क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए यूनुस सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए?

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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए यूनुस सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए?

सारांश

वाशिंगटन, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वहां हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ सरकार द्वारा पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति बिगड़ रही है।
  • अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने चिंता व्यक्त की है।
  • सरकार से सुरक्षा के ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
  • अमेरिका को नफरत और हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
  • बांग्लादेश में आगामी चुनावों पर नजर रखने की जरूरत है।

वाशिंगटन, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वहां हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर निशाना बनाकर हिंसा हो रही है और ढाका की सरकार उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने में असफल रही है।

उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि अमेरिकी दृष्टिकोण से यह आवश्यक है कि बांग्लादेश जाने वाले किसी भी व्यक्ति को उसकी जातीय पहचान, पृष्ठभूमि या धर्म के कारण किसी तरह की हिंसा या विरोध का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "इस मामले में, हमने देखा है कि बांग्लादेश में खास तौर पर हिंदुओं पर कई हमले हुए हैं।"

वर्जीनिया से डेमोक्रेट सांसद सुहास सुब्रमण्यम के अनुसार ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद से एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बन गई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम है और अमेरिका को यह समझना होगा कि बांग्लादेश सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाने वाली है।

उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान धार्मिक स्थलों, स्मारकों, दुकानों और आम लोगों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा, "हमने हिंदू और अन्य धार्मिक स्मारकों और स्थलों पर हमले और उन्हें नुकसान पहुंचाते देखा है। हमने हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के व्यवसायों पर हमले और उन्हें नुकसान पहुंचाते देखा है। और अब हम कई मामलों में लोगों पर हमले और उनकी हत्या होते देख रहे हैं।"

उन्होंने माना कि सत्ता परिवर्तन के समय हालात तनावपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह लगातार हिंसा हो रही है, वह गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यह हिंसा सरकार बनने के तुरंत बाद से ही जारी है।

सुहास सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि अमेरिका में रहने वाले बांग्लादेशी मूल के लोग इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं। सुब्रमण्यम ने कहा, "मेरे बहुत सारे बांग्लादेशी अमेरिकी मतदाता हैं जो हिंदू, मुस्लिम और अन्य धर्मों के हैं। वे बांग्लादेश में जो हो रहा है, उसके बारे में चिंतित हैं। उनके परिवार वहां हैं और वे चाहते हैं कि हम यह पता लगाने की कोशिश करें कि हम भविष्य में वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कैसे कर सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि अमेरिका को नफरत और हिंसा से जुड़े अपराधों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते रहना चाहिए और साथ ही कूटनीतिक विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम अमेरिका में अपने कुछ विकल्पों पर विचार करते रहेंगे कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते हैं कि वहां लोगों को उनके बैकग्राउंड, धर्म या जाति की परवाह किए बिना सुरक्षित रखा जाए। हमें नफरत और हिंसा की घटनाओं की निंदा करनी होगी।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका इस मुद्दे पर बांग्लादेश पर दबाव बना सकता है, तो उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों प्रमुख दलों का साथ मिलकर काम करना आवश्यक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में ट्रंप प्रशासन के पास बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बनाने की अधिक शक्ति है और यह देखना होगा कि वह इस दिशा में क्या कदम उठाता है।

बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा, "हम एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देखना चाहेंगे जहां हर नागरिक की आवाज सुनी जाए। पिछले कुछ सालों में जो कुछ हुआ है, उसे देखते हुए हम चुनाव प्रक्रिया को लेकर चिंतित हैं। अमेरिका किसी भी वैध रूप से चुनी गई सरकार के साथ काम करना चाहता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि वह सरकार जनता की वास्तविक इच्छा का प्रतिनिधित्व करे।"

उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश में बढ़ती अमेरिका विरोधी भावना और हिंसा दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं अमेरिका-बांग्लादेश संबंधों पर बुरा असर डाल सकती हैं।

बांग्लादेश खुद को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश के रूप में पेश करता रहा है, जहां संविधान में अल्पसंख्यकों को अधिकार दिए गए हैं। हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने समय-समय पर वहां राजनीतिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता को लेकर चिंता जताई है। बांग्लादेश दक्षिण एशिया में अमेरिका का एक अहम साझेदार भी माना जाता है, खासकर क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के मामलों में।

अमेरिका पहले भी कूटनीतिक बातचीत, सार्वजनिक बयानों और संसदीय निगरानी के जरिए बांग्लादेश में मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाता रहा है। खास तौर पर चुनाव का समय और संवेदनशील होता है क्योंकि तब ये मुद्दे अधिक गंभीर हो जाते हैं।

Point of View

NationPress
02/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय किए जा रहे हैं?
अभी तक बांग्लादेश सरकार से पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी की बात सामने आ रही है।
अमेरिकी सांसद ने इस मुद्दे पर क्या कहा है?
सुहास सुब्रमण्यम ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की चिंता जताई है।
क्या अमेरिका बांग्लादेश पर दबाव बना सकता है?
इस मुद्दे पर दबाव बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों का सहयोग आवश्यक है।
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