त्रिकोणासन: तनाव, पाचन और मांसपेशियों की कमज़ोरी से राहत का आयुष-अनुमोदित योगासन
सारांश
मुख्य बातें
त्रिकोणासन — जिसमें शरीर त्रिभुज की आकृति बनाता है — आयुष मंत्रालय के अनुसार आधुनिक जीवनशैली की तीन प्रमुख समस्याओं — मानसिक तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और कमज़ोर पाचन — से एक साथ निपटने में सहायक है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को शरीर को लचीला, संतुलित और शक्तिशाली बनाने के साथ-साथ श्वसन क्षमता सुधारने में प्रभावी बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेस्क जॉब करने वालों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है।
त्रिकोणासन क्या है और यह कैसे काम करता है
इस आसन में हाथ, पैर और धड़ मिलकर एक त्रिभुज का आकार बनाते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, शरीर को तीन दिशाओं में एक साथ स्ट्रेच देने की यह प्रक्रिया मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ाती है और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय को बेहतर करती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहने से रीढ़ और कूल्हे की मांसपेशियाँ अकड़ जाती हैं।
स्वास्थ्य लाभ: क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने की क्षमता में वृद्धि होती है। शरीर को मोड़ने और खिंचाव देने की प्रक्रिया पेट के अंगों को सक्रिय करती है, जिससे पाचन में सुधार होता है। जिन लोगों को गैस, अपच या पेट से जुड़ी अन्य समस्याएँ रहती हैं, उनके लिए यह आसन लाभकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, एकाग्रता बढ़ाने में भी इसकी भूमिका बताई जाती है।
त्रिकोणासन करने की सही विधि
योगा मैट पर खड़े होकर दोनों पैरों को 3 से 4 फीट की दूरी पर फैलाएँ। दाएँ पैर को 90 डिग्री बाहर की ओर घुमाएँ और बाएँ पैर को थोड़ा अंदर की ओर मोड़ें। दोनों हाथों को कंधों की सीध में फैलाएँ, हथेलियाँ नीचे की ओर रखें। धीरे-धीरे दाईं ओर झुकें और दाहिने हाथ से दाएँ पैर या टखने को छूने का प्रयास करें। बायाँ हाथ सीधा ऊपर की ओर रहे। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रहें और सामान्य श्वास बनाए रखें। इसके बाद ताड़ासन में वापस आएँ और यही प्रक्रिया बाईं ओर दोहराएँ।
सावधानियाँ: किन्हें नहीं करना चाहिए यह आसन
स्लिप डिस्क, साइटिका के गंभीर दर्द या हाल ही में पेट की सर्जरी हुई हो, ऐसे लोगों को त्रिकोणासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। किसी भी पुरानी शारीरिक समस्या की स्थिति में योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित रहता है।
आगे की राह
आयुष मंत्रालय की ओर से योग को दैनिक जीवन में शामिल करने पर लगातार बल दिया जा रहा है। त्रिकोणासन जैसे आसन, जो न्यूनतम स्थान और उपकरण में किए जा सकते हैं, शहरी और ग्रामीण दोनों आबादियों के लिए एक सुलभ स्वास्थ्य विकल्प बनते जा रहे हैं।