क्या कालमेघ रक्त शुद्धि से लेकर हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है? सेवन से पहले जान लें सावधानियां
सारांश
Key Takeaways
- कालमेघ रक्त शुद्धि में सहायक है।
- यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
- सावधानी से इसका सेवन करना चाहिए।
- यह एंटी-डायबेटिक गुणों से भरपूर है।
- त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत प्रदान करता है।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आयुर्वेद में अनेक जड़ी-बूटियों का वर्णन किया गया है, जो अपनी विशेषताओं के अनुसार विभिन्न बीमारियों से छुटकारा दिलाने में सहायक होती हैं। इनमें से एक विशिष्ट पत्तेदार पौधा है कालमेघ, जिसकी पत्तियां हमारे शरीर के हर अंग के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
यह सामान्य बुखार, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, पेट की गैस, आंतों के कीड़ों और कब्ज जैसी कई समस्याओं में राहत प्रदान करता है।
आयुर्वेद में कालमेघ को संजीवनी कहा जाता है, जो कई रोगों में मददगार साबित होता है। इसके पत्ते कड़वे और कसैले होते हैं, इसलिए इसे 'बिटर किंग' के नाम से भी जाना जाता है। यह पौधा मुख्यतः उत्तर भारत और बंगाल क्षेत्र में उगता है। इसके पत्तों में एन्ड्रोग्राफोलाइड की उच्च मात्रा होती है, जो इसे अनेक गुणों से भरपूर बनाती है।
रक्त अशुद्ध होने पर फ्लू, वायरल संक्रमण और मलेरिया जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इस स्थिति में, कालमेघ का पत्तों का काढ़ा रक्त को शुद्ध करने में सहायक होता है।
कालमेघ में एंटी-डायबेटिक गुण होते हैं, जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार, यह मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी है। यदि शुगर के मरीज कालमेघ के पत्तों का काढ़ा पीते हैं, तो यह रक्त में शर्करा को संतुलित करने में सहायक हो सकता है।
त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझने वाले लोगों को अक्सर पित्त और कफ दोष के असंतुलन का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याएं होती हैं। इनसे बचाव के लिए कालमेघ के पत्तों का पेस्ट बनाकर लगाने से राहत मिलती है।
कालमेघ में एंटी-क्लॉटिंग गुण होते हैं, जो रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करते हैं। यह रक्त में धक्कों के बनने के जोखिम को कम करता है और लंबे समय तक रहने वाले या बार-बार होने वाले बुखार में भी सहायक होता है। यह मलेरिया, टायफाइड और वायरल बुखार में जल्दी रिकवरी में मदद करता है।
हालांकि, कुछ लोगों को कालमेघ का सेवन करते समय सतर्क रहना चाहिए। अगर सेवन के बाद पेट में दर्द, चक्कर आना या उल्टी जैसी समस्याएं होती हैं, तो इसका सेवन न करें। गर्भवती महिलाओं को भी इससे बचना चाहिए।