भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: पुणे निर्मित JCB मशीनें न्यूजीलैंड के निर्माण क्षेत्र में, ₹8,284 टैरिफ लाइनें शुल्क-मुक्त
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 अक्टूबर 2026 से भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने की घोषणा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित 'मेड इन इंडिया' JCB मशीनों की पहली निर्यात खेप न्यूजीलैंड रवाना की गई है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारतीय निर्यात को कवर करने वाली सभी 8,284 टैरिफ लाइनों पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच पहले दिन से मिलेगी।
FTA का शुभारंभ और प्रतीकात्मक पहल
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत-न्यूजीलैंड एफटीए हमारे विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर खोल रहा है।' उन्होंने विजयादशमी के अवसर पर इसे दोनों देशों की 'विजय' करार देते हुए कहा कि यह आर्थिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत है। पुणे संयंत्र से JCB मशीनों की पहली खेप को हरी झंडी दिखाना इस समझौते के व्यावहारिक प्रभाव का तात्कालिक प्रतीक है।
व्यापार और निवेश का विस्तृत खाका
भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (TPCI) के अनुसार, यह FTA भारतीय व्यापार नीति के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है। समझौते का लक्ष्य पाँच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुँचाना और भारत में दीर्घकालिक विदेशी निवेश के रूप में 20 अरब डॉलर की प्रतिबद्धताओं का मार्ग प्रशस्त करना है।
TPCI ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और हल्के इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को ओशिनिया क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
किसानों, MSME और श्रमिकों पर असर
गोयल ने बताया कि यह FTA MSME, किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर खोलेगा। किसानों को फलों, सब्जियों, मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए व्यापक बाज़ार पहुँच मिलेगी, साथ ही उत्पादकता बढ़ाने और आजीविका को मज़बूत करने में भी सहयोग किया जाएगा।
गौरतलब है कि डेयरी सहित संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते में संरक्षण दिया गया है, जिससे किसानों का कल्याण नीतियों के केंद्र में बना रहेगा।
शुल्क-मुक्त पहुँच से कौन से उत्पाद लाभान्वित
TPCI के अनुसार, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, मसाले, सीजनिंग उत्पाद, कन्फेक्शनरी, बेकरी उत्पाद, पैकेज्ड अनाज, सॉस, फलों के रस और प्रसंस्कृत सब्जियों पर लगने वाला 5 प्रतिशत तक का शुल्क पहले ही दिन से घटकर शून्य हो जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी उपस्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है। शुल्क-मुक्त पहुँच से मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के लिए इस क्षेत्र में बड़े अवसर खुलेंगे।
क्या होगा आगे
न्यूजीलैंड में $20 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता में विनिर्माण, बुनियादी ढाँचे, सेवा क्षेत्र और नवाचार को मज़बूत करने की संभावनाएँ हैं, जिससे उद्यमों और रोज़गार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। FTA के पूर्ण कार्यान्वयन के साथ, भारत का ओशिनिया में व्यापारिक पदचिह्न अगले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से विस्तृत होने की संभावना है।