साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड: मानसिक संकट में तुरंत राहत देने का सरल तरीका, WHO ने बताया कारगर
सारांश
Key Takeaways
- साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA) एक बिना दवा की मानसिक सहायता प्रणाली है जिसे WHO ने संकट में सबसे प्रभावी प्रारंभिक उपाय माना है।
- गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन, नींद की कमी और तनाव हार्मोन मिलकर मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
- PFA की तीन मुख्य प्रक्रियाएं हैं — देखना, सुनना और जोड़ना — जो पीड़ित को सुरक्षित और आशावान महसूस कराती हैं।
- भारत में प्रति एक लाख की आबादी पर केवल 0.3 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जिससे PFA जैसी सामुदायिक सहायता और भी जरूरी हो जाती है।
- परिवार, दोस्त, शिक्षक या पड़ोसी — कोई भी थोड़ी जागरूकता से PFA दे सकता है, इसके लिए चिकित्सकीय प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं।
- मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार PFA की व्यापक जागरूकता से आत्महत्या और पारिवारिक हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA) एक ऐसी सरल मानसिक सहायता प्रक्रिया है जो किसी भी संकट, आपदा या तीव्र तनाव की स्थिति में व्यक्ति को बिना दवा या थेरेपी के तत्काल भावनात्मक सहारा देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे संकट में घिरे लोगों के लिए सबसे प्रभावी प्रारंभिक मानसिक सहायता पद्धति मानता है। गर्मी के मौसम में जब शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ जाता है, तब PFA की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
गर्मी में क्यों बढ़ती है मानसिक परेशानी?
तापमान बढ़ने के साथ-साथ नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और शारीरिक थकान मिलकर मस्तिष्क पर गहरा असर डालती हैं। इससे चिड़चिड़ापन, घबराहट, उदासी और काम में मन न लगने जैसी समस्याएं उभरती हैं। कई शोध यह पुष्टि करते हैं कि अत्यधिक गर्मी में कोर्टिसोल यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो मानसिक अशांति को और गहरा कर देता है।
परिवार में बढ़ते झगड़े, आर्थिक दबाव और रोजमर्रा की परेशानियां इस मौसम में मानसिक स्वास्थ्य को और कमजोर बनाती हैं। ऐसे में अगर समय पर सहारा न मिले तो ये समस्याएं दीर्घकालिक मानसिक बीमारी का रूप ले सकती हैं।
साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड क्या है और यह कैसे काम करता है?
WHO के अनुसार, PFA कोई मनोचिकित्सकीय इलाज नहीं है बल्कि यह एक मानवीय, व्यावहारिक और भावनात्मक सहायता प्रणाली है। इसका मूल उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को सुरक्षित, शांत, जुड़ा हुआ और आशावान महसूस कराना है। यह सुनने, समझने और सहारा देने की कला पर आधारित है।
यह प्रक्रिया तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है — देखना (Look), सुनना (Listen) और जोड़ना (Link)। पहले व्यक्ति की तत्काल जरूरतें पहचानें, फिर धैर्य से उसकी बात सुनें और अंत में उसे जरूरी सेवाओं या विशेषज्ञ से जोड़ें।
PFA देने के व्यावहारिक तरीके
सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति की शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करें — उन्हें ठंडी जगह, पानी और आराम दिलाएं। इसके बाद बिना बीच में टोके, बिना सलाह थोपे, उनकी बात ध्यान से सुनें। उनकी भावनाओं को सम्मान दें और यह जताएं कि वे अकेले नहीं हैं।
सहायता करने वाले व्यक्ति का शांत रहना सबसे जरूरी है क्योंकि सहायक की स्थिरता ही पीड़ित को मानसिक संतुलन का अहसास कराती है। अगर स्थिति गंभीर हो तो बिना देर किए किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क कराएं।
कौन दे सकता है साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड?
PFA की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए कोई विशेष चिकित्सकीय डिग्री जरूरी नहीं। परिवार के सदस्य, मित्र, शिक्षक, पड़ोसी — कोई भी थोड़ी सी जागरूकता और संवेदनशीलता के साथ यह सहायता दे सकता है। WHO और कई मानसिक स्वास्थ्य संगठन इसके लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं।
गौरतलब है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रति एक लाख की आबादी पर केवल 0.3 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जो वैश्विक औसत से कहीं कम है। ऐसे में PFA जैसी सामुदायिक सहायता प्रणाली की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समाज में PFA की जागरूकता बढ़े तो आत्महत्या, पारिवारिक हिंसा और मानसिक रोगों के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। स्कूलों, कार्यस्थलों और सामुदायिक केंद्रों में PFA प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
आने वाले महीनों में जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें भी बढ़ने की आशंका है। ऐसे में साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड को एक सामाजिक आदत बनाना समय की जरूरत है।