइन उपलब्ध है?
भारत में iCall (022-25521111) और Vandrevala Foundation Helpline (1860-2662-345) मानसिक संकट में तत्काल सहायता प्रदान करती हैं। ये सेवाएं निःशुल्क और गोपनीय हैं।
साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड देते समय क्या नहीं करना चाहिए?
PFA देते समय पीड़ित की बात बीच में नहीं काटनी चाहिए, अनचाही सलाह नहीं देनी चाहिए और उनकी भावनाओं को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। सबसे जरूरी है कि सहायता देने वाला स्वयं शांत रहे।
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