भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: 8,284 उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुँच, MSME-किसानों को बड़ा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू होने के साथ ही उद्योग संगठन एसोचैम ने 21 अक्टूबर 2026 को इसका स्वागत करते हुए कहा कि यह समझौता विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देगा और निर्यातकों, विनिर्माण क्षेत्र एवं छोटे कारोबारों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। न्यूजीलैंड ने भारत के 8,284 उत्पाद वर्गों (टैरिफ लाइन्स) पर तत्काल शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान की है।
समझौते में क्या शामिल है
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के बाजार में मिलने वाली ड्यूटी-फ्री पहुँच भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगी। मिंडा के अनुसार, 'इस समझौते की वास्तविक सफलता उन अवसरों से मापी जाएगी, जो यह पैदा करेगा और दोनों देशों के लोगों के जीवन पर जो सकारात्मक प्रभाव डालेगा।'
गौरतलब है कि भारत से न्यूजीलैंड के लिए पहली बार निर्यात की गई JCB मशीन, जिसे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रवाना किया, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का प्रतीक बताई जा रही है।
किन क्षेत्रों को होगा लाभ
फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, फुटवियर और चमड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों को इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। समझौते में कीवी फल, सेब, शहद, बागवानी, वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजनाएँ भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य तकनीकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण और उत्पादकता में बढ़ोतरी है। मनुका हनी और कीवी फल जैसे चुनिंदा उत्पादों पर कोटा-आधारित रियायतों का भी प्रावधान है।
व्यापार आँकड़े और द्विपक्षीय संतुलन
एसोचैम के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का न्यूजीलैंड को निर्यात 71.1 करोड़ डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह घटकर 56.7 करोड़ डॉलर रह गया। इसी अवधि में न्यूजीलैंड से भारत का आयात क्रमशः 58.7 करोड़ डॉलर और 58.9 करोड़ डॉलर रहा। यह ऐसे समय में आया है जब वित्त वर्ष 2024-25 में 12.4 करोड़ डॉलर के व्यापार अधिशेष के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में 2.2 करोड़ डॉलर का मामूली व्यापार घाटा दर्ज किया गया है।
भारत की तरफ से रियायतें
भारत ने लकड़ी, ऊन और भेड़ के मांस जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क तत्काल समाप्त करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा 35.6 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किए जाएंगे। व्यक्तियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए हर वर्ष 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा और 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा की व्यवस्था की गई है।
आगे की राह
एसोचैम का कहना है कि यह व्यापार समझौता भारतीय MSME को मजबूत करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और भारतीय व्यवसायों को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ने में सहायक होगा। समझौते के क्रियान्वयन के साथ ही भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, निवेश और व्यापक आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।