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क्या बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त खो रहा है?

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क्या बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त खो रहा है?

सारांश

बांग्लादेश का जूट उद्योग, जिसे कभी 'गोल्डन फाइबर' माना जाता था, आज उच्च लागत और पुरानी तकनीक के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह गया है। जानें इसके पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।

मुख्य बातें

उच्च उत्पादन लागत और पुरानी मशीनरी के कारण जूट उद्योग प्रभावित हो रहा है।
अन्य देशों ने अपने उद्योगों को आधुनिक किया है।
जनवरी 2023 में निर्यात आय स्थिर रही है।
सरकारी नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।
जूट का निर्यात पारंपरिक उत्पादों पर निर्भर है।

नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश जूट स्पिनर्स एसोसिएशन (बीजेएसए) के अध्यक्ष तापश प्रमाणिक का कहना है कि बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त तेजी से खो रहा है। इसका मुख्य कारण उच्च उत्पादन लागत, पुरानी मशीनरी और सीमित उत्पादकता हैं, जो इस क्षेत्र को निरंतर प्रभावित कर रही हैं।

एक साक्षात्कार में प्रमाणिक ने कहा कि बांग्लादेश की जूट मिलें अन्य देशों की प्रतिस्पर्धी कंपनियों से मुकाबला करने में कठिनाई का सामना कर रही हैं। अन्य देशों ने अपने कारखानों को आधुनिक किया है और बेहतर तकनीक का उपयोग करके लागत को कम किया है।

उन्होंने कहा कि महंगे बिजली, लोन पर उच्च ब्याज दरें और पुरानी मशीनों के कारण जूट उत्पाद महंगे हो गए हैं, जिससे उनकी स्थिति सिंथेटिक फाइबर और अन्य विकल्पों के मुकाबले कमजोर हो गई है।

हालांकि जूट को कभी गोल्डन फाइबर कहा गया था, लेकिन उद्योग के विकास में कमी और वैश्विक बाजार के रुझानों के कारण इसका महत्व कम होता जा रहा है।

प्रमाणिक ने कहा कि बांग्लादेश का जूट निर्यात अभी भी पारंपरिक उत्पादों जैसे धागे, हेसियन और बोरियों पर निर्भर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय खरीदार पर्यावरण के अनुकूल जूट उत्पादों की तलाश कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बांग्लादेश अनुसंधान, विकास, उत्पाद डिजाइन और जूट आधारित नए उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग में पीछे रह गया है।

जूट के पर्यावरणीय लाभों के बावजूद, उन्होंने कहा कि संरचनात्मक कमजोरियों, नीतिगत कमियों और बाजार संबंधी चुनौतियों के कारण यह उद्योग अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त नहीं कर पाया है।

सरकारी पहलें भी प्रभावी परिवर्तन लाने में विफल रही हैं और अक्सर खंडित और अल्पकालिक रहती हैं।

प्रमाणिक ने रेडीमेड गारमेंट्स (आरएमजी) क्षेत्र की तुलना करते हुए कहा कि निरंतर नीतिगत समर्थन, आधुनिक मशीनरी और बेहतर उत्पादकता के कारण आरएमजी बांग्लादेश का प्रमुख निर्यात उद्योग बन गया है।

इसके विपरीत, जूट क्षेत्र पुरानी तकनीक, वित्तीय संकट और कमजोर संस्थागत समर्थन में फंसा हुआ है। परिणामस्वरूप, जूट और जूट उत्पादों से निर्यात आय एक दशक से अधिक समय से 900 मिलियन डॉलर और 1 बिलियन डॉलर के बीच स्थिर बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मौजूदा चुनौतियों के बीच, इसे एक स्थायी और प्रतिस्पर्धी उद्योग में बदलने की आवश्यकता है। नीतिगत सुधार और तकनीकी उन्नति के बिना, इस क्षेत्र का भविष्य अधर में लटका रहेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश के जूट उद्योग की वर्तमान स्थिति क्या है?
बांग्लादेश का जूट उद्योग उच्च उत्पादन लागत और पुरानी तकनीक के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह गया है।
जूट उद्योग की समस्याएँ क्या हैं?
महंगी बिजली, उच्च ब्याज दरें, और जूट उत्पादों की कीमतों में वृद्धि इसकी मुख्य समस्याएँ हैं।
क्या जूट को फिर से 'गोल्डन फाइबर' बनाया जा सकता है?
यदि बांग्लादेश अनुसंधान और विकास में निवेश करे, तो जूट को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
बांग्लादेश में जूट उत्पादों का निर्यात कैसे हो रहा है?
जूट का अधिकांश निर्यात पारंपरिक उत्पादों पर निर्भर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
सरकार की भूमिका क्या है?
सरकार को जूट उद्योग के लिए स्थायी नीतियों और समर्थन की आवश्यकता है, ताकि यह प्रतिस्पर्धा में टिक सके।
राष्ट्र प्रेस
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