बांग्लादेश: छात्र लीग के 5 नेता ढाका में हिरासत में, जनाजे की नमाज़ के दौरान बीएनपी कार्यकर्ताओं ने की मारपीट
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में अवामी लीग के छात्र संगठन छात्र लीग के पाँच नेताओं और कार्यकर्ताओं को 12 अक्टूबर 2026 को ढाका के धनमंडी इलाक़े में स्थित तकवा मस्जिद के निकट से हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई छात्र लीग के महासचिव महफुजुल हैदर चौधरी रोटन की जनाजे की नमाज़ के दौरान हुई, जब उनके श्रद्धांजलि देने आए समर्थक उस क्षेत्र में एकत्र हुए थे। अवामी लीग के विरुद्ध जारी कार्रवाई के बीच यह घटना बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव को और गहरा करती दिख रही है।
मुख्य घटनाक्रम
द बिजनेस स्टैंडर्ड (बांग्लादेश) ने स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि रविवार दोपहर बीएनपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मस्जिद के पीछे इन पाँच व्यक्तियों को रोका, उनके साथ मारपीट की और बाद में उन्हें धनमंडी पुलिस थाने के हवाले कर दिया। घटना की पुष्टि करते हुए धनमंडी थाने के प्रभारी मुहम्मद इमदादुल इस्लाम तायेब ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोग छात्र लीग से जुड़े थे और उन्हें मस्जिद के पीछे जुलूस निकालने के दौरान गिरफ़्तार किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, रोटन की जनाजे की नमाज़ धनमंडी तकवा मस्जिद के सामने होने की सूचना मिलते ही छात्र लीग के कई नेता और कार्यकर्ता आसपास के इलाक़े में एकत्र हो गए थे। एहतियात के तौर पर मस्जिद और निकटस्थ धनमंडी ईदगाह मैदान के आसपास कानून व्यवस्था बल तैनात किए गए थे।
रोटन का निधन और पार्थिव शरीर का ढाका आगमन
बताया गया है कि महफुजुल हैदर चौधरी रोटन लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। शनिवार को कोलकाता स्थित अपोलो अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर रविवार को ढाका लाया गया, जिसके बाद जनाजे की नमाज़ का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि यह घटना उस राजनीतिक माहौल में हुई जब बांग्लादेश में अवामी लीग से जुड़े लोगों पर कार्रवाई लगातार तेज़ होती जा रही है।
अवामी लीग नेता की कड़ी प्रतिक्रिया
इस घटना की निंदा करते हुए अवामी लीग नेता और बांग्लादेश के पूर्व मंत्री मोहम्मद अली अराफात ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "पुलिस और बीएनपी से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में बाधा डाली और श्रद्धांजलि देने पहुँचे आम लोगों के विरुद्ध भीड़ हिंसा को बढ़ावा दिया। शोक व्यक्त करने आए लोगों पर हमला किया गया, उन्हें पीटा गया और कुछ को पुलिस के हवाले कर दिया गया।"
अराफात ने आरोप लगाया कि यह घटना कानून व्यवस्था बलों और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं के बीच 'चिंताजनक सहयोग' को दर्शाती है। उन्होंने कहा, "जनाजे की नमाज़ में बाधा डालना और शोक मनाने वालों के विरुद्ध हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई करना लोगों के मूल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।"
लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर सवाल
अराफात ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि आख़िर कैसी शासन व्यवस्था है जो लोगों को अपने मृतकों का शांतिपूर्वक शोक मनाने का अधिकार नहीं देती। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएँ बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों, क़ानून के शासन और लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश में विपक्षी दलों के साथ व्यवहार पर पहले से ही नज़र बनाए हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिरासत में लिए गए पाँचों व्यक्तियों के विरुद्ध औपचारिक आरोप दायर किए जाते हैं या नहीं, और क्या बांग्लादेश सरकार इस घटना पर कोई स्वतंत्र जाँच का आदेश देती है।