अराघची-लावरोव बैठक: ईरान-रूस ने परमाणु साझेदारी और आर्थिक सहयोग पर किया मंथन, लेबनान-यूक्रेन समेत कई मुद्दे उठे
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 20 अक्टूबर 2026 को तेहरान में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें परमाणु क्षेत्र में साझेदारी और आर्थिक सहयोग को विस्तार देने पर विशेष बल दिया गया। दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक कई संवेदनशील क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की।
बैठक में क्या-क्या हुआ
अराघची ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'आज सर्गेई लावरोव का तेहरान में स्वागत किया और उनके साथ अहम बातचीत हुई। हमने यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें लेबनान, फिलिस्तीन, यूक्रेन और यमन की स्थिति भी शामिल रही।'
अराघची ने आगे लिखा, 'हमने आर्थिक सहयोग बढ़ाने और परमाणु क्षेत्र में साझेदारी को और मज़बूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया। हमारे इतिहास में शायद ही कभी ऐसा समय आया हो जब ईरान और रूस के रिश्ते आज जितने करीब और मज़बूत रहे हों।'
राष्ट्रपति पेजेश्कियन की लावरोव से अलग मुलाक़ात
इससे पहले सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी लावरोव से मुलाक़ात की और द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की।
पेजेश्कियन ने कहा कि तेहरान और मॉस्को के बीच हुए समझौतों और आपसी सहमतियों को तेज़ी से लागू करने की ज़रूरत है। उन्होंने ऊर्जा, परिवहन, व्यापार और बिजली संयंत्रों से जुड़े बुनियादी ढाँचे के क्षेत्रों में सहयोग को दोनों देशों के संबंधों की प्राथमिकता बताया।
बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था पर साझा दृष्टिकोण
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने यह भी कहा कि ईरान और रूस अपनी साझा क्षमताओं का बेहतर उपयोग करते हुए और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों के ज़रिए मिलकर शांति, स्थायी सुरक्षा और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था को मज़बूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और रूस-यूक्रेन युद्ध दोनों को लेकर दोनों देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। गौरतलब है कि ईरान-रूस की बढ़ती निकटता पश्चिम के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों ने तेहरान-मॉस्को संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। परमाणु सहयोग के विस्तार को लेकर अभी कोई ठोस समझौते की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस बैठक के संकेत स्पष्ट हैं — दोनों देश पश्चिमी दबाव के मद्देनज़र अपने सामरिक और आर्थिक संबंधों को एक नई धुरी पर स्थापित कर रहे हैं।