भारत-न्यूजीलैंड एफटीए 20 अक्टूबर से लागू: 100% निर्यात ड्यूटी फ्री, किसानों-एमएसएमई को नए बाजार
सारांश
मुख्य बातें
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के शुभ अवसर पर लागू हो गया। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में भारत में न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक जॉन राटा ने कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते से दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाज़ार मिलेंगे और रोज़गार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे दोनों देशों के लिए 'विजय' करार दिया।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस एफटीए के तहत 100 प्रतिशत भारतीय निर्यात ड्यूटी फ्री हो जाएगा। यह समझौता एमएसएमई, किसानों, युवाओं और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए द्वार खोलेगा। गोयल ने कहा, 'कल, विजयादशमी के शुभ अवसर पर, भारत और न्यूजीलैंड अपनी आर्थिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे... यह वास्तव में दोनों देशों के लिए एक विजय है!'
गौरतलब है कि इस समझौते पर बातचीत पिछले वर्ष मार्च में शुरू हुई थी और मात्र डेढ़ वर्ष से कम समय में इसे अंतिम रूप देकर लागू कर दिया गया — जो कि व्यापार वार्ताओं के लिहाज़ से अपेक्षाकृत तीव्र गति है।
किसानों और कृषि क्षेत्र को लाभ
गोयल के अनुसार, एफटीए से भारतीय किसानों को फल, सब्जियों, मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड के बाज़ार तक व्यापक पहुँच मिलेगी। इससे उत्पादकता बढ़ाने, आय में सुधार करने और आजीविका को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत कृषि निर्यात विविधीकरण को प्राथमिकता दे रहा है।
सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है — एक नीतिगत निर्णय जिसे कृषि लॉबी की दीर्घकालिक माँग के अनुरूप बताया जा रहा है।
कारोबारियों को नए अवसर
उच्चायुक्त पैट्रिक जॉन राटा ने कहा कि एफटीए से व्यवसायों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे — भारतीय कारोबारी न्यूजीलैंड में और न्यूजीलैंड के कारोबारी भारत में नए बाज़ार तलाश सकेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ने वाले व्यापार से व्यवसाय और अधिक विकसित होंगे, जिससे रोज़गार के नए मौके भी बनेंगे।
वार्ता की पृष्ठभूमि
गोयल ने न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले और दोनों देशों की वार्ता टीमों को उनके निरंतर प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू होने से लेकर समझौते के लागू होने तक का यह सफर, आपसी भरोसे और संतुलित दृष्टिकोण की मिसाल है।
यह भारत के बढ़ते हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के एजेंडे का हिस्सा है — इससे पहले भारत यूएई, ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ व्यापार समझौते कर चुका है या वार्ता में आगे बढ़ा है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इस श्रृंखला में एक और महत्त्वपूर्ण कड़ी है।
आगे की राह
समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों को निर्यात प्रक्रियाओं, शुल्क रियायतों और बाज़ार-पहुँच नियमों से जुड़े क्रियान्वयन दिशानिर्देशों का इंतजार रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एमएसएमई क्षेत्र को लाभ उठाने के लिए जागरूकता अभियानों और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों की ज़रूरत होगी।