बांग्लादेश में अवामी लीग के 49 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश फाउंडेशन (JMBF) ने बांग्लादेश के नोआखली जिले में 5 और 6 जून 2026 के बीच हुई कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, जिसमें अवामी लीग के छात्र एवं युवा संगठनों — छात्र लीग और जुबो लीग — के 49 कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर एक शांतिपूर्ण रैली में भाग लेने के आरोप में हिरासत में लिया गया, जिनमें 17 बच्चे भी शामिल हैं। संगठन के अनुसार, ये गिरफ्तारियाँ बांग्लादेश में राजनीतिक असहमति के दमन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं।
मुख्य घटनाक्रम
5 जून की दोपहर नोआखली सदर उपजिला के बदरहाट बाजार क्षेत्र में छात्र लीग द्वारा एक शांतिपूर्ण विरोध रैली आयोजित की गई थी। JMBF के अनुसार, कुछ घंटों बाद बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के छात्र संगठन जातीयतावादी छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने मैजदी कस्बे के पौरो बाजार क्षेत्र में 17 बच्चों सहित 18 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया।
इसके बाद 5 जून की रात से 6 जून की सुबह के बीच पुलिस ने ओजबलिया, कलादराप और नोआखली नगरपालिका क्षेत्रों में अभियान चलाकर 9 जुबो लीग और 15 छात्र लीग कार्यकर्ताओं सहित 24 लोगों को अतिरिक्त हिरासत में लिया।
मानवाधिकार संगठन की प्रतिक्रिया
JMBF के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा मानवाधिकार वकील शाहनूर इस्लाम ने कहा, 'मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान स्थापित पैटर्न का अनुसरण करते हुए, तारिक रहमान की वर्तमान सरकार के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार लगातार सीमित होते जा रहे हैं। हिंसा, तोड़फोड़ या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे के किसी स्पष्ट आरोप के बिना राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ पूरी तरह असंगत हैं।'
इस्लाम ने 17 बच्चों की हिरासत को विशेष रूप से चिंताजनक बताते हुए कहा, '17 बच्चों को हिरासत में लिया जाना बेहद चिंताजनक, अमानवीय और निंदनीय है। बच्चों के खिलाफ दमनकारी कदम बाल अधिकारों पर कन्वेंशन के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून बच्चों की हिरासत को केवल अंतिम उपाय के रूप में और यथासंभव कम अवधि के लिए ही मान्यता देता है।'
कानूनी उल्लंघन के आरोप
JMBF ने कहा कि ये गिरफ्तारियाँ बांग्लादेश के संविधान, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) और नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (ICCPR) द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन हैं। संगठन ने यह भी कहा कि यह घटना देशभर में राजनीतिक विरोध को दबाने के व्यापक पैटर्न को दर्शाती है।
JMBF की माँगें और आगे की राह
JMBF ने बांग्लादेशी अधिकारियों से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: 17 बच्चों समेत सभी 49 बंदियों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई; उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों और आरोपों की वापसी; तथा पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और विपक्षी दलों पर कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। यदि इन माँगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश की मानवाधिकार स्थिति को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है।