मुंबई आईसीटी हॉस्टल में इंजीनियरिंग छात्र सिद्धेश पाटील ने की आत्महत्या, डिप्रेशन का इलाज था जारी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के हॉस्टल में 21 अक्टूबर 2026 की रात करीब साढ़े 10 बजे दूसरे वर्ष के एक इंजीनियरिंग छात्र ने अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान नासिक निवासी सिद्धेश पाटील के रूप में हुई है, जो आईसीटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए हॉस्टल में रहता था।
घटनाक्रम: कैसे सामने आई बात
पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, सिद्धेश पाटील पिछले कुछ दिनों से अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहा था और उसका उपचार भी चल रहा था। घटना से एक दिन पहले उसने अपने चिकित्सक को संदेश भेजकर बताया कि उसके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं।
वह संदेश पढ़ते ही चिकित्सक ने तत्काल सिद्धेश के परिवार को सूचित किया। परिवार ने इसके बाद हॉस्टल में रह रहे उसके मित्रों से संपर्क साधा और उन्हें फौरन उसके कमरे में जाने को कहा। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार, मित्रों के वहाँ पहुँचने से पहले ही सिद्धेश ने हॉस्टल के कमरे में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही माटुंगा पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पूरे प्रकरण की विधिवत जाँच प्रारंभ कर दी है। मुंबई पुलिस ने इस घटना की आधिकारिक रूप से पुष्टि की है।
जाँचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि आत्महत्या के पीछे अवसाद के अलावा अन्य कोई कारण भी थे या नहीं। सिद्धेश के मित्रों और परिजनों से पूछताछ की जा रही है।
एक हफ्ते में दूसरी ऐसी घटना
गौरतलब है कि इससे पहले 14 अक्टूबर 2026 को झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में एक निजी विश्वविद्यालय के बीटेक छात्र का शव किराए के कमरे में फंदे से लटका मिला था। उस मृतक की पहचान हजारीबाग जिले के पेटो गाँव निवासी मनीष कुमार के रूप में हुई थी, जो झारखंड राय यूनिवर्सिटी में बीटेक कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मनीष का रूममेट कुछ दिन पहले ही वह कमरा छोड़ गया था और वह अकेला रह रहा था।
यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से माँग कर रहे हैं कि इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में सक्षम काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मानसिक स्वास्थ्य और छात्र सुरक्षा
सिद्धेश का मामला इस बात को रेखांकित करता है कि अवसाद से ग्रस्त छात्र यदि समय पर सहायता माँगे, तो संस्थागत और पारिवारिक सतर्कता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। इस मामले में चिकित्सक ने तुरंत परिवार को सूचित किया, परंतु दुर्भाग्यवश समय पर हस्तक्षेप संभव नहीं हो सका।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार यह सलाह देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या के विचार व्यक्त करे, तो उसे तत्काल पेशेवर और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए। आगे इस मामले में पुलिस की जाँच के निष्कर्ष और संस्थान की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुज़र रहा है, तो iCall हेल्पलाइन: 9152987821 या Vandrevala Foundation: 1860-2662-345 पर संपर्क करें।