21 अक्टूबर 2026
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मुंबई आईसीटी हॉस्टल में इंजीनियरिंग छात्र सिद्धेश पाटील ने की आत्महत्या, डिप्रेशन का इलाज था जारी

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मुंबई आईसीटी हॉस्टल में इंजीनियरिंग छात्र सिद्धेश पाटील ने की आत्महत्या, डिप्रेशन का इलाज था जारी

सारांश

मुंबई के आईसीटी हॉस्टल में 21 अक्टूबर की रात नासिक के इंजीनियरिंग छात्र सिद्धेश पाटील ने अवसाद के बीच जान दे दी। उसने पहले ही डॉक्टर को संदेश भेजा था, परिवार को सूचित किया गया, लेकिन दोस्त समय पर नहीं पहुँच सके। एक हफ्ते में यह दूसरी ऐसी छात्र त्रासदी है।

मुख्य बातें

सिद्धेश पाटील , नासिक निवासी और आईसीटी मुंबई के दूसरे वर्ष के इंजीनियरिंग छात्र, ने 21 अक्टूबर 2026 की रात साढ़े 10 बजे हॉस्टल में आत्महत्या कर ली।
सिद्धेश पिछले कुछ दिनों से अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित था और उसका उपचार चल रहा था।
घटना से एक दिन पहले उसने अपने चिकित्सक को आत्महत्या के विचारों की जानकारी दी थी; डॉक्टर ने तुरंत परिवार को सूचित किया।
माटुंगा पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
इससे पहले 14 अक्टूबर 2026 को रांची में झारखंड राय यूनिवर्सिटी के बीटेक छात्र मनीष कुमार का शव किराए के कमरे में मिला था।

मुंबई के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के हॉस्टल में 21 अक्टूबर 2026 की रात करीब साढ़े 10 बजे दूसरे वर्ष के एक इंजीनियरिंग छात्र ने अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान नासिक निवासी सिद्धेश पाटील के रूप में हुई है, जो आईसीटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए हॉस्टल में रहता था।

घटनाक्रम: कैसे सामने आई बात

पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, सिद्धेश पाटील पिछले कुछ दिनों से अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहा था और उसका उपचार भी चल रहा था। घटना से एक दिन पहले उसने अपने चिकित्सक को संदेश भेजकर बताया कि उसके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं।

वह संदेश पढ़ते ही चिकित्सक ने तत्काल सिद्धेश के परिवार को सूचित किया। परिवार ने इसके बाद हॉस्टल में रह रहे उसके मित्रों से संपर्क साधा और उन्हें फौरन उसके कमरे में जाने को कहा। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार, मित्रों के वहाँ पहुँचने से पहले ही सिद्धेश ने हॉस्टल के कमरे में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी।

पुलिस की कार्रवाई

सूचना मिलते ही माटुंगा पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पूरे प्रकरण की विधिवत जाँच प्रारंभ कर दी है। मुंबई पुलिस ने इस घटना की आधिकारिक रूप से पुष्टि की है।

जाँचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि आत्महत्या के पीछे अवसाद के अलावा अन्य कोई कारण भी थे या नहीं। सिद्धेश के मित्रों और परिजनों से पूछताछ की जा रही है।

एक हफ्ते में दूसरी ऐसी घटना

गौरतलब है कि इससे पहले 14 अक्टूबर 2026 को झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में एक निजी विश्वविद्यालय के बीटेक छात्र का शव किराए के कमरे में फंदे से लटका मिला था। उस मृतक की पहचान हजारीबाग जिले के पेटो गाँव निवासी मनीष कुमार के रूप में हुई थी, जो झारखंड राय यूनिवर्सिटी में बीटेक कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मनीष का रूममेट कुछ दिन पहले ही वह कमरा छोड़ गया था और वह अकेला रह रहा था।

यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से माँग कर रहे हैं कि इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में सक्षम काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मानसिक स्वास्थ्य और छात्र सुरक्षा

सिद्धेश का मामला इस बात को रेखांकित करता है कि अवसाद से ग्रस्त छात्र यदि समय पर सहायता माँगे, तो संस्थागत और पारिवारिक सतर्कता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। इस मामले में चिकित्सक ने तुरंत परिवार को सूचित किया, परंतु दुर्भाग्यवश समय पर हस्तक्षेप संभव नहीं हो सका।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार यह सलाह देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या के विचार व्यक्त करे, तो उसे तत्काल पेशेवर और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए। आगे इस मामले में पुलिस की जाँच के निष्कर्ष और संस्थान की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुज़र रहा है, तो iCall हेल्पलाइन: 9152987821 या Vandrevala Foundation: 1860-2662-345 पर संपर्क करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

परिवार ने दोस्तों से संपर्क किया — फिर भी हस्तक्षेप नाकाम रहा। यह 'क्राइसिस रिस्पॉन्स' की खाई को दर्शाता है जो अधिकांश भारतीय तकनीकी संस्थानों में आज भी मौजूद है। एक हफ्ते के भीतर दो छात्र मौतें यह सवाल उठाती हैं कि उच्च-दबाव वाले शैक्षणिक परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल महज़ एक हेल्पलाइन नंबर तक सीमित क्यों है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धेश पाटील कौन था और घटना कहाँ हुई?
सिद्धेश पाटील नासिक निवासी इंजीनियरिंग छात्र था, जो मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) में दूसरे वर्ष में पढ़ रहा था। उसने 21 अक्टूबर 2026 की रात साढ़े 10 बजे हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली।
क्या सिद्धेश के डिप्रेशन का इलाज चल रहा था?
हाँ, पुलिस और उपलब्ध जानकारी के अनुसार सिद्धेश पिछले कुछ दिनों से अवसाद से पीड़ित था और उसका उपचार जारी था। घटना से एक दिन पहले उसने अपने चिकित्सक को संदेश भेजकर आत्महत्या के विचारों की जानकारी दी थी।
पुलिस इस मामले में क्या कर रही है?
माटुंगा पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मुंबई पुलिस ने घटना की पुष्टि की है और छात्र के दोस्तों व परिजनों से पूछताछ जारी है। जाँचकर्ता अवसाद के अलावा अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल कर रहे हैं।
क्या हाल ही में किसी अन्य छात्र के साथ भी ऐसी घटना हुई?
हाँ, 14 अक्टूबर 2026 को रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में झारखंड राय यूनिवर्सिटी के बीटेक छात्र मनीष कुमार का शव किराए के कमरे में मिला था। वह हजारीबाग जिले के पेटो गाँव का निवासी था और कुछ दिन पहले उसका रूममेट भी वह कमरा छोड़ गया था।
मानसिक संकट में किससे संपर्क करें?
यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा हो, तो iCall हेल्पलाइन 9152987821 या Vandrevala Foundation की हेल्पलाइन 1860-2662-345 पर तत्काल संपर्क करें। पेशेवर सहायता समय पर लेना जीवन-रक्षक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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