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एसोचैम ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के साथ किया समझौता, FTA के तहत व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य

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एसोचैम ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के साथ किया समझौता, FTA के तहत व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य

सारांश

एसोचैम और भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के बीच नया समझौता न केवल FTA को क्रियान्वित करने का रोडमैप है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक विविधता का प्रतीक भी है। 100% शुल्क-मुक्त निर्यात पहुँच और 20 अरब डॉलर के निवेश वादे के साथ, यह साझेदारी अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को तिगुना करने की महत्वाकांक्षा रखती है।

मुख्य बातें

एसोचैम ने 27 अप्रैल 2026 को भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100% शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, जो FTA का मुख्य लाभ है।
वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब डॉलर (वस्तुएँ) + 634 मिलियन डॉलर (सेवाएँ); लक्ष्य 5 वर्षों में 5 अरब डॉलर ।
न्यूजीलैंड से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा।
भारत के IT, फार्मा, टेक्सटाइल और सेवा क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ की उम्मीद।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 — प्रमुख उद्योग निकाय एसोचैम ने सोमवार को भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद (INZBC) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत औद्योगिक कदमों को व्यवस्थित रूप से लागू करना और दोनों देशों के व्यवसायों को इस समझौते से मिलने वाली संभावनाओं का पूर्ण लाभ उठाना है। यह समझौता 22 दिसंबर 2025 को संपन्न हुए FTA के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मात्र नौ महीनों में पूरा किया गया था।

व्यापार संबंधों में नई गति

वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर और सेवाओं का व्यापार 634 मिलियन डॉलर है। इस समझौते के माध्यम से दोनों देश इस व्यापार को अगले पाँच वर्षों में 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं। एसोचैम का अनुमान है कि बेहतर कनेक्टिविटी, प्रक्रियागत सुविधाएँ और पर्यटन सहयोग इस विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

निर्यात के नए अवसर

FTA के तहत भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, जो भारत के व्यापार समझौता इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम है। एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि भारत के टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी का निर्यात इस समझौते से विशेष लाभान्वित होगा। साथ ही, भारत का सेवा क्षेत्र — विशेषकर IT, वित्तीय सेवाएँ, शिक्षा, व्यावसायिक सेवाएँ — न्यूजीलैंड में अपनी उपस्थिति उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकते हैं।

निवेश और साझेदारी का विस्तार

अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड की ओर से भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया गया है, जो दोनों देशों की दीर्घकालिक आर्थिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। न्यूजीलैंड से भारत को कच्चा माल और आवश्यक वस्तुओं का आयात बढ़ने की संभावना है। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में लगभग 3 लाख भारतीयों का समुदाय रहता है, जो इस साझेदारी में एक महत्वपूर्ण पुल की भूमिका निभा रहा है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रणनीतिक महत्व

एसोचैम ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के बीच यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक विविधता और मजबूत, समावेशी तथा भविष्य के लिए तैयार आर्थिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। व्यापार संस्थाओं के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाएगा और प्रशासनिक बाधाओं को कम करेगा।

आगे की रणनीति

एसोचैम का मानना है कि बेहतर हवाई संपर्क, पर्यटन सहयोग और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना आने वाले वर्षों में दोनों देशों की साझेदारी की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए आवश्यक होगा। इस समझौते के बाद, दोनों देश अब क्षेत्रीय व्यापार नेटवर्क को और सुदृढ़ करने की ओर ध्यान केंद्रित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परीक्षा तब आएगी जब क्रियान्वयन की बारी आएगी। FTA के बाद के महीनों में, भारतीय निर्यातकों को वास्तविक बाजार पहुँच, रेगुलेटरी स्वीकृति और लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। न्यूजीलैंड में 3 लाख भारतीयों की मौजूदगी एक सांस्कृतिक पुल तो है, लेकिन यह निवेश और व्यापार के लिए पर्याप्त नहीं है। असली सफलता तब मिलेगी जब भारतीय IT कंपनियाँ, फार्मास्यूटिकल्स निर्माता और कृषि निर्यातक न्यूजीलैंड के बाजार में वास्तविक उपस्थिति दर्ज करेंगे। वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के बीच यह समझौता भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विविधता कदम है, लेकिन इसे 5 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सरकारी सहायता, बेहतर बुनियादी ढाँचा और निरंतर द्विपक्षीय संवाद की आवश्यकता होगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसोचैम और भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद के बीच समझौता क्या है?
यह एक समझौता ज्ञापन है जो भारत-न्यूजीलैंड FTA को क्रियान्वित करने के लिए दोनों देशों के व्यापार संगठनों के बीच किया गया है। इसका उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों के व्यवसायों को FTA से मिलने वाली संभावनाओं का पूरा लाभ दिलाना है।
भारत-न्यूजीलैंड FTA के तहत भारत को क्या लाभ मिलेगा?
भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100% शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, जो भारत के व्यापार समझौता इतिहास में अभूतपूर्व है। भारत के टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी और सेवा क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा।
भारत-न्यूजीलैंड के बीच वर्तमान व्यापार कितना है और लक्ष्य क्या है?
वर्तमान में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार 1.3 अरब डॉलर और सेवाओं का व्यापार 634 मिलियन डॉलर है। लक्ष्य अगले 5 वर्षों में इसे 5 अरब डॉलर तक बढ़ाना है।
न्यूजीलैंड से भारत में कितना निवेश आने की संभावना है?
न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया गया है, जो दोनों देशों की दीर्घकालिक आर्थिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस समझौते से भारत के किन क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा?
भारत के IT, वित्तीय सेवाएँ, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी और शिक्षा क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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