तनाव और चिंता को अलविदा कहने के लिए नियमित त्रिकोणासन का महत्व
सारांश
Key Takeaways
- तनाव और चिंता में कमी
- पाचन में सुधार
- वजन नियंत्रण
- एकाग्रता में वृद्धि
- शारीरिक लचीलापन
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आज के समय में हर कोई एक स्वस्थ और सुडौल शरीर की ख्वाहिश रखता है, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के कारण यह कई बार संभव नहीं हो पाता। 'त्रिकोणासन' एक ऐसा योगासन है जिसे कम समय में किया जा सकता है और इसके कई लाभ होते हैं।
इस योगासन के नियमित अभ्यास से मांसपेशियों में लचीलापन और रक्त परिसंचरण में सुधार होता है। रोजाना इसे करने से शरीर को दाएं और बाएं तरफ खींचने की आवश्यकता होती है, जिससे पीठ, हाथों और पैरों की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, यह एक ऐसा योगासन है जो शरीर को लचीला, संतुलित और शक्तिशाली बनाता है। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कमर तथा जांघों की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
इसे करने के लिए, योगा मैट पर दोनों पैरों को 3 से 4 फीट की दूरी पर रखें। दाएं पैर को 90 डिग्री बाहर की ओर घुमाएं और बाएं पैर को थोड़ा अंदर की ओर मोड़ें। फिर, दोनों हाथों को कंधों की ऊंचाई पर सीधा फैलाएं और अपनी हथेलियों को नीचे की ओर रखें। धीरे-धीरे दायीं ओर झुकें और दाहिने हाथ से दाएं पैर या टखने को छूने का प्रयास करें। बायां हाथ सीधा ऊपर की ओर रखें। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक बने रहें और सामान्य सांस लें। फिर धीरे से ताड़ासन में लौटें। इसी प्रक्रिया को बाईं ओर दोहराएं।
इस अभ्यास के दौरान हाथ, पैर और रीढ़ एक त्रिकोण का आकार बनाते हैं, जो तनाव को कम करने में मददगार साबित होता है, लेकिन स्लिप डिस्क या साइटिका जैसी समस्याओं में सावधानी बरतनी चाहिए।
त्रिकोणासन नियमित रूप से करने से वजन नियंत्रित होता है, साथ ही तनाव और चिंता में भी कमी आती है। यह संतुलन और एकाग्रता में वृद्धि करता है।
इसके नियमित अभ्यास से शरीर की ऊर्जा में वृद्धि होती है, हालाँकि इसके अभ्यास में कुछ सावधानियाँ बरतने की सलाह दी जाती है।