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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए लागू: शून्य शुल्क से 9 करोड़ व्यापारियों को फायदा, खंडेलवाल ने बताया 'दशहरा गिफ्ट'

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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए लागू: शून्य शुल्क से 9 करोड़ व्यापारियों को फायदा, खंडेलवाल ने बताया 'दशहरा गिफ्ट'

सारांश

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए लागू होते ही कैट ने इसे 9 करोड़ व्यापारियों के लिए दशहरा उपहार बताया। शून्य शुल्क की सुविधा से ऑटो, फार्मा, कपड़ा और कृषि क्षेत्र को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। 2030 तक 7 अरब NZD व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।

मुख्य बातें

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है।
न्यूजीलैंड को भारतीय निर्यात पर अब शून्य प्रतिशत सीमा शुल्क लागू होगा।
न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर निवेश में सहयोग करेगा।
दोनों देशों का 2030 तक 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य।
एमएसएमई , कारीगर, किसान, महिला उद्यमी और निर्यातक प्रमुख लाभार्थी माने जा रहे हैं।
कैट महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने इसे 9 करोड़ व्यापारियों के लिए दशहरा उपहार बताया।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से प्रभाव में आ गया है, जिसके तहत न्यूजीलैंड को निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों पर शून्य प्रतिशत सीमा शुल्क लागू होगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इसे देश के 9 करोड़ व्यापारियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विजयादशमी का उपहार बताया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

समझौते की मुख्य विशेषताएँ

इस एफटीए के अंतर्गत न्यूजीलैंड के बाज़ार में भारतीय सामान पर शून्य आयात शुल्क की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश में भी सहयोग करेगा। दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुँचाने का संयुक्त लक्ष्य निर्धारित किया है।

खंडेलवाल के अनुसार, यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी की व्यापार-केंद्रित कूटनीति का प्रतिफल है, जो भारतीय कारोबारियों को नए वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने के साथ-साथ घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की भी रक्षा करती है।

लाभान्वित क्षेत्र और उद्योग

कैट के अनुसार, इस एफटीए से कई प्रमुख क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं — कपड़ा एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद।

खंडेलवाल ने विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, ऑटो स्पेयर पार्ट्स, अनाज और दालों, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स का उल्लेख करते हुए कहा कि इन उद्योगों को अब न्यूजीलैंड के व्यापक बाज़ार तक पहुँचने का सुनहरा अवसर मिला है।

एमएसएमई और कारीगरों पर असर

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि शून्य शुल्क पहुँच से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), कारीगरों, किसानों, विनिर्माताओं, महिला उद्यमियों और निर्यातकों को सीधा लाभ मिल सकता है। खंडेलवाल ने इन सभी वर्गों से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की वैश्विक पहुँच बढ़ाने के लिए इस समझौते का भरपूर उपयोग करने का आग्रह किया।

यह एफटीए 'लोकल टू ग्लोबल', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' जैसी केंद्र सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को भी बल देता है। गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी एफटीए संपन्न किए हैं, और न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता उसी क्रम में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएँ

खंडेलवाल ने कहा, 'मुझे विश्वास है कि इससे देशभर के व्यापारियों, उद्योगों और छोटे कारीगरों को निर्यात के माध्यम से कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे। देश के नौ करोड़ व्यापारियों की ओर से मैं विजयादशमी की शुभकामनाएँ देता हूँ और इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूँ।'

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का मानना है कि यह एफटीए निर्यात संवर्धन, रोज़गार सृजन और समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब नज़रें इस बात पर हैं कि विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातक इस शून्य-शुल्क सुविधा का लाभ कितनी तेज़ी से उठाते हैं और द्विपक्षीय व्यापार का 2030 का लक्ष्य कितना व्यावहारिक साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जैसे आसियान और दक्षिण कोरिया के साथ, अपेक्षित निर्यात वृद्धि देने में सीमित रहे हैं। खंडेलवाल का उत्साह समझ में आता है, लेकिन 2030 का 7 अरब NZD का लक्ष्य तब तक कागज़ी रहेगा जब तक बंदरगाह से लेकर प्रमाणन तक की पूरी आपूर्ति शृंखला तैयार न हो। असली परीक्षा व्यापार के आँकड़ों में छह महीने बाद दिखेगी।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए क्या है और यह कब से लागू हुआ?
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों पर शून्य प्रतिशत सीमा शुल्क लागू होगा, जिससे भारतीय सामान वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
इस एफटीए से कौन-से भारतीय क्षेत्रों को फायदा होगा?
कैट के अनुसार, कपड़ा एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। एमएसएमई, कारीगर, किसान और महिला उद्यमी भी प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं।
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार का 2030 तक क्या लक्ष्य है?
दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुँचाने का संयुक्त लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा, न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश में भी सहयोग करेगा।
प्रवीण खंडेलवाल ने इस एफटीए पर क्या कहा?
कैट महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इस एफटीए को देश के 9 करोड़ व्यापारियों के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दशहरा उपहार बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से व्यापारियों, उद्योगों और छोटे कारीगरों को निर्यात के माध्यम से महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर मिलेंगे।
यह एफटीए 'आत्मनिर्भर भारत' से कैसे जुड़ता है?
खंडेलवाल के अनुसार यह समझौता 'लोकल टू ग्लोबल', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' जैसी केंद्र सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को बल देता है। इसे मोदी सरकार की व्यापार-केंद्रित कूटनीति का हिस्सा बताया जा रहा है, जो घरेलू उद्योगों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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