एसोचैम का भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के साथ समझौता, 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- एसोचैम ने 27 अप्रैल को भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद (INZBC) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी।
- वर्तमान व्यापार 1.3 अरब डॉलर (वस्तु) + 634 मिलियन डॉलर (सेवा); अगले 5 वर्षों में 5 अरब डॉलर का लक्ष्य।
- अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता।
- टेक्सटाइल, फार्मा, पेट्रोलियम, IT और सेवा क्षेत्र इस समझौते से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे।
नई दिल्ली, 27 अप्रैल को प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद (INZBC) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत आर्थिक अवसरों को व्यवस्थित रूप से साकार करना है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
व्यापार का वर्तमान परिदृश्य
वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर और सेवाओं का व्यापार 634 मिलियन डॉलर है। एसोचैम और INZBC के बीच यह साझेदारी आने वाले पाँच वर्षों में इस व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में लगभग 3 लाख भारतीयों का समुदाय इस आर्थिक जुड़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
FTA की विशेषताएँ और लाभ
22 दिसंबर 2025 को मात्र नौ महीनों में पूरा किया गया यह FTA भारत के व्यापार इतिहास में एक अभूतपूर्व समझौता है। इसके तहत भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा सुयोग है। साथ ही, अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड की ओर से 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया गया है।
निर्यात के नए अवसर
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल के अनुसार, भारत से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी का निर्यात इस समझौते से बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, न्यूजीलैंड से कच्चा माल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात होगा। भारत का सेवा क्षेत्र — विशेषकर IT, वित्तीय सेवाएँ, शिक्षा, व्यवसायिक सेवाएँ और पेशेवर सेवाएँ — न्यूजीलैंड में अपनी पहुँच बढ़ाकर खास लाभ उठा सकता है।
संपर्क और सहयोग को बढ़ावा
एसोचैम के अनुसार, बेहतर हवाई संपर्क और पर्यटन सहयोग इस आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। व्यापार और उद्योग संस्थाओं के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा और लेन-देन में आने वाली बाधाओं को कम करेगा। लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना भी इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भू-राजनीतिक संदर्भ
वैश्विक स्तर पर व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के बीच यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक विविधता को दर्शाता है। यह मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार आर्थिक साझेदारी बनाने की भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।