क्या सर्दियों में मूली खाने का सही तरीका जानना जरूरी है?
सारांश
Key Takeaways
- सर्दियों में मूली का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
- इसे कच्चा खाने के कई तरीके हैं।
- मूली का छिलका भी पोषण से भरपूर है।
- एक दिन में 100-150 ग्राम मूली का सेवन पर्याप्त है।
- रात में मूली खाने से बचें।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में मूली को प्राकृतिक सुपरफूड माना जाता है। मूली में उपस्थित पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा और ताकत प्रदान करते हैं। यह पाचन, इम्युनिटी और त्वचा की सेहत के लिए भी एक वरदान है। बहुत से लोग इसे सलाद या सूप के रूप में खाते हैं, लेकिन इसके सही सेवन का तरीका, समय और मात्रा जानना भी आवश्यक है, ताकि इसके स्वास्थ्य लाभ का पूरा फायदा मिल सके।
मूली में सबसे पहले फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। यह शरीर में जाकर भोजन को पचाने में मदद करती है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करती है। इसके अलावा, इसमें विटामिन सी होता है, जो इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है। सर्दियों में वायरस और सर्दी-जुकाम से बचने के लिए विटामिन सी की आवश्यकता अधिक होती है और मूली इसे प्राकृतिक रूप में उपलब्ध कराती है।
मूली में पोटैशियम भी होता है, जो हृदय की सेहत को बनाए रखने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और मांसपेशियों की चुस्ती बनाए रखने में सहायक है। इसके साथ ही, मूली में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं और शरीर को डिटॉक्स करते हैं।
कच्ची मूली खाने के विभिन्न तरीके हैं। इसे कद्दूकस करके दही के साथ रायता बनाया जा सकता है, नींबू और काला नमक डालकर सलाद के रूप में खाया जा सकता है, या पतले स्लाइस काटकर स्नैक की तरह लिया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, कच्ची मूली शरीर में गर्मी और ताकत पैदा करती है, इसलिए इसे सर्दियों में खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और पाचन प्रणाली मजबूत होती है।
मूली का छिलका भी बेहद उपयोगी होता है। इसके छिलके में फाइबर और कई पोषक तत्व होते हैं, इसलिए छिलके सहित खाने से पाचन और एंटीऑक्सीडेंट्स के लाभ दोगुने हो जाते हैं।
मूली केवल पाचन के लिए ही नहीं, बल्कि बीमारी में राहत देने में भी मदद करती है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एंजाइम और फाइबर शरीर के पाचन तंत्र को सक्रिय करते हैं, जिससे खाना जल्दी पचता है और गैस, एसिडिटी या भारीपन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
इसके अलावा, मूली में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो शरीर में जमा विषैले पदार्थों और फ्लूइड को बाहर निकालकर सूजन कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे जुकाम, कफ और बलगम कम करने वाली सब्जी माना जाता है। यह शरीर में जमा अतिरिक्त गर्मी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर इम्युनिटी को मजबूत करती है और संक्रमण से बचाव करती है।
मूली एक लो-कैलोरी और पौष्टिक स्नैक है, जो वजन घटाने वालों के लिए भी बेहतरीन है। हालांकि, दिन में अधिक मात्रा में मूली खाने से गैस या पेट दर्द हो सकता है, इसलिए एक दिन में लगभग 100–150 ग्राम ही पर्याप्त मानी जाती है।
रात में मूली खाने से बचना चाहिए। खासकर अगर किसी को थायरॉइड की समस्या या एसिडिटी की शिकायत है, तो वह मूली का सेवन न करें। इसके अलावा, मूली खाने से शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। यह त्वचा की सेहत को भी सुधारती है। नियमित रूप से मूली खाने से चेहरे पर झुर्रियां कम होती हैं और त्वचा में निखार आता है।