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भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर से लागू, $20 अरब निवेश और द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

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भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर से लागू, $20 अरब निवेश और द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

सारांश

भारत-न्यूजीलैंड FTA कल यानी 20 अक्टूबर से लागू हो रहा है — इसके साथ $20 अरब डॉलर के संभावित निवेश का रास्ता खुलेगा, IT-फार्मा-पेशेवर सेवाओं को न्यूजीलैंड में नई पहुँच मिलेगी और भारतीय छात्रों व पेशेवरों के लिए विशेष वीज़ा सुविधाएँ जुड़ेंगी। डेयरी और कृषि क्षेत्र सुरक्षित रखे गए हैं।

मुख्य बातें

भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर 2026 से औपचारिक रूप से लागू होगा।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार सरकार का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है; वर्तमान में व्यापार $1.1 अरब डॉलर का है।
कृषि, विनिर्माण और स्टार्टअप क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से $20 अरब डॉलर तक के निवेश की संभावना।
IT, फार्मा, पर्यटन और ऑडियो-विज़ुअल सेवाओं को न्यूजीलैंड के बाज़ार में विस्तारित पहुँच मिलेगी।
भारतीय पेशेवरों के लिए विशेष वीज़ा कोटा और छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद कार्य अधिकार का विस्तार।
डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और अधिकांश पशु मांस उत्पाद शुल्क रियायतों के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार, 19 अक्टूबर को यह जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा, नियामकीय सहयोग में तेजी लाएगा और निवेश प्रवाह के नए रास्ते खोलेगा। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।

समझौते में क्या है खास

वाणिज्य सचिव अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह FTA केवल शुल्क कटौती का साधन नहीं है। उनके शब्दों में, 'एफटीए का उद्देश्य गहरी आर्थिक साझेदारी तैयार करना है।' यह समझौता व्यापार, निवेश और आपूर्ति शृंखला एकीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया को भी सरल बनाएगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस FTA के जरिए कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढाँचे और स्टार्टअप्स समेत विभिन्न क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

सेवा क्षेत्र और पेशेवरों को लाभ

भारत के सेवा क्षेत्र को इस समझौते से व्यापक अवसर मिलने की उम्मीद है। सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाएँ, निर्माण, पर्यटन और ऑडियो-विज़ुअल सेवाओं को न्यूजीलैंड के बाज़ार में अधिक पहुँच मिलेगी।

समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए विशेष वीज़ा कोटा की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद कार्य अधिकारों का विस्तार किया गया है, जिससे रोज़गार के नए द्वार खुलेंगे।

फार्मा और मेडिकल डिवाइस निर्यात को राहत

भारतीय फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों के लिए यह समझौता विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। न्यूजीलैंड अब विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों द्वारा जारी निरीक्षण स्वीकृतियों को स्वीकार करेगा, जिससे अनुपालन की जटिलता कम होगी और उत्पादों की बाज़ार में प्रवेश प्रक्रिया तेज़ होगी। गौरतलब है कि यह भारतीय दवा उद्योग की एक पुरानी माँग थी।

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा

सरकार ने भारतीय किसानों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और अधिकांश पशु मांस उत्पादों को शुल्क रियायतों के दायरे से बाहर रखा है। यह निर्णय उन आशंकाओं को देखते हुए लिया गया जो न्यूजीलैंड के डेयरी और कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धी कीमतों से भारतीय किसानों पर पड़ सकने वाले दबाव को लेकर थीं।

द्विपक्षीय व्यापार और आगे की राह

वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तु व्यापार लगभग $1.1 अरब डॉलर का है। अधिकारियों के अनुसार, यह FTA लागू होने के साथ ही व्यापार, निवेश और रोज़गार सृजन में उल्लेखनीय तेजी आने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA जैसे देशों के साथ पहले से ही FTA को आगे बढ़ा चुका है और मजबूत वैश्विक आपूर्ति शृंखला निर्माण को अपनी प्राथमिकता बना चुका है। समझौते के क्रियान्वयन की दिशा में अगले कदम निकट भविष्य में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि $20 अरब के निवेश अनुमान किस समयसीमा में और किस क्षेत्र में ठोस रूप लेते हैं। भारत के UAE और ऑस्ट्रेलिया FTA के शुरुआती अनुभव बताते हैं कि घोषित लाभ और वास्तविक व्यापार वृद्धि के बीच अक्सर क्रियान्वयन की खाई रह जाती है। डेयरी और कृषि को छूट देना राजनीतिक रूप से समझदारी है, लेकिन इससे उन क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव की गुंजाइश सीमित हो जाती है जहाँ न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी ताकत है। पेशेवर वीज़ा और छात्र कार्य अधिकार जैसे प्रावधान सही दिशा में हैं, परंतु इनका लाभ तभी मिलेगा जब दोनों देशों के बीच योग्यता मान्यता की प्रक्रिया भी सरल हो।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क्या है?
यह भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी समझौता है जो 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो रहा है। इसके तहत व्यापार, निवेश, सेवा क्षेत्र और आपूर्ति शृंखला एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा दोनों देशों के बीच नियामकीय सहयोग को सरल बनाया जाएगा।
भारत-न्यूजीलैंड FTA से किन क्षेत्रों को सबसे ज़्यादा फायदा होगा?
IT, पेशेवर सेवाएँ, फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइस, निर्माण, पर्यटन और ऑडियो-विज़ुअल सेवाओं को न्यूजीलैंड के बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलेगी। भारतीय फार्मा निर्यातकों को अनुपालन प्रक्रिया आसान होने से बाज़ार में तेज़ प्रवेश का लाभ मिलेगा।
क्या भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग पर कोई खतरा है?
सरकार ने डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और अधिकांश पशु मांस उत्पादों को शुल्क रियायतों के दायरे से बाहर रखा है। इससे भारतीय किसानों और डेयरी क्षेत्र को न्यूजीलैंड की प्रतिस्पर्धी कीमतों से सुरक्षित रखा गया है।
भारतीय पेशेवरों और छात्रों को FTA से क्या लाभ मिलेगा?
समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में विशेष वीज़ा कोटा की व्यवस्था की गई है। भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने के अधिकारों का भी विस्तार किया गया है, जिससे रोज़गार के नए अवसर खुलेंगे।
भारत-न्यूजीलैंड के बीच मौजूदा व्यापार कितना है और लक्ष्य क्या है?
वर्तमान में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार लगभग $1.1 अरब डॉलर का है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार सरकार आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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