मुंबई के सायन अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर शिवशरण पाटिल की संदिग्ध मौत, जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के सायन अस्पताल में सर्जरी विभाग के प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर छात्र डॉ. शिवशरण पाटिल का शव 10 अक्टूबर 2026 की रात उनके छात्रावास के कमरे के बाथरूम में मिला। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक संदेह है कि डॉ. पाटिल ने एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा लेकर कथित तौर पर आत्महत्या की। अस्पताल प्रशासन और पुलिस को तत्काल सूचित किया गया और जांच शुरू कर दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस ने बताया कि डॉ. शिवशरण पाटिल सायन अस्पताल के सर्जरी विभाग में पहले वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर थे। उनका शव 10 अक्टूबर की रात उनके छात्रावास के बाथरूम में बरामद हुआ। फिलहाल फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है और मामले की तफ्तीश जारी है। पुलिस ने अभी तक मौत का अंतिम कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
पृष्ठभूमि — सूरत की इसी तरह की घटना
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अगस्त 2026 में गुजरात के सूरत स्थित न्यू सिविल अस्पताल में भी एक प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर की कथित आत्महत्या ने देशभर में हलचल मचाई थी। उस मामले में राज्य-नियुक्त जांच समिति को रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न के प्रमाण मिले थे, जिसके बाद चार वरिष्ठ डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने उस मामले में बताया था कि एंटी-रैगिंग कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। सूरत अस्पताल के संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष और शिक्षण स्टाफ को भी जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कथित विफलता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
उस मामले में मृतक का कोई आत्महत्या नोट नहीं मिला था, लेकिन सहपाठियों के बयानों से पता चला था कि वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा बार-बार मानसिक उत्पीड़न किया जाता था। पानसेरिया ने तब कहा था, 'जूनियर डॉक्टरों को परेशान करना हमारी संस्कृति नहीं है।'
मेडिकल शिक्षा में रैगिंग और तनाव का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। देश के कई सरकारी मेडिकल संस्थानों में रेजिडेंट डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार, नींद न आने की समस्या और वरिष्ठों द्वारा मानसिक दबाव की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2024 में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर से हुई दुर्घटना के बाद से देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर बहस तेज हुई है।
अस्पताल प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया
सायन अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल इस मामले पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। मुंबई पुलिस ने पुष्टि की है कि जांच जारी है और मौत के कारणों की विधिवत तफ्तीश की जा रही है। फॉरेंसिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
आगे क्या
मुंबई पुलिस की जांच के नतीजे और फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सूरत की घटना से सबक लेते हुए, आलोचकों का कहना है कि मेडिकल संस्थानों में एंटी-रैगिंग तंत्र को और मज़बूत करने की ज़रूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दिए बिना ऐसी त्रासदियों को रोकना कठिन होगा।