क्या 103 साल पहले दुनिया ने 'इंसुलिन' से पहली बार सामना किया?

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क्या 103 साल पहले दुनिया ने 'इंसुलिन' से पहली बार सामना किया?

सारांश

11 जनवरी 1922 को इंसुलिन के सफल प्रयोग ने मधुमेह के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण जगाई। यह घटना चिकित्सा इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जानें कैसे एक 14 वर्षीय बच्चे ने इंसुलिन के जरिए जीवन पाया और यह किस प्रकार लाखों लोगों के लिए एक नई शुरुआत बनी।

Key Takeaways

  • 11 जनवरी 1922 को इंसुलिन का पहला सफल प्रयोग हुआ।
  • लियोनार्ड थॉम्पसन के जीवन को इंसुलिन ने बचाया।
  • इंसुलिन ने मधुमेह के इलाज में क्रांति ला दी।
  • यह घटना चिकित्सा विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
  • इंसुलिन की खोज ने लाखों लोगों को एक सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में 11 जनवरी 1922 का दिन एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इसी दिन कनाडा में पहली बार एक मधुमेह रोगी को इंसुलिन का सफलतापूर्वक इंजेक्शन दिया गया, जिसने उस बीमारी को नियंत्रित करने का मार्ग प्रशस्त किया जिसे उस समय लगभग निश्चित मृत्यु का प्रतीक माना जाता था। यह प्रयोग न केवल एक मरीज के जीवन को बचाने में सफल रहा, बल्कि यह करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन गया।

इस ऐतिहासिक घटना के केंद्र में 14 वर्षीय लियोनार्ड थॉम्पसन थे, जो टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित थे। उस समय डायबिटीज का कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं था। मरीजों को बेहद सख्त डाइट पर रखा जाता था, जिससे वे धीरे-धीरे कमजोरी और कुपोषण का शिकार हो जाते थे। डॉक्टरों के पास बीमारी को रोकने या नियंत्रित करने का कोई ठोस उपाय नहीं था। ऐसे में लियोनार्ड थॉम्पसन की स्थिति भी तेजी से बिगड़ रही थी और उनके जीवन की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी।

इसी समय कनाडा के टोरंटो विश्वविद्यालय में डॉक्टर फ्रेडरिक बैंटिंग और उनके सहयोगी चार्ल्स बेस्ट, जेम्स कॉलिप और जॉन मैकलियोड एक ऐसे हार्मोन पर काम कर रहे थे, जिसे अग्न्याशय (पैंक्रियास) से निकाला गया था। इस हार्मोन को बाद में इंसुलिन नाम दिया गया। कई असफल प्रयोगों और तकनीकी कठिनाइयों के बाद वैज्ञानिक एक शुद्ध रूप में इंसुलिन तैयार करने में सफल हुए।

11 जनवरी 1922 को लियोनार्ड थॉम्पसन को इंसुलिन की पहली खुराक दी गई। शुरुआती परिणाम पूरी तरह से आदर्श नहीं थे, लेकिन कुछ ही दिनों में सुधरे हुए इंसुलिन ने चमत्कारी असर दिखाया। मरीज के रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित होने लगा, उसकी हालत में तेजी से सुधार आया, और वह मौत के करीब से वापस आ गया। यह क्षण चिकित्सा इतिहास का एक निर्णायक मोड़ बन गया।

इस सफलता के बाद इंसुलिन का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू हुआ और जल्द ही यह दुनिया भर में मधुमेह के इलाज का आधार बन गया। जो बीमारी कभी लाइलाज मानी जाती थी, वह अब एक नियंत्रित स्थिति बन गई। लाखों मरीजों को एक सामान्य, सक्रिय और लंबा जीवन जीने का अवसर मिला।

11 जनवरी 1922 की यह घटना केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग की सफलता नहीं थी, बल्कि मानव जिज्ञासा, अनुसंधान और करुणा की जीत थी। आज भी यह दिन चिकित्सा विज्ञान में आशा, नवाचार और जीवनरक्षा का प्रतीक माना जाता है।

Point of View

बल्कि यह मानवता की जिज्ञासा और करुणा की जीत भी है। हम सभी को इस सफलता को याद रखना चाहिए, जिसने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

इंसुलिन का क्या महत्व है?
इंसुलिन मधुमेह के इलाज में एक आवश्यक हार्मोन है, जो रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
कौन था पहला इंसुलिन प्राप्त करने वाला मरीज?
14 वर्षीय लियोनार्ड थॉम्पसन पहले मरीज थे जिन्हें इंसुलिन का इंजेक्शन दिया गया था।
इंसुलिन के आविष्कार का महत्व क्या है?
इंसुलिन ने मधुमेह को नियंत्रित करने का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे लाखों लोगों को सामान्य जीवन जीने का अवसर मिला।
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