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क्या आतंकवाद को प्रायोजित करना मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित किया जाना चाहिए? : भारत

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क्या आतंकवाद को प्रायोजित करना मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित किया जाना चाहिए? : भारत

सारांश

भारत ने आतंकवाद और उसके प्रायोजकों को मानवता के खिलाफ अपराध मानने की मांग की है। यह एक महत्वपूर्ण विषय है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन सकता है। जानिए इस पर भारतीय सांसद का क्या कहना है और कैसे यह मसौदा मानवता के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।

मुख्य बातें

भारत ने आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध माना है।
आतंकवाद के प्रायोजकों को भी दंडित किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का सम्मान होना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय सहमति आवश्यक है।
नागालैंड की सांसद ने यह मुद्दा उठाया है।

संयुक्त राष्ट्र, 14 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों को ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ घोषित करने की मांग की है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की विधिक समिति में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की सांसद एस. फांगनॉन कोन्याक ने कहा, "हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि मानवता के विरुद्ध अपराधों की किसी भी परिभाषा में आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों द्वारा किए गए जघन्य अपराधों और अत्याचारों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।"

मानवता के विरुद्ध अपराधों पर समिति की चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, "न्याय और जवाबदेही की मांग है कि ऐसे कृत्यों को नजरअंदाज न किया जाए।"

कोन्याक ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित संधि में आतंकवाद को रोकने और दंडित करने का प्रावधान होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इसके कुछ बिंदुओं पर सावधानी और असहमति भी जताई।

उन्होंने कहा कि किसी भी संधि में "कानूनी प्रणालियों की विविधता पर विचार किया जाना चाहिए और राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट रूप से सम्मान किया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने देश में या अपने नागरिकों द्वारा किए गए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और बड़े अत्याचारों के लिए न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

कोन्याक ने यह भी कहा कि किसी भी सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। अन्यथा यह मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के साथ टकराव और भ्रम पैदा कर सकता है।

यह मसौदा अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग द्वारा तैयार किया गया है, और महासभा ने 2028 और 2029 में इस विषय पर वैश्विक वार्ता करने का प्रस्ताव रखा है ताकि ‘मानवता के विरुद्ध अपराधों’ पर एक संधि बनाई जा सके।

राज्यसभा में नागालैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली कोन्याक ने बताया कि यह मसौदा उस रोम संविधि से प्रेरित है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की स्थापना की गई थी। उन्होंने बताया कि भारत और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों सहित कई देशों को इस पर कड़ी आपत्ति है और वे इसके पक्षकार नहीं हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों ने आईसीसी के राजनीतिकरण और पक्षपात को लेकर गहरी चिंता जताई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि आतंकवाद को मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित करने की मांग एक आवश्यक कदम है। इससे न केवल न्याय की प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एकजुटता भी बढ़ेगी। यह समय है कि सभी देश इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध क्यों कहा?
भारत का मानना है कि आतंकवाद और उसके प्रायोजकों द्वारा किए गए अपराधों को मानवता के विरुद्ध अपराध माना जाना चाहिए, ताकि न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
क्या इस प्रस्ताव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन होगा?
इस प्रस्ताव पर कई देशों की आपत्ति है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय है और इसके लिए वैश्विक वार्ता की आवश्यकता है।
आतंकवाद के खिलाफ क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संधियों का प्रस्ताव और उनके कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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