15 अक्टूबर 2026
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बलूचिस्तान खनिज समझौते खारिज करे अमेरिका: बलोच एक्टिविस्ट तारा चंद का ट्रंप को पत्र

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बलूचिस्तान खनिज समझौते खारिज करे अमेरिका: बलोच एक्टिविस्ट तारा चंद का ट्रंप को पत्र

सारांश

बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने ट्रंप को पत्र लिखकर बलूचिस्तान में बिना स्थानीय सहमति के हुए खनिज समझौते खारिज करने की माँग की है। साथ ही कथित जबरन गुमशुदगियों और न्यायेतर हत्याओं की अंतरराष्ट्रीय जाँच की अपील भी की गई है।

मुख्य बातें

बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने 15 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा।
पत्र में माँग की गई कि बलूच जनता की सहमति के बिना हुए बलूचिस्तान खनिज खनन समझौते खारिज किए जाएँ।
चंद ने बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगियों, न्यायेतर हत्याओं और मनमाने हिरासत की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की।
पत्र 30 सितंबर 2026 को जारी अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स नताली ए.
बेकर के साक्षात्कार के संदर्भ में लिखा गया।
CPEC के तहत चीनी निवेश से उपजी शिकायतों का हवाला देते हुए अमेरिका को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।

बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनका प्रशासन बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों के ज़रिए किए गए खनिज खनन समझौतों को अस्वीकार कर दे, क्योंकि इन समझौतों में बलूच जनता की स्वतंत्र सहमति न तो ली गई और न ही उन्हें पहले से सूचित किया गया। यह पत्र वाशिंगटन से 15 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ और इसने अमेरिका-पाकिस्तान खनिज साझेदारी को लेकर चल रही बहस को नई धार दे दी है।

पत्र की मुख्य माँगें

चंद ने अपने पत्र में ट्रंप प्रशासन से तीन स्पष्ट माँगें रखीं — पहली, बलूचिस्तान में उन खनिज परियोजनाओं के लिए अमेरिकी सरकारी समर्थन, फंडिंग और गारंटी तत्काल रोकी जाए जिनमें बलूच जनता की सार्थक सहमति और मानवाधिकारों की विश्वसनीय सुरक्षा व्यवस्था का अभाव है। दूसरी, बलूचिस्तान में कथित अत्याचारों की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच का समर्थन किया जाए। तीसरी, इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स नताली ए. बेकर तथा अमेरिकी विदेश विभाग सीधे स्वतंत्र बलूच प्रतिनिधियों, मानवाधिकार रक्षकों और प्रभावित समुदायों से संवाद करें।

मानवाधिकार उल्लंघन पर गंभीर आरोप

पत्र में चंद ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर जबरन गुमशुदगियाँ, न्यायेतर हत्याएँ, मनमाने हिरासत और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के दमन जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आग्रह किया कि बलूचिस्तान में किसी भी अमेरिकी निवेश से जुड़ा निर्णय लेने से पहले वहाँ की मानवाधिकार स्थिति का गंभीरता से आकलन किया जाए।

उन्होंने कहा, 'अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों के लिए, न्याय, सुरक्षा और अधिकारों के सम्मान के बिना, खनिज संसाधनों के विकास के वादे कोई मायने नहीं रखते। आर्थिक समझौतों के ज़रिए कभी भी दमन को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।'

सीपीईसी और चीनी निवेश पर चेतावनी

चंद ने अमेरिका को यह भी याद दिलाया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत बलूचिस्तान में हुए चीनी निवेश ने स्थानीय समुदायों में गहरी शिकायतें पैदा की हैं। उन्होंने चेताया कि स्थानीय लोगों की सार्थक सहमति के बिना थोपे गए प्रोजेक्ट असंतोष और अस्थिरता को और गहरा कर सकते हैं।

गौरतलब है कि यह पत्र 30 सितंबर 2026 को अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी नताली ए. बेकर के एक साक्षात्कार के संदर्भ में लिखा गया है, जिसमें पाकिस्तान के खनिज क्षेत्र में अमेरिकी दिलचस्पी उजागर हुई थी।

आत्मनिर्णय और ऐतिहासिक दावे

चंद ने यह भी दावा किया कि बलूचिस्तान को जबरन पाकिस्तान में शामिल किया गया था और बलूच लोगों को उनके 'आत्मनिर्णय के अधिकार' से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा, 'बलूचिस्तान हमारी मातृभूमि है। यहाँ की प्राकृतिक संपदा यहाँ के लोगों की विरासत है, न कि पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के लिए कोई मोलभाव की वस्तु।'

आगे क्या हो सकता है

यह पत्र ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान के साथ खनिज और रणनीतिक संसाधन क्षेत्र में सहयोग के संकेत दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस्लामाबाद द्वारा दिए गए आश्वासन सीधे तौर पर प्रभावित बलूच समुदायों की आवाज़ का विकल्प नहीं हो सकते। अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रंप प्रशासन की ओर से इस पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वह अनजाने में उस विवाद में उलझ सकता है जो दशकों से बलूचिस्तान में सुलग रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इस पत्र को महज एक कार्यकर्ता की अपील के रूप में देख सकती है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या अमेरिका, CPEC की आलोचना करते हुए, खुद उसी राह पर चल रहा है। जब तक स्थानीय सहमति का कोई सत्यापन-योग्य ढाँचा नहीं बनता, अमेरिकी खनिज निवेश न केवल नैतिक सवाल खड़े करेगा, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता को भी बढ़ावा दे सकता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तारा चंद ने ट्रंप को पत्र में क्या माँग की है?
बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने ट्रंप से माँग की है कि अमेरिका उन बलूचिस्तान खनिज खनन समझौतों को खारिज करे जो बलूच जनता की स्वतंत्र सहमति और पूर्व जानकारी के बिना पाकिस्तानी अधिकारियों के ज़रिए किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच की भी अपील की है।
बलूचिस्तान में खनिज संसाधनों को लेकर विवाद क्यों है?
आलोचकों का कहना है कि बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों पर स्थानीय बलूच समुदाय का अधिकार है, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने इन संसाधनों पर समझौते बिना स्थानीय सहमति के किए हैं। बलोच एक्टिविस्ट इसे क्षेत्रीय स्वायत्तता और आत्मनिर्णय के अधिकार के हनन के रूप में देखते हैं।
नताली ए. बेकर का साक्षात्कार इस मामले में क्यों अहम है?
इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स नताली ए. बेकर का 30 सितंबर 2026 को जारी साक्षात्कार पाकिस्तान के खनिज क्षेत्र में अमेरिकी दिलचस्पी को उजागर करता है। तारा चंद ने इसी साक्षात्कार को आधार बनाते हुए अपना पत्र लिखा और ट्रंप प्रशासन से पूछा कि किसकी जमीन और संसाधनों की पेशकश की जा रही है।
CPEC का बलूचिस्तान मुद्दे से क्या संबंध है?
तारा चंद ने अमेरिका को चेताया कि CPEC के तहत बलूचिस्तान में चीनी निवेश ने स्थानीय समुदायों में गहरी शिकायतें उत्पन्न की हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका को अपनी ओर से कोई भी प्रतिबद्धता जताने से पहले CPEC की इन गलतियों से सबक लेना चाहिए, ताकि असंतोष और अस्थिरता न बढ़े।
बलोच अमेरिकन कांग्रेस क्या है?
बलोच अमेरिकन कांग्रेस अमेरिका में बसे बलूच समुदाय का एक संगठन है जो बलूचिस्तान में मानवाधिकारों और बलूच जनता के अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाता है। इसके अध्यक्ष तारा चंद ने इस पत्र के ज़रिए ट्रंप प्रशासन का ध्यान बलूचिस्तान की स्थिति की ओर खींचने का प्रयास किया है।
राष्ट्र प्रेस
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