बांग्लादेश: अवामी लीग का आरोप — BSL छात्रों को परिसरों से खदेड़ा, हजारों की पढ़ाई अधर में
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी अवामी लीग ने 27 जुलाई 2026 को आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समर्थकों द्वारा उसके छात्र संगठन बांग्लादेश छात्र लीग (BSL) के हजारों सदस्यों को व्यवस्थित रूप से शैक्षणिक जीवन से बाहर किया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, भीड़ की धमकियों, मनमाने निष्कासन और गिरफ्तारियों ने देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों को BSL से जुड़े छात्रों के लिए 'नो-गो ज़ोन' बना दिया है।
आरोपों की पृष्ठभूमि
अवामी लीग के अनुसार, 2024 में बांग्लादेश में हुए तथाकथित 'छात्र आंदोलन' के बाद, जिसे पार्टी 'रोमांटिक रूप' देकर पेश किए जाने का आरोप लगाती है, शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही BSL से जुड़े छात्रों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को 'नई व्यवस्था का दुश्मन' घोषित कर दिया गया। पार्टी का कहना है कि अक्टूबर 2024 में आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत BSL पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्रतिशोध की एक सुनियोजित लहर चली।
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय बांग्लादेश में कथित 'लोकतांत्रिक रीसेट' की सराहना कर रहा है। अवामी लीग का तर्क है कि इस प्रशंसा की आड़ में हजारों युवाओं को उनके राजनीतिक संबंधों के आधार पर शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
विश्वविद्यालयों में निष्कासन के आंकड़े
अवामी लीग ने बांग्लादेश के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ढाका विश्वविद्यालय ने जुलाई 2024 की घटनाओं में कथित संलिप्तता को लेकर 403 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, जिनमें अधिकांश BSL सदस्य थे। जहांगीरनगर विश्वविद्यालय ने 100 से अधिक BSL छात्रों को निष्कासित किया, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 289 बताई गई है।
इसके अलावा शाहजलाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SUST), चिटगांव विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों में भी बड़े पैमाने पर निष्कासन और निलंबन की सूचनाएं हैं। पार्टी का आरोप है कि कई छात्रों के प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए या रोक लिए गए, और उन्हें परिसर में प्रवेश से वंचित किया गया — यहाँ तक कि उन छात्रों को भी जिनके खिलाफ कोई औपचारिक आरोप या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं थी।
एक छात्रा की आपबीती
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अवामी लीग ने बताया कि BSL से जुड़ी एक छात्रा ने — जिसने अपनी पहचान गुप्त रखी — एक मीडिया संस्थान को बताया कि परीक्षा देने की कोशिश के दौरान उस पर हमला हुआ। इसके बाद उसे 'संदिग्ध आरोपों' में गिरफ्तार कर लिया गया और उसे 27 दिन जेल में बिताने पड़े। पार्टी के अनुसार, वह छात्रा तब से परिसर नहीं लौट सकी और लगभग डेढ़ वर्ष बाद भी उसकी पढ़ाई अधर में है।
अवामी लीग ने इसे 'कोई अकेली घटना नहीं' बताते हुए कहा कि ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं जो मीडिया की नजर से ओझल हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप
अवामी लीग के अनुसार, ढाका, राजशाही और चिटगांव जैसे प्रमुख विश्वविद्यालयों में प्रशासन ने भीड़ के दबाव के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि शत्रुतापूर्ण छात्र समूहों को यह घोषित करने की खुली छूट दी गई है कि BSL से जुड़े छात्र कक्षाओं और परीक्षा केंद्रों में 'अवांछित' हैं।
पार्टी ने कहा, 'जब निशाने पर आए छात्र परीक्षाओं में शामिल होने के लिए सुरक्षा की मांग करते हैं, तो विभागाध्यक्षों का जवाब होता है — हम आपकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते। वापस मत आइए।' पार्टी ने इसे 'अनौपचारिक निष्कासन' की संज्ञा दी और विश्वविद्यालय अधिकारियों पर परिसरों को 'भीड़तंत्र के हवाले' करने का आरोप लगाया।
अवामी लीग की माँग और आगे का रास्ता
अवामी लीग ने इस स्थिति को 'न्याय नहीं, बल्कि सामूहिक दंड' करार दिया और कहा कि यह 'राजनीतिक प्रतिशोध की वेदी पर पूरी एक पीढ़ी का भविष्य बलिदान करने' जैसा है। पार्टी ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP), जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पर भी भय का माहौल बनाने में भूमिका का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि अंतरिम सरकार या आरोपी पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।